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बरसात नजदीक देख तेजी से होने लगा कार्य
Updated Sun, 18 Jun 2017 04:51 PM IST
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कुशीनगर। गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए बाढ़ खंड डिवीजन ने एपी तटबंध के जर्जर हिस्सों की मरम्मत तेज कर दी है। सभी संवेदनशील स्थलों पर बोल्डर व मिट्टी भरी बोरियों से बचाव कार्य किया जा रहा है। इससे बाढ़ की आशंका से भयभीत लोगों ने थोड़ी राहत तो महसूस की है, लेकिन अंतिम वक्त पर कार्य में आई इस तेजी से लोग नाखुश हैं।
हर साल जून के तीसरे सप्ताह में नेपाल की पहाड़ियों पर पहली बरसात होते ही गंडक का जलस्तर बढ़ने लगता है। पहली बार जलस्तर बढ़ते ही नदी का पानी बंधों तक टकराता है और संवेदनशील स्थानों को प्रभावित करता है। अबसे पहले बाढ़ खंड डिवीजन पहले से तय संवेदनशील स्थलों पर अप्रैल-मई में ही मरम्मत व बचाव कार्य करा लेता था। परंतु इस बार यह काम अब जाकर शुरू हुआ है। लगभग 17 किमी लंबा पिपराघाट-अहिरौलीदान बांध पिछले कुछ वर्षों से नदी के निशाने पर है। पिपराघाट, जंगलीपटटी, बिनटोली, विरवट कोन्हवलिया, बाकखास, बाघाचौर और कचहरी टोला समेत कई स्थानों पर नदी ने पिछले साल भी कटान किया था। इस बार भी लोगों ने कई बार यहां बचाव कार्य की मांग की थी। यहां तक कि विधायक अजय कुमार लल्लू ने धरना भी दिया था। परंतु अब तक सुस्ती बरत रहे विभाग ने दो-तीन दिन पहले ही कार्य में तेजी ला दी है। कहीं लोहे की बनी जाली में बोल्डर भरकर तो कही बोरों में मिट्टी भरकर कटान रोकने का कार्य हो रहा है। परंतु ये लोग बाढ़ आने से चंद दिनों पहले हो रही तैयारियों से नाराज हैं। इन लोगों का कहना है कि जो कार्य दो महीना पहले होना चाहिए था वह अब जाकर हो रहा है।
इस संबंध में एपी तटबंध पर हो बचाव कार्य की निगरानी कर रहे सहायक अभियंता रमेश यादव का कहना है कि सभी संवेदनशील स्थानों पर बचाव कार्य चल रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने से पहले बंधों की सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम कर लिया जाएगा।
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हर साल जून के तीसरे सप्ताह में नेपाल की पहाड़ियों पर पहली बरसात होते ही गंडक का जलस्तर बढ़ने लगता है। पहली बार जलस्तर बढ़ते ही नदी का पानी बंधों तक टकराता है और संवेदनशील स्थानों को प्रभावित करता है। अबसे पहले बाढ़ खंड डिवीजन पहले से तय संवेदनशील स्थलों पर अप्रैल-मई में ही मरम्मत व बचाव कार्य करा लेता था। परंतु इस बार यह काम अब जाकर शुरू हुआ है। लगभग 17 किमी लंबा पिपराघाट-अहिरौलीदान बांध पिछले कुछ वर्षों से नदी के निशाने पर है। पिपराघाट, जंगलीपटटी, बिनटोली, विरवट कोन्हवलिया, बाकखास, बाघाचौर और कचहरी टोला समेत कई स्थानों पर नदी ने पिछले साल भी कटान किया था। इस बार भी लोगों ने कई बार यहां बचाव कार्य की मांग की थी। यहां तक कि विधायक अजय कुमार लल्लू ने धरना भी दिया था। परंतु अब तक सुस्ती बरत रहे विभाग ने दो-तीन दिन पहले ही कार्य में तेजी ला दी है। कहीं लोहे की बनी जाली में बोल्डर भरकर तो कही बोरों में मिट्टी भरकर कटान रोकने का कार्य हो रहा है। परंतु ये लोग बाढ़ आने से चंद दिनों पहले हो रही तैयारियों से नाराज हैं। इन लोगों का कहना है कि जो कार्य दो महीना पहले होना चाहिए था वह अब जाकर हो रहा है।
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इस संबंध में एपी तटबंध पर हो बचाव कार्य की निगरानी कर रहे सहायक अभियंता रमेश यादव का कहना है कि सभी संवेदनशील स्थानों पर बचाव कार्य चल रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने से पहले बंधों की सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम कर लिया जाएगा।
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