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परिवार की परवरिश की चिंता सता रही
Kushinagar
Updated Sun, 22 Dec 2013 05:43 AM IST
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पडरौना। शनिवार को खड्डा से चलकर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करने पहुंचे खड्डा चीनी मिल के दैनिक वेतन भोगी मजदूर डीएम से मिलने उनके आवास पर चले गए। मजदूरों की जिद थी कि वे डीएम से मिलकर अपनी व्यथा कहेंगे।
मजदूर नेता चित्रसेन द्विवेदी का कहना था कि जब चीनी मिल कॉरपोरेशन के अधिकार में थी, तबसे ये दैनिक वेतन भोगी मजदूर कार्य कर रहे हैं। उनके अनुसार 1980 से कार्य कर रहे इन मजदूरों को इस वर्ष कार्य पर नहीं बुलाया जाने से इनके परिवार के सामने रोटी का संकट आ गया है। उन्होंने चीनी मिल के प्रबंधतंत्र पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन मजदूरों की लड़ाई लड़ने के कारण उनका स्थानांतरण कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी मिल के लोग उन्हें जान से मारने की धमकियां भी दिलवा रहे हैं। धरने के दौरान एक बार रात को उन्हें घर जाते समय रास्ते में रोककर इसका प्रयास भी किया जा चुका है, जिसकी तहरीर दी जा चुकी है।
45 वर्षीय मजदूर अमित बताते हैं कि उनके परिवार की परवरिश इसी चीनी मिल की मजदूरी से होती रही है। इसके अलावा उनके पास दूसरा कोई रोजगार नहीं है। काम पर वापस नहीं बुलाए जाने के बाद उनके बच्चों की फीस तक नहीं जमा हो पा रही है। परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है।
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48 वर्षीय मजदूर विरजू चौहान का कहना था कि उन लोगों ने चीनी मिल के अलावा कोई और कार्य नहीं सीखा है। चीनी मिल में काम नहीं मिलने के बाद उनके परिवार में काफी चिंता बढ़ गई है। पूरा परिवार चिंतित है, रोटी के संकट की आशंका से पूरा परिवार सदमे में है।
50 वर्षीय मजदूर राजेश का कहना है कि उन्होंने अपने कार्य की शुरुआत इसी चीनी मिल से की। इसके अलावा कोई अन्य कार्य सीखा ही नहीं, जिससे परिवार की रोजी रोटी चल सके। उनके अनुसार चीनी मिल के तानाशाही रवैये के कारण परिवार की परवरिस की चिंता सता रही है।
55 वर्षीय मजदूर जयप्रकाश यादव ने बताया कि वह रिटायर होने वाले हैं। कहा कि उन्होंने अपनी पूरी जवानी इस मिल में काम किया। चीनी मिल के हित के लिए उन्होंने हमेशा कार्य किया है। कोई दूसरा सहारा भी उनके पास नहीं है। चीनी मिल के प्रबंध तंत्र के लोग इस वर्ष कार्य पर न बुलाकर उनके परिवार की जिंदगियों को गर्दिश में धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि उनके पूरे परिवार की परवरिश इसी चीनी मिल से मिली मजदूरी के सहारे होता है।
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मजदूर नेता चित्रसेन द्विवेदी का कहना था कि जब चीनी मिल कॉरपोरेशन के अधिकार में थी, तबसे ये दैनिक वेतन भोगी मजदूर कार्य कर रहे हैं। उनके अनुसार 1980 से कार्य कर रहे इन मजदूरों को इस वर्ष कार्य पर नहीं बुलाया जाने से इनके परिवार के सामने रोटी का संकट आ गया है। उन्होंने चीनी मिल के प्रबंधतंत्र पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन मजदूरों की लड़ाई लड़ने के कारण उनका स्थानांतरण कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी मिल के लोग उन्हें जान से मारने की धमकियां भी दिलवा रहे हैं। धरने के दौरान एक बार रात को उन्हें घर जाते समय रास्ते में रोककर इसका प्रयास भी किया जा चुका है, जिसकी तहरीर दी जा चुकी है।
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45 वर्षीय मजदूर अमित बताते हैं कि उनके परिवार की परवरिश इसी चीनी मिल की मजदूरी से होती रही है। इसके अलावा उनके पास दूसरा कोई रोजगार नहीं है। काम पर वापस नहीं बुलाए जाने के बाद उनके बच्चों की फीस तक नहीं जमा हो पा रही है। परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है।
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48 वर्षीय मजदूर विरजू चौहान का कहना था कि उन लोगों ने चीनी मिल के अलावा कोई और कार्य नहीं सीखा है। चीनी मिल में काम नहीं मिलने के बाद उनके परिवार में काफी चिंता बढ़ गई है। पूरा परिवार चिंतित है, रोटी के संकट की आशंका से पूरा परिवार सदमे में है।
50 वर्षीय मजदूर राजेश का कहना है कि उन्होंने अपने कार्य की शुरुआत इसी चीनी मिल से की। इसके अलावा कोई अन्य कार्य सीखा ही नहीं, जिससे परिवार की रोजी रोटी चल सके। उनके अनुसार चीनी मिल के तानाशाही रवैये के कारण परिवार की परवरिस की चिंता सता रही है।
55 वर्षीय मजदूर जयप्रकाश यादव ने बताया कि वह रिटायर होने वाले हैं। कहा कि उन्होंने अपनी पूरी जवानी इस मिल में काम किया। चीनी मिल के हित के लिए उन्होंने हमेशा कार्य किया है। कोई दूसरा सहारा भी उनके पास नहीं है। चीनी मिल के प्रबंध तंत्र के लोग इस वर्ष कार्य पर न बुलाकर उनके परिवार की जिंदगियों को गर्दिश में धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि उनके पूरे परिवार की परवरिश इसी चीनी मिल से मिली मजदूरी के सहारे होता है।