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बालश्रमिकों से तैयार करा रहे ओवरब्रिज
Kushinagar
Updated Fri, 20 Dec 2013 05:42 AM IST
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खड्डा। एनएच 28 पर पनियहवा तिराहे के पास रेलवे की ओर से बनवाए जा रहे ओवरब्रिज में बच्चों से भी काम कराया जा रहा है। इस निर्माण मेें दस से बारह साल तक के बच्चे भी मजदूर के तौर पर श्रम कर रहे हैं। इस पर न तो श्रम विभाग की नजर पड़ रही है, ना ही अधिकारियों की।
हनुमानगंज थाना क्षेत्र के पनियहवा-छितौनी रेल मार्ग के ऊपर से रेलवे की ओर से ओवरब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है। इस निर्माण की देखरेख रेलवे के अधिकारी कर रहे हैं। ओवरब्रिज के लिए बड़े-बड़े गड्ढे बनाकर उनमें पायों का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें कई फिट ऊंचे इस निर्माण स्थल पर बालश्रमिक अपने वजन के बराबर गिट्टी-सीमेंट का मसाला सिर पर लेकर ढोते दिख जाएंगे। यहां काम कर रहे बच्चों ने बताया कि उनमें से कुछ आसपास के हैं और कुछ पड़ोसी प्रांत बिहार के मदनपुर के रहने वाले हैं। बच्चों के मुताबिक घर की आर्थिक तंगी के कारण वे काम करने के लिए मजबूर हैं। बताया जाता है कि इस ठंड में अगर कांपते हुए बच्चे काम में जरा भी सुस्ती दिखाते हैं तो उन्हें डांट सुनने के साथ मजदूरी काटने की धमकियां मिलती हैं। जहां यह काम हो रहा है, उसी के ठीक सामने हनुमानगंज थाने की पुलिस पिकेट है।
इन बाल मजदूरों को देखकर लोग श्रम विभाग की सक्रियता और इसे रोकने के लिए चलाए गए अभियान पर सवाल उठा रहे हैं। साथ ही अधिकारियों की भी भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं। इस बारे में श्रम प्रवर्तन अधिकारी हिमांशु मिश्र कहते हैं कि इस तरह से कार्य कराना गैरकानूनी है। इसकी जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं इस ओवरब्रिज के निर्माण को देख रहे रेलवे के आईडब्लू अश्विनी कुमार श्रीवास्तव कहते हैं कि अगर बच्चों से काम नहीं कराना चाहिए। अगर ऐसा है तो बच्चों को वहां से हटवा दिया जाएगा।
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हनुमानगंज थाना क्षेत्र के पनियहवा-छितौनी रेल मार्ग के ऊपर से रेलवे की ओर से ओवरब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है। इस निर्माण की देखरेख रेलवे के अधिकारी कर रहे हैं। ओवरब्रिज के लिए बड़े-बड़े गड्ढे बनाकर उनमें पायों का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें कई फिट ऊंचे इस निर्माण स्थल पर बालश्रमिक अपने वजन के बराबर गिट्टी-सीमेंट का मसाला सिर पर लेकर ढोते दिख जाएंगे। यहां काम कर रहे बच्चों ने बताया कि उनमें से कुछ आसपास के हैं और कुछ पड़ोसी प्रांत बिहार के मदनपुर के रहने वाले हैं। बच्चों के मुताबिक घर की आर्थिक तंगी के कारण वे काम करने के लिए मजबूर हैं। बताया जाता है कि इस ठंड में अगर कांपते हुए बच्चे काम में जरा भी सुस्ती दिखाते हैं तो उन्हें डांट सुनने के साथ मजदूरी काटने की धमकियां मिलती हैं। जहां यह काम हो रहा है, उसी के ठीक सामने हनुमानगंज थाने की पुलिस पिकेट है।
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इन बाल मजदूरों को देखकर लोग श्रम विभाग की सक्रियता और इसे रोकने के लिए चलाए गए अभियान पर सवाल उठा रहे हैं। साथ ही अधिकारियों की भी भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं। इस बारे में श्रम प्रवर्तन अधिकारी हिमांशु मिश्र कहते हैं कि इस तरह से कार्य कराना गैरकानूनी है। इसकी जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं इस ओवरब्रिज के निर्माण को देख रहे रेलवे के आईडब्लू अश्विनी कुमार श्रीवास्तव कहते हैं कि अगर बच्चों से काम नहीं कराना चाहिए। अगर ऐसा है तो बच्चों को वहां से हटवा दिया जाएगा।
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