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तीसरे दिन भी रही राज्य कर्मचारियों की हड़ताल
Kushinagar
Updated Fri, 15 Nov 2013 05:40 AM IST
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पडरौना। प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर चल रही राज्य कर्मचारियों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही। इन कर्मचारियों ने काम-काज ठप करके विकास भवन परिसर में धरना दिया और सरकार को जमकर कोसा। इनके कार्य बहिष्कार से विभिन्न जरूरतों से जिला मुख्यालय पहुंचे लोगों को निराश लौटना पड़ा।
राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के बैनर तले विकास भवन में धरना दे रहे इन कर्मचारियों का कहना था कि मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन देकर उनकी आवाज दबा तो दी जाती है लेकिन उसे पूरा नहीं किया जाता। सरकार की हठधर्मिता के कारण प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों ने विवश होकर इस बार भी हड़ताल का निर्णय लिया है। नतीजतन प्रदेश भर के करीब 16 लाख राज्य कर्मचारी तीन दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
बृहस्पतिवार के धरना की अध्यक्षता परिषद के पूर्व अध्यक्ष बिस्मिल्लाह वारसी ने की। इस कार्य बहिष्कार और धरना में लोक निर्माण विभाग, विकास भवन, सिंचाई विभाग, खाद्य एवं रसद, स्वास्थ्य, श्रम, वन, उद्योग, कृषि, राजस्व, समाज कल्याण, पंचायतीराज, एआरटीओ विभाग के कर्मचारियों के साथ लैब टेक्निशियन भी शामिल हुए। परिषद के अध्यक्ष योगेंद्र द्विवेदी ने बताया कि बुधवार को प्रमुख सचिव कार्मिक और संगठन के पदाधिकारियों के बीच वार्ता हुई लेकिन सहमति न बन पाने के कारण हड़ताल जारी है। संचालन कर रहे कर्मचारी संगठन के मंत्री रवींद्र मिश्र एकता और धैर्य बनाए रखने की अपील की। इस दौरान अरविंद तिवारी, विजय प्रकाश पांडेय, भगवंत राजभर, दिनेश कुशवाहा, मारकंडेय मल्ल, मुहम्मद जाने आलम, निमेश कुमार मिश्र, प्रभुनंद उपाध्याय, वीपी राय, अमरनाथ सिंह, एएच अंसारी, उमेशचंद, अर्जुन प्रसाद, रामायण, उपेंद्र कुमार शुक्ल, ध्रुव प्रताप सिंह, अनुप प्रताप सिंह, राहुल कुमार पांडेय सहित कई कर्मचारी मौजूद थे।
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कैसे हो कार्रवाई, हाजिरी दुरुस्त
पडरौना। तीन दिनों से चल रही राज्य कर्मचारियों की हड़ताल और धरना-प्रदर्शन के कारण आम लोगों की सांसत बढ़ गई है। दूर-दराज से अपनी विभिन्न जरुरतों से इन दफ्तरों में आए लोगों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। हड़ताल में शामिल कुछ कर्मचारी कहते फिर रहे थे कि पहले उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर बनाते हैं और फिर हड़ताल या धरना में शामिल होते हैं। जब गैरहाजिर रहेंगे नहीं तो कोई कार्रवाई कैसे होगी?
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फोटो
अधिकारी भी रहे नदारद
पडरौना। राज्य कर्मचारियों क े हड़ताल में शामिल हो जाने से कुछ अधिकारी भी अपने कक्ष में नजर नहीं आए। सीएमओ कार्यालय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी हो या जिला कृषि अधिकारी का दफ्तर, ऐसे कई अधिकारी रहे जो अपने मातहताें के हड़ताल पर चले जाने के बाद खुद भी कार्यालय से चले गए। नतीजतन अपनी विभिन्न जरुरतों से आए लोगों को कार्यालय में कोई न मिलने की वजह से वापस लौट जाना पड़ा।
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हड़ताल से बढ़ी आम लोगों की सांसत
पडरौना। राज्य कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में हड़ताल और धरना भले कर रहे हैं लेकिन इसका नुकसान संबंधित विभाग के साथ-साथ आम आदमी का हो रहा है। दूरदराज से लोग बृहस्पतिवार को भी इस उम्मीद में किराया और समय खर्च करके आए कि शायद आज उनका काम हो जाय। लेकिन समस्या जस की तस रही।
मठिया के जयराम गुप्ता बृहस्पतिवार को विकास भवन में अपने परिवार के एक सदस्य का विकलांग पेंशन बनवाने आए थे। उन्होंने बताया कि दो दिन से रोज आ रहा हूं लेकिन हड़ताल की वजह से काम नहीं हो पा रहा है।
रामकोला क्षेत्र के कुसम्हा गांव से आए भीम कुशवाहा ने बताया कि शादी के अनुदान के लिए पिछड़ा वर्ग विभाग में कई हफ्ते से दौड़ रहा हूं। नवंबर महीने में बुलाया गया था। आज आया तो पता चला कि कोई काम नहीं हो रहा है।
रामपुर बांगर निवासी छात्रनेता शशिकांत मिश्र ने कहा कि एक व्यक्ति के विकलांग पेंशन की खातिर आया था। उसे पेंशन के साथ-साथ बैसाखी दिलानी है। दफ्तर में हड़ताल चल रही है, इसलिए आना बेकार हो गया।
बांगर सिधुआं गांव के रहने वाले बुजुर्ग डाढ़ू भी बृहस्पतिवार को विकास भवन पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वृद्धा पेंशन के लिए कई महीने से दौड़ रहा हूं। दफ्तर के बाबू कहते हैं कि रुपये खाते में भेज दिए गए हैं, जबकि बैंकवाले बताते हैं कि रुपये आए नहीं। इसी कार्य से आज भी आया था।
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तहसील और ब्लाक मुख्यालय से लौटे लोग
तमकुहीरोड। राज्य कर्मचारियों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही। इससे तमकुहीराज तहसील मुख्यालय और सेवरही ब्लाक मुख्यालय का काम-काज पूरी तरह ठप रहा। खेतों की पैमाइश, प्रमाण पत्र, खतौनी आदि लेने के लिए तहसील का चक्कर लगाने के लिए लोग बृहस्पतिवार को भी विवश रहे। रामप्रसाद जायसवाल ने बताया कि उन्हें इंतखाप की जरुरत थी लेकिन कार्यालय पर ताला बंद था। इसलिए उन्हें घर जाना पड़ा। दिनेश सोनी जन्म प्रमाण पत्र के लिए आए थे। काम न होने से निराश होना पड़ा। जवाहर प्रसाद जमीन की पैमाइश के लिए आए थे। तिथि भी मुकर्रर थी लेकिन हड़ताल की वजह से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। उधर उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के तहसील मंत्री जयंत कुमार गुप्ता का कहना था कि राज्य कर्मचारियों की मांग जायज है। जब तक इसे मान नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
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राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के बैनर तले विकास भवन में धरना दे रहे इन कर्मचारियों का कहना था कि मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन देकर उनकी आवाज दबा तो दी जाती है लेकिन उसे पूरा नहीं किया जाता। सरकार की हठधर्मिता के कारण प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों ने विवश होकर इस बार भी हड़ताल का निर्णय लिया है। नतीजतन प्रदेश भर के करीब 16 लाख राज्य कर्मचारी तीन दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
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बृहस्पतिवार के धरना की अध्यक्षता परिषद के पूर्व अध्यक्ष बिस्मिल्लाह वारसी ने की। इस कार्य बहिष्कार और धरना में लोक निर्माण विभाग, विकास भवन, सिंचाई विभाग, खाद्य एवं रसद, स्वास्थ्य, श्रम, वन, उद्योग, कृषि, राजस्व, समाज कल्याण, पंचायतीराज, एआरटीओ विभाग के कर्मचारियों के साथ लैब टेक्निशियन भी शामिल हुए। परिषद के अध्यक्ष योगेंद्र द्विवेदी ने बताया कि बुधवार को प्रमुख सचिव कार्मिक और संगठन के पदाधिकारियों के बीच वार्ता हुई लेकिन सहमति न बन पाने के कारण हड़ताल जारी है। संचालन कर रहे कर्मचारी संगठन के मंत्री रवींद्र मिश्र एकता और धैर्य बनाए रखने की अपील की। इस दौरान अरविंद तिवारी, विजय प्रकाश पांडेय, भगवंत राजभर, दिनेश कुशवाहा, मारकंडेय मल्ल, मुहम्मद जाने आलम, निमेश कुमार मिश्र, प्रभुनंद उपाध्याय, वीपी राय, अमरनाथ सिंह, एएच अंसारी, उमेशचंद, अर्जुन प्रसाद, रामायण, उपेंद्र कुमार शुक्ल, ध्रुव प्रताप सिंह, अनुप प्रताप सिंह, राहुल कुमार पांडेय सहित कई कर्मचारी मौजूद थे।
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कैसे हो कार्रवाई, हाजिरी दुरुस्त
पडरौना। तीन दिनों से चल रही राज्य कर्मचारियों की हड़ताल और धरना-प्रदर्शन के कारण आम लोगों की सांसत बढ़ गई है। दूर-दराज से अपनी विभिन्न जरुरतों से इन दफ्तरों में आए लोगों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। हड़ताल में शामिल कुछ कर्मचारी कहते फिर रहे थे कि पहले उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर बनाते हैं और फिर हड़ताल या धरना में शामिल होते हैं। जब गैरहाजिर रहेंगे नहीं तो कोई कार्रवाई कैसे होगी?
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अधिकारी भी रहे नदारद
पडरौना। राज्य कर्मचारियों क े हड़ताल में शामिल हो जाने से कुछ अधिकारी भी अपने कक्ष में नजर नहीं आए। सीएमओ कार्यालय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी हो या जिला कृषि अधिकारी का दफ्तर, ऐसे कई अधिकारी रहे जो अपने मातहताें के हड़ताल पर चले जाने के बाद खुद भी कार्यालय से चले गए। नतीजतन अपनी विभिन्न जरुरतों से आए लोगों को कार्यालय में कोई न मिलने की वजह से वापस लौट जाना पड़ा।
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हड़ताल से बढ़ी आम लोगों की सांसत
पडरौना। राज्य कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में हड़ताल और धरना भले कर रहे हैं लेकिन इसका नुकसान संबंधित विभाग के साथ-साथ आम आदमी का हो रहा है। दूरदराज से लोग बृहस्पतिवार को भी इस उम्मीद में किराया और समय खर्च करके आए कि शायद आज उनका काम हो जाय। लेकिन समस्या जस की तस रही।
मठिया के जयराम गुप्ता बृहस्पतिवार को विकास भवन में अपने परिवार के एक सदस्य का विकलांग पेंशन बनवाने आए थे। उन्होंने बताया कि दो दिन से रोज आ रहा हूं लेकिन हड़ताल की वजह से काम नहीं हो पा रहा है।
रामकोला क्षेत्र के कुसम्हा गांव से आए भीम कुशवाहा ने बताया कि शादी के अनुदान के लिए पिछड़ा वर्ग विभाग में कई हफ्ते से दौड़ रहा हूं। नवंबर महीने में बुलाया गया था। आज आया तो पता चला कि कोई काम नहीं हो रहा है।
रामपुर बांगर निवासी छात्रनेता शशिकांत मिश्र ने कहा कि एक व्यक्ति के विकलांग पेंशन की खातिर आया था। उसे पेंशन के साथ-साथ बैसाखी दिलानी है। दफ्तर में हड़ताल चल रही है, इसलिए आना बेकार हो गया।
बांगर सिधुआं गांव के रहने वाले बुजुर्ग डाढ़ू भी बृहस्पतिवार को विकास भवन पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वृद्धा पेंशन के लिए कई महीने से दौड़ रहा हूं। दफ्तर के बाबू कहते हैं कि रुपये खाते में भेज दिए गए हैं, जबकि बैंकवाले बताते हैं कि रुपये आए नहीं। इसी कार्य से आज भी आया था।
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तहसील और ब्लाक मुख्यालय से लौटे लोग
तमकुहीरोड। राज्य कर्मचारियों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही। इससे तमकुहीराज तहसील मुख्यालय और सेवरही ब्लाक मुख्यालय का काम-काज पूरी तरह ठप रहा। खेतों की पैमाइश, प्रमाण पत्र, खतौनी आदि लेने के लिए तहसील का चक्कर लगाने के लिए लोग बृहस्पतिवार को भी विवश रहे। रामप्रसाद जायसवाल ने बताया कि उन्हें इंतखाप की जरुरत थी लेकिन कार्यालय पर ताला बंद था। इसलिए उन्हें घर जाना पड़ा। दिनेश सोनी जन्म प्रमाण पत्र के लिए आए थे। काम न होने से निराश होना पड़ा। जवाहर प्रसाद जमीन की पैमाइश के लिए आए थे। तिथि भी मुकर्रर थी लेकिन हड़ताल की वजह से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। उधर उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के तहसील मंत्री जयंत कुमार गुप्ता का कहना था कि राज्य कर्मचारियों की मांग जायज है। जब तक इसे मान नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।