{"_id":"5bce120ebdec2269bc7fe398","slug":"71540231694-kushinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"करते रहे इंतजार, नहीं आया कोई खरीदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
करते रहे इंतजार, नहीं आया कोई खरीदार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Oct 2018 11:38 PM IST
विज्ञापन
auction
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पडरौना। बंद पड़ी पडरौना चीनी मिल की नौ माह बाद नीलामी की डेट पड़ी भी तो कोई खरीदार ही नहीं आया। एसडीएम और तहसीलदार सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी तय समय तक क्रेता का इंतजार करते रहे। उसके बाद तहसील सभागार से उठकर चले गए।
करीब साढ़े छह वर्षों से बंद पड़ी पडरौना चीनी मिल पर बकाया गन्ना मूल्य और मिल मजदूरों के बकाया देयों के भुगतान के लिए 22 अक्तूूबर को नीलामी की तिथि मुकर्रर की गई थी। इस मिल पर 476983203 रुपये की देनदारी है। इसके भुगतान के लिए चीनी मिल के नौ गाटों की 4.419 हेक्टेयर जमीन की नीलामी की जानी है।
तयशुदा कार्यक्रम के तहत सोमवार को पडरौना तहसील के सभागार में सुबह दस बजे नीलामी के लिए एसडीएम सदर गुलाबचंद्र राम, तहसीलदार संजय कुमार राय और श्रम प्रवर्तन अधिकारी अनुनय कुमार श्रीवास्तव सहित कई कानूनगो, लेखपाल और अमीन पहुंचे थे। नीलामी की समय सीमा दोपहर दो बजे तक निर्धारित की गई थी, लेकिन यह समयावधि बीत जाने के बाद भी कोई खरीदार नहीं पहुंचा।
विज्ञापन
एसडीएम सदर गुलाबचंद्र राम ने बताया कि इस बार कोई भी खरीदार मिल की नीलामी के लिए नहीं आया। लिहाज नीलामी की अगली तिथि जल्द ही तय की जाएगी।
इस दौरान पडरौना तहसील के वरिष्ठ लिपिक अमानत हुसैन, शहर के लेखपाल योगेंद्र गुप्ता, अमीन संतोष कुमार यादव सहित संबंधित कानूनगो, लेखपाल और अमीन मौजूद थे।
चुनाव करीब आया तो हुई चीनी मिल की चिंता
पडरौना। जिला कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी समशेर मल्ल का कहना है कि पडरौना चीनी मिल करीब साढ़े छह वर्षों से बंद है, जिसे चलवाने के लिए लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी की ओर से वादा किया गया था। उनका वादा अब तक पूरा नहीं हुआ। जबकि केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। लोकसभा चुनाव करीब आते देख ही सत्ताधारी दल को इसकी चिंता होने लगी है।
पडरौना चीनी मिल को खुद चलवाए सरकार
पडरौना। कुशीनगर सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष गिरीशचंद्र चतुर्वेदी ने कहा कि पडरौना चीनी मिल को चलवाने में तो जिला प्रशासन नाकाम रहा, पिछले चार वर्षों में नीलामी की केवल तारीख पड़ी है, नीलामी की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों और मजदूरों का बकाया भुगतान करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मिल का अधिग्रहण कर अपने स्तर से चलाया जाना चाहिए।
विज्ञापन
करीब साढ़े छह वर्षों से बंद पड़ी पडरौना चीनी मिल पर बकाया गन्ना मूल्य और मिल मजदूरों के बकाया देयों के भुगतान के लिए 22 अक्तूूबर को नीलामी की तिथि मुकर्रर की गई थी। इस मिल पर 476983203 रुपये की देनदारी है। इसके भुगतान के लिए चीनी मिल के नौ गाटों की 4.419 हेक्टेयर जमीन की नीलामी की जानी है।
विज्ञापन
तयशुदा कार्यक्रम के तहत सोमवार को पडरौना तहसील के सभागार में सुबह दस बजे नीलामी के लिए एसडीएम सदर गुलाबचंद्र राम, तहसीलदार संजय कुमार राय और श्रम प्रवर्तन अधिकारी अनुनय कुमार श्रीवास्तव सहित कई कानूनगो, लेखपाल और अमीन पहुंचे थे। नीलामी की समय सीमा दोपहर दो बजे तक निर्धारित की गई थी, लेकिन यह समयावधि बीत जाने के बाद भी कोई खरीदार नहीं पहुंचा।
विज्ञापन
एसडीएम सदर गुलाबचंद्र राम ने बताया कि इस बार कोई भी खरीदार मिल की नीलामी के लिए नहीं आया। लिहाज नीलामी की अगली तिथि जल्द ही तय की जाएगी।
इस दौरान पडरौना तहसील के वरिष्ठ लिपिक अमानत हुसैन, शहर के लेखपाल योगेंद्र गुप्ता, अमीन संतोष कुमार यादव सहित संबंधित कानूनगो, लेखपाल और अमीन मौजूद थे।
चुनाव करीब आया तो हुई चीनी मिल की चिंता
पडरौना। जिला कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी समशेर मल्ल का कहना है कि पडरौना चीनी मिल करीब साढ़े छह वर्षों से बंद है, जिसे चलवाने के लिए लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी की ओर से वादा किया गया था। उनका वादा अब तक पूरा नहीं हुआ। जबकि केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। लोकसभा चुनाव करीब आते देख ही सत्ताधारी दल को इसकी चिंता होने लगी है।
पडरौना चीनी मिल को खुद चलवाए सरकार
पडरौना। कुशीनगर सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष गिरीशचंद्र चतुर्वेदी ने कहा कि पडरौना चीनी मिल को चलवाने में तो जिला प्रशासन नाकाम रहा, पिछले चार वर्षों में नीलामी की केवल तारीख पड़ी है, नीलामी की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों और मजदूरों का बकाया भुगतान करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मिल का अधिग्रहण कर अपने स्तर से चलाया जाना चाहिए।