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जिले में धान खरीद लड़खड़ाई
Updated Wed, 28 Nov 2018 10:23 PM IST
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dhan
- फोटो : amar ujala
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पडरौना (कुशीनगर)। 28 दिन गुजर गए और अभी तक सरकारी धान की खरीद व्यवस्था सुधर नहीं पाई। सिर्फ 420 किसानों से अब तक 3.42 फीसदी ही धान की खरीद हुई है। लचर व्यवस्था का आलम यह है कि अभी तक 19 क्रय केंद्र भी क्रियाशील नहीं हो पाए। धान खरीद की गति नहीं पकड़ पाने के पीछे प्रशासन समितियों के सचिवों और मार्केटिंग इंस्पेक्टरों के साथ मीलरों की हड़ताल की वजह बता रहा है। ऐसे में सरकारी व्यवस्था के तहत धान नहीं बिक पाने की वजह से किसान बिचौलियों के हाथों औने-पौने दामों पर धान बेचने को विवश है। पहली नवंबर से 28 फरवरी तक धान खरीदने का सरकारी फरमान है। जिले में 76 क्रय केंद्र खोले गए है। जिसमें खाद्य विभाग के 14, पीसीएफ के 35, यूपी एग्रो के दो, पीसीयू के 15,कर्मचारी कल्याण निगम के तीन,एनसीसीएफ के चार,नेफेड के दो और भारतीय खाद्य निगम का एक केंद्र शामिल है। व्यवस्था का आलम यह है कि अभी तक19 क्रय केंद्र क्रियाशील ही नहीं हो पाए है। अभी तक 55 केंद्रों पर 1672.22 मीट्रिक टन धान की खरीद हो पाई है। जबकि लक्ष्य 47300 मीट्रिक टन धान खरीदने का निर्धारित है। ऐसे में देखा जाए तो 28 दिनों में प्रशासन ने सिर्फ 420 किसानों से महज 3. 42 फीसदी ही धान की खरीद कर पाया है। जबकि पिछले वर्ष अब तक 2882 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी। यहां तक जिले में 25 मीलर है और अभी तक प्रशासन ने मीलरों से अनुबंध नहीं कर पाया है। ऐसे में मीलरों के जरिए अब तक की गई धान की खरीद का धान नहीं लेने से सब खुले में रखा गया है, जो ठंड और कोहरों के मौसम की वजह से नमी आने की आशंका भी बनी हुई है। किसान सुदामा पांडेय, राधेश्याम, मगन, जोखन, फेकू, रघुवीर,श्याम मोहन, घनश्याम , हरिश्चंद्र और जुगुल किशोर बताते है कि सरकारी धान खरीद की व्यवस्था काफी लचर है। धान बेचने के लिए किसान केंद्रों पर पहुंचते है तो खरीद करने की तमाम बहानेबाजी बनाई जाती है। धान समय से नहीं बिकने की वजह से गेहूं की बुवाई भी प्रभावित हो रही है। प्रशासन को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। डिप्टी आरएमओ निश्चल आनंद बताते है कि यह सच है कि अभी तक सिर्फ 3. 42 फीसदी की धान खरीद हुई है। पीसीएफ के 11, कर्मचारी कल्याण निगम के दो, एनसीसीएफ के एक और पीसीयू के पांच केंद्रों पर धान की खरीद शुरु नहीं हो पाई है। संबंधित क्रय एजेंसियों को नोटिस भेजा गया है और धान खरीद शुरू कराए जाने का निर्देश दिया गया है। डीएम की ओर से 14 मीलरों को अनुबंधित किए जाने का निर्देश दिया गया है। वैसे गोरखपुर मंडल के जनपदों में कुशीनगर में धान की खरीद बेहतर हुई है। धान की खरीद की रफ्तार नहीं बढ़ने के पीछे वजह रही है कि समितियों के सचिव और मार्केटिंग इंस्पेक्टर हड़ताल पर रहे है। जबकि मीलरों की हड़ताल भी जल्द खत्म कराए जाने की कोशिश हो रही है। इसके अलावा नवंबर में छुट्टिया भी अधिक रही है। पूर्वांचल के जिलों में दिसंबर और जनवरी में धान की खरीद अधिक तेजी के साथ होती है। दो फरवरी तक धान खरीद होनी है। किसानों को धान बेचने में कोई दिक्कत न हो,इसके लिए केंद्र प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए गए है।
मिलरों को सख्त हिदायत दी गई है कि यदि दो दिनों के भीतर अनुबंध नहीं कराते है तो उनके मंडी और जीएसटी का लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। इसके साथ ही सभी क्रय केंद्र क्रियाशील करके धान की खरीद तेजी से किए जाने का निर्देश केंद्र प्रभारियों को दिया गया है। एसडीएम और डिप्टी आरएमओ को भी निर्देश दिए गए है कि वह नियमित केंद्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रेषित करें।
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डॉक्टर अनिल कुमार सिंह, डीएम कुशीनगर