Kushinagar News: पर्यटन स्थली पर पर्यटकों को लुभाने के लिए खर्च किए 93 लाख, फिर भी अव्यवस्था
कुशीनगर नगरपालिका परिषद ईओ संतोष कुमार ने कहा कि उच्च स्तरीय सार्वजनिक शौचालय की निगरानी की जाती है। साफ-सफाई से लेकर हर तरह की व्यवस्था मुक्कमल की गई है। कमी की जानकारी होने पर बेहतर कराने का काम किया जाता है।
विस्तार
कुशीनगर में बौद्धकालीन हिरण्यवती नदी के करुणा सागर स्थल पर साल 2020 में कसाडा ने 93 लाख रुपये से पार्क का निर्माण कार्य किया था, लेकिन अब पार्क में अव्यवस्था कायम है। वह पार्क का स्वरूप नहीं ले पाई।
इस बजट से एनएच-28 व 28बी के बीच हिरण्यवती नदी के तट पर पार्क, घाट, सीढ़ी निर्माण, चहारदीवारी, मिट्टी भरने व विक्टोरियन लैंप का काम किया गया है, उसकी वर्तमान स्थिति ठीक नहीं है। यहां तक कि एक तरफ बड़ी-बड़ी घासें उग आई हैं। वहीं नदी के घाट पर मछली पकड़ने के लिए स्थानीय लोग बंसी लेकर बैठे नजर आ रहे हैं।
दीवारों के प्लास्टर गिरने से महात्मा बुद्ध से जुड़ी वालपेंटिंग मिट रही है। हरियाली के लिए लगाए गए ज्यादातर पौधे सूख गए हैं। तीनों उच्चस्तरीय शौचालयों पर ताला बंद रहता है। एक राही कुटीर पर्यटक आवास गृह के अंदर बनाया गया है, जहां लोग जा नहीं पाते हैं। हालांकि, इस पार्क को आकर्षक व सुसज्जित सुविधाओं से लैस करने के लिए मौजूदा अधिकारियों ने रुचि दिखाई दी थी, लेकिन अभी इस पार्क में कोई सुधार व सुसज्जित करने के लिए कुछ होता नहीं दिखाई दे रहा है।
धुंधली व उखड़ रही दीवारों पर हुई पेंटिंग
साल 2019-20 में तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अभिषेक पांडेय व पूर्ण बोरा ने महात्मा बुद्ध के जीवन संबंधी घटनाओं, प्राकृतिक दृश्य व सामाजिक जागरूकता से जुड़े चित्रों को बुद्ध पीजी कॉलेज, बुद्ध इंटर कॉलेज व राजकीय बौद्ध संग्रहालय कुशीनगर के दीवारों पर पेंटिंग कराई थी। जिसमें टेंपल एरिया मैनेजमेंट कमेटी व जन सहयोग से आकर्षक बनाया था। उनके बाद इसकी जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों ने ख्याल नहीं रखा है। इसका नतीजा है कि जगह-जगह चित्रकारी की तस्वीरें या तो धुंधली पड़ गई हैं या दीवार के प्लास्टर के क्षतिग्रस्त होने से स्वरूप बिगड़ रहा है। जिससे आकर्षण कम हो रहा है, लेकिन कोई इसका ध्यान नहीं दे रहा है।
सूख रहे राष्ट्रीय राजमार्ग के रोपित पेड़
तहसील प्रशासन ने कुशीनगर को ग्रीन व क्लीन वातावरण देने के लिए विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण कार्य किया था। उचित देखभाल के अभाव में कुछ सूख रहे हैं। कुछ पूरी तरह सूख चुके हैं। इसे फिर से नए पौधे रोपित करने उन्हें संरक्षित कर बचाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। हालांकि, प्रशासन ने इन पौधों का रोपण कुशीनगर में ग्रीन जोन तैयार करने के मकसद से आरंभ किया था। जिसे आगे नहीं बढ़ाया गया। इसका परिणाम है कि अब लगे पौध स्थल कुछ समय में खाली दिखेंगे। हरियाली से सुंदरीकरण का सपना धरातल पर नहीं उतर पाएगा।
उच्च स्तरीय सार्वजनिक शौचालय में अव्यवस्था
दूसरा उच्च स्तरीय सार्वजनिक शौचालय बुद्धा पार्किंग में बना है। इसका भी हालात ठीक नहीं है। पुरुष शौचालय बंद रहता है। महिला शौचालय खुला रहता है। इसके अलावा तीसरा उच्च स्तरीय सार्वजनिक शौचालय इंपीरियल होटल के सामने बना है, पानी आपूर्ति, दरवाजा टूटा, उगी झाड़ झंखाड़ है। जबकि पर्यटन विभाग उच्च स्तरीय सार्वजनिक शौचालयों को नगरपालिका परिषद कुशीनगर को हैंडओवर कर चुका है। इसके बावजूद शौचालयों की स्थिति बदहाल है।
कुशीनगर नगरपालिका परिषद ईओ संतोष कुमार ने कहा कि उच्च स्तरीय सार्वजनिक शौचालय की निगरानी की जाती है। साफ-सफाई से लेकर हर तरह की व्यवस्था मुक्कमल की गई है। कमी की जानकारी होने पर बेहतर कराने का काम किया जाता है।