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गंडक नदी के नरवाजोत बांध पर बचाव कार्य का 80 मीटर हिस्सा धंसा, बढ़ीं मुश्किलें

Thu, 13 Aug 2020 06:06 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2020 06:06 PM IST
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80 meter parts of safety work desolved in gandak river
नरवाजोत बांध पर जारी बचाव कार्य। - फोटो : KUSHINAGAR
गंडक नदी के नरवाजोत बांध पर बचाव कार्य का 80 मीटर हिस्सा धंसा, बढ़ीं मुश्किलें
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तमकुहीरोड। नरवाजोत बांध पर दहारी टोला से भंगी टोला के बीच चल रहे बचाव कार्य का करीब 80 मीटर हिस्सा बृहस्पतिवार की सुबह अचानक धंस गया। इसके चलते नदी फिर से बांध से टकराने लगी है। जानकारी होने पर बाढ़ खंड के अफसर मौके पर पहुंचे। एक पखवारे से यहां बचाव कार्य चल रहा है लेकिन कटान अब तक नहीं रुका है।
पिपराघाट गांव को गंडक नदी से बचाने के लिए 42 करोड़ की लागत से 3.200 किमी लंबा नरवाजोत-पिपराघाट बांध का निर्माण कराया गया था। परंतु गंडक नदी के दबाव व कटान के चलते यहां हालात खतरनाक हैं। बांध पर लगभग 500 मीटर लंबाई में कटान हो रहा है। नदी का तेज दबाव इस बांध पर बना हुआ है। बृहस्पतिवार की सुबह अचानक नदी में बैकरोलिंग तेज हो जाने से एक जगह लगभग 30 मीटर तो दूसरी जगह लगभग 50 मीटर हिस्सा (कुल 80 मीटर) नदी में धंस गया। इसके चलते बांध पर घंटों अफरातफरी का माहौल बना रहा। जानकारी होने पर बाढ़ खंड के जेई श्रीराम यादव मौके पर पहुंचे और बांध की सुरक्षा के लिए मजदूरों को लगाकर बचाव कार्य शुरू कराया गया। कटान को देखते हुए दहारी टोला, तवकल टोला, तेजू टोला, भंगी टोला, नरवाजोत, शिव टोला, चौकी टोला, हनुमान टोला, मुसहरी टोला, उपाध्याय टोला और देवनारायन टोला के लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीण प्रभुनाथ यादव, संजय सिंह, महादेव चौहान, सुदामा यादव, सुरेन्द्र सिंह, राकेश तिवारी, सुधीर यादव, महादेव चौहान आदि का कहना है कि यहां एक पखवारे से बचाव कार्य हो रहा है। परंतु दिन भर में जितना काम होता है, उसका अधिकांश हिस्सा रात से लेकर अगली सुबह तक नदी में विलीन हो जाता है। अगले दिन फिर वहीं बचाव कार्य कराए जाते हैं। इससे पहले वर्ष 2015 में भी ऐसी ही स्थिति होने पर बांध कट गया था जिसका खामियाजा वे लोग भुगत चुके हैं।
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इस संबंध में बाढ़ खंड के एसडीओ आमोद कुमार सिंह का कहना है कि बचाव कार्य जारी है और पूरे बांध की निगरानी कराई जा रही है। गंडक के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के चलते कटान तेजी से होता है। पूरा प्रयास है कि कटान को रोक लिया जाए।
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