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हाईकोर्ट का आदेश निरस्त, डीएम ने लगाई रोक
Kushinagar
Updated Sun, 17 Nov 2013 05:40 AM IST
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पडरौना। हाईकोर्ट के जिस आदेश की आड़ में बिहार के बालू को उत्तर प्रदेश की सीमा में लाकर बेचा जाता था, उसे हाईकोर्ट ने रद कर दिया है। एक सपा नेता की शिकायत पर डीएम ने खनन अधिकारी समेत सभी क्षेत्राधिकारियों और एसडीएम को निर्देशित किया है कि अवैध बालू के परिवहन पर तत्काल रोक लगाई जाए।
जनपद की सीमा से सटे बिहार प्रांत में मधुबनी, ठोरी, श्रीपतनगर, परसौनी, बरवा पचरुखिया में बालू खनन होता है। इस बालू को उत्तर प्रदेश मेेें बेचा जाता है। रोजाना 400 से 500 ट्राली बालू को यूपी के विभिन्न जगहों पर बेचा जाता है। बिना रजिस्ट्रेशन के ट्रालियों से बालू ढोया जाता है। दो वर्ष पूर्व डीएम ने इन बालू लदी ट्रालियों को यूपी की सीमा में प्रवेश करने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद संबंधित ठेकेदार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। याचिका में बिहार के बालू को यूपी की सीमा यह कहकर लाने की प्रार्थना की गई थी कि इसकी सीमा को वे केवल रास्ते के लिए प्रयोग करेंगे और पुन: बिहार की सीमा में प्रवेश कर जाएंगे। याचिका में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं था कि उन्हें यूपी की सीमा में बालू बेचने का आदेश दिया जाए। इस याचिका में हाईकोर्ट ने 28 अगस्त 2012 को आदेश पारित किया था कि बिहार की बालू लदी ट्रालियों को यूपी की सीमा में प्रवेश करने से न रोका जाए। आदेश तो यूपी की सीमा में प्रवेश करने का था न कि बालू को यूपी में बेचने का। लेकिन इसी आदेश की आड़ में बिहार के बालू का गोरखधंधा चलता रहा। जिले के अलावा गोरखपुर, देवरिया और महराजगंज आदि जगहों पर बिहार के बालू की बिक्री धड़ल्ले से की जाने लगी। अब यह याचिका ही निरस्त हो गई है। डीएम को दिए अपने पत्र में सपा नेता लक्ष्मीनारायण उर्फ मिठाई यादव ने बताया है कि याचिका निरस्त होने के बाद भी बिहार के बालू को यूपी की सीमा केवल लाया ही नहीं जा रहा है बल्कि बेचा भी जा रहा है। मिठाई यादव की शिकायत पर डीएम रिग्जियान सैंफिल ने आदेश देकर बिहार की बालू लदी ट्रालियों को यूपी की सीमा में अवैध रूप से प्रवेश पर रोक लगा दी है।
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जनपद की सीमा से सटे बिहार प्रांत में मधुबनी, ठोरी, श्रीपतनगर, परसौनी, बरवा पचरुखिया में बालू खनन होता है। इस बालू को उत्तर प्रदेश मेेें बेचा जाता है। रोजाना 400 से 500 ट्राली बालू को यूपी के विभिन्न जगहों पर बेचा जाता है। बिना रजिस्ट्रेशन के ट्रालियों से बालू ढोया जाता है। दो वर्ष पूर्व डीएम ने इन बालू लदी ट्रालियों को यूपी की सीमा में प्रवेश करने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद संबंधित ठेकेदार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। याचिका में बिहार के बालू को यूपी की सीमा यह कहकर लाने की प्रार्थना की गई थी कि इसकी सीमा को वे केवल रास्ते के लिए प्रयोग करेंगे और पुन: बिहार की सीमा में प्रवेश कर जाएंगे। याचिका में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं था कि उन्हें यूपी की सीमा में बालू बेचने का आदेश दिया जाए। इस याचिका में हाईकोर्ट ने 28 अगस्त 2012 को आदेश पारित किया था कि बिहार की बालू लदी ट्रालियों को यूपी की सीमा में प्रवेश करने से न रोका जाए। आदेश तो यूपी की सीमा में प्रवेश करने का था न कि बालू को यूपी में बेचने का। लेकिन इसी आदेश की आड़ में बिहार के बालू का गोरखधंधा चलता रहा। जिले के अलावा गोरखपुर, देवरिया और महराजगंज आदि जगहों पर बिहार के बालू की बिक्री धड़ल्ले से की जाने लगी। अब यह याचिका ही निरस्त हो गई है। डीएम को दिए अपने पत्र में सपा नेता लक्ष्मीनारायण उर्फ मिठाई यादव ने बताया है कि याचिका निरस्त होने के बाद भी बिहार के बालू को यूपी की सीमा केवल लाया ही नहीं जा रहा है बल्कि बेचा भी जा रहा है। मिठाई यादव की शिकायत पर डीएम रिग्जियान सैंफिल ने आदेश देकर बिहार की बालू लदी ट्रालियों को यूपी की सीमा में अवैध रूप से प्रवेश पर रोक लगा दी है।
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