{"_id":"70-78571","slug":"Kushinagar-78571-70","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहरों में पानी नहीं, सिंचाई का संकट गहराया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहरों में पानी नहीं, सिंचाई का संकट गहराया
Kushinagar
Updated Fri, 20 Dec 2013 05:43 AM IST
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पडरौना। खेतों की सिंचाई का समय आ गया है, पर अब तक जिले की नहरों में पानी नहीं आया। वहीं कुछ नहरें ऐसी हैं, जिनकी ठीक से सफाई नहीं हो पाई है। इस कारण इनका पानी टेल तक नहीं पहुंच पाता है। इसके चलते पानी आने पर भी कई जगहों के किसान खेतों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। किसानाें को अपने खेत और फसलों की सिंचाई निजी या किराए के साधन से करनी पड़ती है। यह काफी महंगा साबित हो रहा है। इस समस्या से किसानों में काफी नाराजगी है।
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कुशीनगर राजवाहा में पांच साल से पानी नहीं
कसया। क्षेत्र के कुशीनगर राजवाहा में पांच साल से पानी नहीं आया है। नहर की सफाई के नाम पर दिखावा किया जाता है। इस साल भी नहर की सफाई एक माह पूर्व हो गई। पर अब तक पानी नहीं आया है। इससे किसानों में रोष है।
खजुरिया माइनर से निकलने वाली यह राजवाहा नहर कुलकुला स्थान तक जाती है। करीब 25 किमी लंबी इस राजवाहा नहर से सिसवा महंथ, अनिरुद्धवा, बनवारी टोला, पिपरी, परासखाड़, भरवलिया, तुर्कवलिया, नरकटिया आदि गांवों के सैकड़ों किसानों के कई हजार एकड़ खेतों की सिंचाई होती रही है। पर पांच सालों से इस नहर में पानी नहीं आया। किसान महंगे वैकल्पिक साधनों से फंसलों की सिंचाई करने को मजबूर हैं। किसान रामप्रवेश, रमाकांत, सिंहासन सिंह, रामअवध सिंह आदि ने विभाग के इस रवैये पर आंदोलन की चेतावनी दी है। किसान नेता गोर्वधन प्रसाद गोंड का कहना है कि यदि विभाग का यही रवैया रहा तो किसान एक दिन नहर को पाटकर खेत बना लेंगे।
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पानी नहीं आने से नहरों में सिल्ट भरा
कुशीनगर। मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की चाफ शाखा में समय से पानी न आने के कारण इस शाखा से जुड़े कई गांवों के किसान आज परेशान हैं। इन किसानों को माईनर में पानी नहीं मिलने से दिक्कत हो रही है।
मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की चाफ शाखा, जो दुदही तमकुही पडरौना सहित अन्य विकास खंडों के किसानों के खेती में सिंचाई के काम के लिए पानी मुहैया कराती है, लेकिन इस बार इस माईनर में समय से पानी न आने के कारण क्षेत्र के ठाढ़ीभार, विजयपुर, ब्रम्हपुर, गोबरही, गुरवलिया, राजापाकड़, सेमरा, धर्मपुर, दुमही, पृथ्वीपुर, सपही टड़वा, उजारनाथ, मछरियां घोरठ सहित इस मानइर से जुडे़ कई गांवों के किसान आज इस माइनर में समय से पानी न आने के कारण अपनी गेहूं की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। यदा कदा कोई किसान पंपिंगसेट से सिंचाई करना चाहते भी हैं तो डीजल की महंगाई उन्हें सताती है। क्षेत्रीय किसान भुआल गोड, बलिराम, रामाकांत, राधेश्याम, राधेश्याम गोड़, दीनानाथ, जगरनाथ, केवट, मृत्युंजय पांडेय सहित कई किसानों का कहना है कि विभाग समय पर माइनरों में पानी उपलब्ध नहीं कराता। इस कारण किसानों की फसल सूख रही है। साधन संपन्न किसान तो किसी तरह से पंपिंग सेट से अपने खेत की सिंचाई तो कर ले रहे हैं, लेकिन अन्य किसान इस महंगाई से परेशान हो जाते हैं। इनको सिंचाई करने के लिए कम से कम 50-100 लीटर डीजल की आवश्यकता पड़ती है। उनके लिए इतनी बड़ी रकम डीजल खरीदने के लिए नहीं हो पाती है। इस कारण किसान इस समय सिंचाई के संकट से जूझ रहे हैं।
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नहरें बेपानी, किसानों की परेशानी
झाड़ियों से पट गया है नहर का पेट
हाटा। नहरें इस क्षेत्र के किसानों की लाइफ लाइन कहीं जाती हैं, लेकि न विभाग की मनमानी से कई नहरें न केवल बेपानी हैं, बल्कि कई नहरों की सफाई हुए कई-कई वर्ष बीत गए हैं। इस कारण क्षेत्र की कई नहरें झाड़ियों से पटी पड़ी हैं।
गेहूं की बुआई का समय चल रहा है, लेकिन क्षेत्र की नहरें बेपानी हैं। कुछ नहरें तो इस कदर पटी हुई हैं कि दिखाई ही नहीं दे रही हैं। बानगी के तौर पर सेमरा राजवाहा से निकल कर पचार, खभराभार, गंभीरपुर, बहुआस, सिरसिया, मदरहा, समभरिया, सेमरी परसौनी आदि गांवों से हो की गुजरने वाला पचार राजवाहा को ही लें, जो करीब सात वर्षों से बेपानी है। कारण कि विभाग के बेरुखी से इस नहर की सफाई होनी बंद हो गई। धीरे-धीरे नहर झाड़ियों से भरने लगी और कुछ वर्षों बाद नहर में पानी आना बंद हो गया। इससे इस क्षेत्र के किसानों की फसलों को काफी नुकसान हुआ। किसानों को मजबूर होकर अपनी गांवों में बोरिंग आदि का सहारा लेना पड़। इसके बाद भी विभाग इस क्षेत्र के लोगों को पनिवट भेजता रहता था। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद किसानों का पनिवट माफ करने की घोषणा के बाद किसानों को इस समस्या से निजात मिली। क्षेत्र के किसान गौतम सिंह का कहना है कि पहले जब नहर में पानी आता था तो खेती करने में आसानी है। खेती की लगात कम हो जाती थी।
अशोक सिंह का कहना कि विभाग पता नहीं क्यों इस नहर से इतनी क्यों बेरुखी दिखा रहा है। किसानों का बहुत नुकसान हो रहा है। विष्णु प्रिय पाठक ने बताया कि नहर के पटने से खेतों में पानी नहीं मिल पा रहा है। इस कारण वैकल्पिक साधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है। किसान गोरख साहनी का कहना है कि नहर के बेपानी होना की पूरी जिम्मेदारी विभाग की है। विभाग केवल कागजों में ही नहर की सफाई करता रहा है। यही देन है कि आज नहर पानी देने लायक नहीं है। विरेंद्र सिंह, संजय सिंह, यसवंत सिंह, महेंद्र प्रसाद ने मांग किया कि विभाग जल्द से जल्द इस नहर को साफ करा कर किसानों को खेती की समस्या से निजात दिलाए।
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कुशीनगर राजवाहा में पांच साल से पानी नहीं
कसया। क्षेत्र के कुशीनगर राजवाहा में पांच साल से पानी नहीं आया है। नहर की सफाई के नाम पर दिखावा किया जाता है। इस साल भी नहर की सफाई एक माह पूर्व हो गई। पर अब तक पानी नहीं आया है। इससे किसानों में रोष है।
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खजुरिया माइनर से निकलने वाली यह राजवाहा नहर कुलकुला स्थान तक जाती है। करीब 25 किमी लंबी इस राजवाहा नहर से सिसवा महंथ, अनिरुद्धवा, बनवारी टोला, पिपरी, परासखाड़, भरवलिया, तुर्कवलिया, नरकटिया आदि गांवों के सैकड़ों किसानों के कई हजार एकड़ खेतों की सिंचाई होती रही है। पर पांच सालों से इस नहर में पानी नहीं आया। किसान महंगे वैकल्पिक साधनों से फंसलों की सिंचाई करने को मजबूर हैं। किसान रामप्रवेश, रमाकांत, सिंहासन सिंह, रामअवध सिंह आदि ने विभाग के इस रवैये पर आंदोलन की चेतावनी दी है। किसान नेता गोर्वधन प्रसाद गोंड का कहना है कि यदि विभाग का यही रवैया रहा तो किसान एक दिन नहर को पाटकर खेत बना लेंगे।
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पानी नहीं आने से नहरों में सिल्ट भरा
कुशीनगर। मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की चाफ शाखा में समय से पानी न आने के कारण इस शाखा से जुड़े कई गांवों के किसान आज परेशान हैं। इन किसानों को माईनर में पानी नहीं मिलने से दिक्कत हो रही है।
मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की चाफ शाखा, जो दुदही तमकुही पडरौना सहित अन्य विकास खंडों के किसानों के खेती में सिंचाई के काम के लिए पानी मुहैया कराती है, लेकिन इस बार इस माईनर में समय से पानी न आने के कारण क्षेत्र के ठाढ़ीभार, विजयपुर, ब्रम्हपुर, गोबरही, गुरवलिया, राजापाकड़, सेमरा, धर्मपुर, दुमही, पृथ्वीपुर, सपही टड़वा, उजारनाथ, मछरियां घोरठ सहित इस मानइर से जुडे़ कई गांवों के किसान आज इस माइनर में समय से पानी न आने के कारण अपनी गेहूं की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। यदा कदा कोई किसान पंपिंगसेट से सिंचाई करना चाहते भी हैं तो डीजल की महंगाई उन्हें सताती है। क्षेत्रीय किसान भुआल गोड, बलिराम, रामाकांत, राधेश्याम, राधेश्याम गोड़, दीनानाथ, जगरनाथ, केवट, मृत्युंजय पांडेय सहित कई किसानों का कहना है कि विभाग समय पर माइनरों में पानी उपलब्ध नहीं कराता। इस कारण किसानों की फसल सूख रही है। साधन संपन्न किसान तो किसी तरह से पंपिंग सेट से अपने खेत की सिंचाई तो कर ले रहे हैं, लेकिन अन्य किसान इस महंगाई से परेशान हो जाते हैं। इनको सिंचाई करने के लिए कम से कम 50-100 लीटर डीजल की आवश्यकता पड़ती है। उनके लिए इतनी बड़ी रकम डीजल खरीदने के लिए नहीं हो पाती है। इस कारण किसान इस समय सिंचाई के संकट से जूझ रहे हैं।
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नहरें बेपानी, किसानों की परेशानी
झाड़ियों से पट गया है नहर का पेट
हाटा। नहरें इस क्षेत्र के किसानों की लाइफ लाइन कहीं जाती हैं, लेकि न विभाग की मनमानी से कई नहरें न केवल बेपानी हैं, बल्कि कई नहरों की सफाई हुए कई-कई वर्ष बीत गए हैं। इस कारण क्षेत्र की कई नहरें झाड़ियों से पटी पड़ी हैं।
गेहूं की बुआई का समय चल रहा है, लेकिन क्षेत्र की नहरें बेपानी हैं। कुछ नहरें तो इस कदर पटी हुई हैं कि दिखाई ही नहीं दे रही हैं। बानगी के तौर पर सेमरा राजवाहा से निकल कर पचार, खभराभार, गंभीरपुर, बहुआस, सिरसिया, मदरहा, समभरिया, सेमरी परसौनी आदि गांवों से हो की गुजरने वाला पचार राजवाहा को ही लें, जो करीब सात वर्षों से बेपानी है। कारण कि विभाग के बेरुखी से इस नहर की सफाई होनी बंद हो गई। धीरे-धीरे नहर झाड़ियों से भरने लगी और कुछ वर्षों बाद नहर में पानी आना बंद हो गया। इससे इस क्षेत्र के किसानों की फसलों को काफी नुकसान हुआ। किसानों को मजबूर होकर अपनी गांवों में बोरिंग आदि का सहारा लेना पड़। इसके बाद भी विभाग इस क्षेत्र के लोगों को पनिवट भेजता रहता था। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद किसानों का पनिवट माफ करने की घोषणा के बाद किसानों को इस समस्या से निजात मिली। क्षेत्र के किसान गौतम सिंह का कहना है कि पहले जब नहर में पानी आता था तो खेती करने में आसानी है। खेती की लगात कम हो जाती थी।
अशोक सिंह का कहना कि विभाग पता नहीं क्यों इस नहर से इतनी क्यों बेरुखी दिखा रहा है। किसानों का बहुत नुकसान हो रहा है। विष्णु प्रिय पाठक ने बताया कि नहर के पटने से खेतों में पानी नहीं मिल पा रहा है। इस कारण वैकल्पिक साधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है। किसान गोरख साहनी का कहना है कि नहर के बेपानी होना की पूरी जिम्मेदारी विभाग की है। विभाग केवल कागजों में ही नहर की सफाई करता रहा है। यही देन है कि आज नहर पानी देने लायक नहीं है। विरेंद्र सिंह, संजय सिंह, यसवंत सिंह, महेंद्र प्रसाद ने मांग किया कि विभाग जल्द से जल्द इस नहर को साफ करा कर किसानों को खेती की समस्या से निजात दिलाए।