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पक्के मकान वाले को दे दिया आवास
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 25 Sep 2018 11:14 PM IST
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झोपड़ी के बाहर बैठा महेश।
- फोटो : अमर उजाला
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हाटा। गरीबों को आवास देने की योजना में पात्रता को दरकिनार और अपात्रों को आवास दिया जा रहा है। ऐसा ही मामला विकास खंड मोतीचक के झांगा गांव में पकड़ में आया है।
मोतीचक विकास खंड के गांव झांगा बाजार में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लोगों को आवास स्वीकृत हुआ है।
आरोप है कि इसमें कई अपात्र लोगों को प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कर बनवा दिया गया है। जबकि इसी गांव के कई गरीब लोगों को आवास से वंचित कर दिया गया। गांव के एक व्यक्ति ने शिकायत कर जांच की मांग उठाई। जिसके बाद बीडीओ ने एडीओ से जांच कराई। जांच रिपोर्ट के आधार पर झांगा बाजार की तजीबुन, मीना, और पिंकी को आवास स्वीकृत किया गया है, लेकिन इन लोगों के पास पहले से पक्का मकान है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इन लोगों ने दूसरी मंजिल पर आवास बनवाया है। जबकि नियम है कि जिसके पास पक्का मकान हो उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र नहीं माना जा सकता है। अगर मकान जर्जर है तो उसकी मरम्मत के लिए कुछ धनराशि देने का प्रावधान है। लिखित शिकायत पर इस गांव के कुल 22 प्रधानमंत्री आवासों की जांच की गई।
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जांच में सामने आए अनियमितता के अलावा शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई नाबालिगों और पेंशनरों के भी आवास बनवाए गए हैं। डीडीओ ने बताया कि दूसरी मंजिल पर प्रधानमंत्री आवास बनाना गलत है। जबकि बीडीओ चंद्रशेखर ने बताया कि मामला संज्ञान में है। जांच में गड़बड़ी पकड़ी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
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मोतीचक विकास खंड के गांव झांगा बाजार में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लोगों को आवास स्वीकृत हुआ है।
आरोप है कि इसमें कई अपात्र लोगों को प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कर बनवा दिया गया है। जबकि इसी गांव के कई गरीब लोगों को आवास से वंचित कर दिया गया। गांव के एक व्यक्ति ने शिकायत कर जांच की मांग उठाई। जिसके बाद बीडीओ ने एडीओ से जांच कराई। जांच रिपोर्ट के आधार पर झांगा बाजार की तजीबुन, मीना, और पिंकी को आवास स्वीकृत किया गया है, लेकिन इन लोगों के पास पहले से पक्का मकान है।
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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इन लोगों ने दूसरी मंजिल पर आवास बनवाया है। जबकि नियम है कि जिसके पास पक्का मकान हो उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र नहीं माना जा सकता है। अगर मकान जर्जर है तो उसकी मरम्मत के लिए कुछ धनराशि देने का प्रावधान है। लिखित शिकायत पर इस गांव के कुल 22 प्रधानमंत्री आवासों की जांच की गई।
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जांच में सामने आए अनियमितता के अलावा शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई नाबालिगों और पेंशनरों के भी आवास बनवाए गए हैं। डीडीओ ने बताया कि दूसरी मंजिल पर प्रधानमंत्री आवास बनाना गलत है। जबकि बीडीओ चंद्रशेखर ने बताया कि मामला संज्ञान में है। जांच में गड़बड़ी पकड़ी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।