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संगोष्ठी में जल संरक्षण पर जोर दिया
Kushinagar
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:30 AM IST
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पडरौना। शनिवार को यूएनपीजी कॉलेज के पुस्तकालय सभागार में मंडलायुक्त आरके ओझा ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में जिस गति से भू-गर्भ जलस्तर गिर रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। अगर बचे हुए जलाशय और पोखरों का अस्तित्व नहीं बचाया गया तो स्थिति और भी भयावह होती जाएगी।
इसके लिए आमजन का सहयोग और उनमें जागरूकता पैदा करना बहुत जरूरी है। मंडलायुक्त ओझा विवेकानंद युवा कल्याण केंद्र पडरौना की ओर से आयोजित पूर्वी उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन के दौर में जल प्रबंधन की चुनौतियां विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ करने के बाद समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि यूपी के 820 ब्लॉकों में से 107 में ट्यूबवेल या बोरिंग लगाने पर कानूनी रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है। जबकि 108 ब्लॉकों में आंशिक रूप से रोक लगाई गई है। कालोनियों का प्रचलन भी जल स्तर नीचे जाने में भूमिका अदा कर रहा है। बारिश के पानी का जब तक संरक्षण नहीं होगा, जलस्तर में सुधार नहीं हो सकता। मंडलायुक्त ने जल प्रदूषण को रोकने के लिए मानव मल का उचित निस्तारण करने पर जोर देने को कहा। सभी लोग शौचालय का प्रयोग करेंगे तो समस्या के समाधान में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि केवल शासन स्तर पर नहीं इसके लिए आमजन को संकल्प लेन होगा कि हम जल का संरक्षण करेंगे और उसे प्रदूषित होने से बचाएंगे। विशिष्ट अतिथि पूर्व मुख्य वन संरक्षक उत्तर प्रदेश मोहम्मद अहसान ने जल संरक्षण में वनों की भूमिका और महत्व पर प्रकाश डाला। कहा कि अंधाधुंध विकास के कारण बड़े स्तर पर जंगल काटे जा रहे हैं।
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पौधरोपण कर उसकी भरपाई की जाय तो बहुत सी प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरणीय समस्याओं से बचा जा सकता है। अध्यक्षीय संबोधन में प्रोफेसर जगदीश सिंह ने कहा कि पर्यावरण से संतुलन बैठाते हुए औद्योगीकरण हो तथा शहरों में भी जल संरक्षण की व्यवस्था बनाई जाय। समारोह को डॉ. सिराज अख्तर वजीह, रवींद्र श्रीवास्तव आदि ने भी संबोधित किया। आयोजक डॉ. सीबी सिंह ने सभी अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस दौरान विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने पर्यावरण संबंधी चित्रांकन किया।
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इसके लिए आमजन का सहयोग और उनमें जागरूकता पैदा करना बहुत जरूरी है। मंडलायुक्त ओझा विवेकानंद युवा कल्याण केंद्र पडरौना की ओर से आयोजित पूर्वी उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन के दौर में जल प्रबंधन की चुनौतियां विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ करने के बाद समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि यूपी के 820 ब्लॉकों में से 107 में ट्यूबवेल या बोरिंग लगाने पर कानूनी रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है। जबकि 108 ब्लॉकों में आंशिक रूप से रोक लगाई गई है। कालोनियों का प्रचलन भी जल स्तर नीचे जाने में भूमिका अदा कर रहा है। बारिश के पानी का जब तक संरक्षण नहीं होगा, जलस्तर में सुधार नहीं हो सकता। मंडलायुक्त ने जल प्रदूषण को रोकने के लिए मानव मल का उचित निस्तारण करने पर जोर देने को कहा। सभी लोग शौचालय का प्रयोग करेंगे तो समस्या के समाधान में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि केवल शासन स्तर पर नहीं इसके लिए आमजन को संकल्प लेन होगा कि हम जल का संरक्षण करेंगे और उसे प्रदूषित होने से बचाएंगे। विशिष्ट अतिथि पूर्व मुख्य वन संरक्षक उत्तर प्रदेश मोहम्मद अहसान ने जल संरक्षण में वनों की भूमिका और महत्व पर प्रकाश डाला। कहा कि अंधाधुंध विकास के कारण बड़े स्तर पर जंगल काटे जा रहे हैं।
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पौधरोपण कर उसकी भरपाई की जाय तो बहुत सी प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरणीय समस्याओं से बचा जा सकता है। अध्यक्षीय संबोधन में प्रोफेसर जगदीश सिंह ने कहा कि पर्यावरण से संतुलन बैठाते हुए औद्योगीकरण हो तथा शहरों में भी जल संरक्षण की व्यवस्था बनाई जाय। समारोह को डॉ. सिराज अख्तर वजीह, रवींद्र श्रीवास्तव आदि ने भी संबोधित किया। आयोजक डॉ. सीबी सिंह ने सभी अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस दौरान विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने पर्यावरण संबंधी चित्रांकन किया।