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दो बच्चियों की मौत से सहमे लोग
ब्यूरो/अमर उजाला कुश्ाीनगर
Updated Mon, 15 Oct 2018 11:39 PM IST
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नेबुआ रायगंज। विकास खंड विशुनपुरा के ग्राम नरचोचवा के गुलहरिया बाबा टोला में उल्टी-दस्त व बुखार की चपेट में आने से पांच दिनों के अंतराल में दो मासूमों की मौत हो गई। जबकि 10-12 बच्चे पीड़ित हैं। जिसकी वजह से गांव के लोग सहम गए हैं। इधर, रविवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और पीड़ितों की जांच कर दवाएं वितरित कीं।
गांव निवासी जगदीश की छह वर्षीय पुत्री नंदनी को दो दिन पूर्व अचनाक उल्टी-दस्त के साथ तेज बुखार हुआ। जिसे उपचार के लिए परिजन समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मंसाछपरा ले गए, जहां बच्ची की हालत गंभीर देखते हुए चिकित्सकों ने जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जहां कुछ समय उपचार होने के बाद हालत में सुधार न होते देख मेडिकल कॉलेज भेजा गया। जहां उपचार के दौरान शनिवार को बच्ची की मौत हो गई। रविवार को बच्ची का शव गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। नंदनी की छोटी बहन प्रीती तीन वर्ष के साथ गांव के निक्की 10 वर्ष, पूजा 5 वर्ष, सरोज यादव 14 वर्ष, शाहिल 4 वर्ष, सूरज 6 वर्ष, आर्यन अंसारी एक वर्ष समेत दस बच्चे उल्टी-दस्त व बुखार से पीड़ित हैं। जबकि उसी टोले की नंदलाल की 5 वर्षीय बेटी आंचल की भी पांच दिन पूर्व मौत हो गई थी। दो बच्चियों की ताबड़तोड़ हुई मौत की सूचना पर विशुनपुरा अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी उमेश चंद ने रविवार को अपनी टीम के साथ गांव में पहुंचकर पीड़ितों की जांच व उपचार किया। साथ ही पीड़ितों में दवा भी बांटे। ग्रामीण राजेंद्र कुशवाहा, बल्ली प्रजापति, प्रहलाद कुशवाहा व अयोध्या का आरोप है कि इस गांव में कभी भी फॉगिंग नहीं होती है और न ही कभी स्वास्थ्य टीम जांच के लिए पहुंचती है। टोले में सफाई कर्मी भी कभी नहीं आते हैं।
लोगों ने बताया कि इस टोले के परिवार देसी हैंडपंप का दूषित पानी पीते हैं। यहां एक भी इंडिया मार्क टू हैंडपंप नहीं लगा है। जल निकासी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। शौचालय भी यहां नहीं बनाए गए हैं। गंदगी का अंबार लगा है। दो साल पूर्व उल्टी-दस्त की वजह से चार-पांच बच्चों की मौत हो गई थी। ग्राम प्रधान राम अवध यादव ने बताया कि पीड़ित परिवार के घर के अंदर व बाहर गड्ढे खोदकर छोड दिया गया है। गदंगी की वजह से बीमारी फैली है। सीएमओ हरिचरण सिंह ने बताया की गांव में टीम भेजी गई है। एएनएम के नदारद रहने की सूचना मिली है। शिकायत की जांच कराने के बाद कार्रवाई की जाएगी। जबकि डीपीआरओ राघवेंद्र द्विवेदी ने बताया कि लापरवाही बरतने वाले सफाई कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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गांव निवासी जगदीश की छह वर्षीय पुत्री नंदनी को दो दिन पूर्व अचनाक उल्टी-दस्त के साथ तेज बुखार हुआ। जिसे उपचार के लिए परिजन समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मंसाछपरा ले गए, जहां बच्ची की हालत गंभीर देखते हुए चिकित्सकों ने जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जहां कुछ समय उपचार होने के बाद हालत में सुधार न होते देख मेडिकल कॉलेज भेजा गया। जहां उपचार के दौरान शनिवार को बच्ची की मौत हो गई। रविवार को बच्ची का शव गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। नंदनी की छोटी बहन प्रीती तीन वर्ष के साथ गांव के निक्की 10 वर्ष, पूजा 5 वर्ष, सरोज यादव 14 वर्ष, शाहिल 4 वर्ष, सूरज 6 वर्ष, आर्यन अंसारी एक वर्ष समेत दस बच्चे उल्टी-दस्त व बुखार से पीड़ित हैं। जबकि उसी टोले की नंदलाल की 5 वर्षीय बेटी आंचल की भी पांच दिन पूर्व मौत हो गई थी। दो बच्चियों की ताबड़तोड़ हुई मौत की सूचना पर विशुनपुरा अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी उमेश चंद ने रविवार को अपनी टीम के साथ गांव में पहुंचकर पीड़ितों की जांच व उपचार किया। साथ ही पीड़ितों में दवा भी बांटे। ग्रामीण राजेंद्र कुशवाहा, बल्ली प्रजापति, प्रहलाद कुशवाहा व अयोध्या का आरोप है कि इस गांव में कभी भी फॉगिंग नहीं होती है और न ही कभी स्वास्थ्य टीम जांच के लिए पहुंचती है। टोले में सफाई कर्मी भी कभी नहीं आते हैं।
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लोगों ने बताया कि इस टोले के परिवार देसी हैंडपंप का दूषित पानी पीते हैं। यहां एक भी इंडिया मार्क टू हैंडपंप नहीं लगा है। जल निकासी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। शौचालय भी यहां नहीं बनाए गए हैं। गंदगी का अंबार लगा है। दो साल पूर्व उल्टी-दस्त की वजह से चार-पांच बच्चों की मौत हो गई थी। ग्राम प्रधान राम अवध यादव ने बताया कि पीड़ित परिवार के घर के अंदर व बाहर गड्ढे खोदकर छोड दिया गया है। गदंगी की वजह से बीमारी फैली है। सीएमओ हरिचरण सिंह ने बताया की गांव में टीम भेजी गई है। एएनएम के नदारद रहने की सूचना मिली है। शिकायत की जांच कराने के बाद कार्रवाई की जाएगी। जबकि डीपीआरओ राघवेंद्र द्विवेदी ने बताया कि लापरवाही बरतने वाले सफाई कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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