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लोक अदालत में 1497 वादों का निस्तारण
Kushinagar
Updated Mon, 24 Mar 2014 05:30 AM IST
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पडरौना। जिला एवं सत्र न्यायालय कुशीनगर स्थान पडरौना में रविवार को लोक अदालत एवं महिला विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। लोक अदालत में कुल 1497 वादों का निस्तारण किया गया। इसके बाद महिला विधिक साक्षरता शिविर में महिलाओं को उनके अधिकारों से वाकिफ कराया गया।
रविवार को सुबह दस बजे से दोपहर एक बजे तक चली लोक अदालत में फौजदारी के 583, उत्तराधिकार के 10, सिविल के 02, विद्युत के 02, भरण-पोषण के 06, मोटर दुर्घटना के 05 और बैंक ऋण के 889 वादों का निस्तारण किया गया। फौजदारी वाद के निस्तारण के दौरान 71341 रुपये जुर्माना एवं बैंक ऋण से संबंधित वादों के निस्तारण में 99.51 लाख रुपये वसूला गया।
मध्याह्न के बाद महिला विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। अधिवक्ता मिथिलेश दीक्षित ने विक्षिप्त एवं अर्द्ध विक्षिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध अथवा उनकी ओर से वाद दायर करने की प्रक्रिया समझाई। अधिवक्ता हरिशंकर दीक्षित ने निर्धन व्यक्तियों की ओर से वाद दायर करने की प्रक्रिया, महेंद्र गोविंद राव ने मध्यस्थता केंद्र की उपयोगिता, महंथ गोपाल दास महिला सशक्तिकरण, सिविल जज सीनियर डिवीजन सुबोध भारती ने महिलाओं के कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुरेंद्र नाथ ने लोक अदालत एवं विधिक साक्षरता की महत्ता व उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। अपर जिला जज रवींद्र कुमार ने आश्रिती का भरण-पोषण, मनोज कुमार सिंह गौतम ने गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीकी अधिनियम, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय एके गणेश ने हिन्दू ला, मुस्लिम ला एवं दंड प्रक्रिया संहिता में महिलाओं से संबंधित भरण पोषण के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। अंत में जिला जज एके उपाध्याय ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस दौरान कई अधिवक्ता एवं वादकारी उपस्थित थे।
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रविवार को सुबह दस बजे से दोपहर एक बजे तक चली लोक अदालत में फौजदारी के 583, उत्तराधिकार के 10, सिविल के 02, विद्युत के 02, भरण-पोषण के 06, मोटर दुर्घटना के 05 और बैंक ऋण के 889 वादों का निस्तारण किया गया। फौजदारी वाद के निस्तारण के दौरान 71341 रुपये जुर्माना एवं बैंक ऋण से संबंधित वादों के निस्तारण में 99.51 लाख रुपये वसूला गया।
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मध्याह्न के बाद महिला विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। अधिवक्ता मिथिलेश दीक्षित ने विक्षिप्त एवं अर्द्ध विक्षिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध अथवा उनकी ओर से वाद दायर करने की प्रक्रिया समझाई। अधिवक्ता हरिशंकर दीक्षित ने निर्धन व्यक्तियों की ओर से वाद दायर करने की प्रक्रिया, महेंद्र गोविंद राव ने मध्यस्थता केंद्र की उपयोगिता, महंथ गोपाल दास महिला सशक्तिकरण, सिविल जज सीनियर डिवीजन सुबोध भारती ने महिलाओं के कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुरेंद्र नाथ ने लोक अदालत एवं विधिक साक्षरता की महत्ता व उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। अपर जिला जज रवींद्र कुमार ने आश्रिती का भरण-पोषण, मनोज कुमार सिंह गौतम ने गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीकी अधिनियम, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय एके गणेश ने हिन्दू ला, मुस्लिम ला एवं दंड प्रक्रिया संहिता में महिलाओं से संबंधित भरण पोषण के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। अंत में जिला जज एके उपाध्याय ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस दौरान कई अधिवक्ता एवं वादकारी उपस्थित थे।
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