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अब कच्ची शराब से नहीं, रोजगार से चलाएंगे परिवार
Updated Thu, 03 Aug 2017 05:38 PM IST
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कुशीनगर। कच्ची शराब के धंधे से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार देने और इसके लिए ऋण तक उपलब्ध कराने की खातिर पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त रूप से एक नायाब तरीका शुरू किया है। ऐसे लोगों को न केवल रोजगार और इसके संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, बल्कि उनके उत्पादों का अन्य प्रदेशों में निर्यात करने के लिए मंडी भी मुहैया कराई जाएगी। इस योजना की शुरुआत कच्ची शराब बनाने और बेचे जाने के नाम से कुख्यात जनपद के सुबोधिया गांव से की गई।
सुबोधिया ऐसा गांव है, जहां करीब 1500 की आबादी में से 1200 लोग कच्ची शराब के धंधे से जुड़े हैं। इस गांव में कच्ची शराब पीने से अब तक करीब 250 लोगों की जान जा चुकी है। आलम यह है कि इस गांव में जल्दी कोई अपने बेटे-बेटियों की शादी नहीं करना चाहता है। गांव में कच्ची शराब पर अंकुश लगाना पुलिस और प्रशासन के लिए दशकों से चुनौती बना हुआ है। जब भी पुलिस और प्रशासन इन पर सख्ती करने की कोशिश करता, तब - तब गांव के महिला-पुरुष यह कहते हुए खड़े हो जाते थे कि उन्हें और कोई काम आता नहीं। अगर कच्ची शराब भी न बेचें तो उनके परिवार का गुजर-बसर कैसे होगा।
हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं की पहल पर डीएम और एसपी की मौजूदगी में बृहस्पतिवार को सुबोधिया गांव में ‘विकल्प एक नई पहल’ नाम से कार्यक्रम का आयोजन हुआ। गांव के सभी महिला-पुरुष एकत्र हुए और उन्होंने अपनी समस्याएं रखीं। डीएम आंद्रा वामसी और एसपी यमुना प्रसाद ने नाबार्ड एवं बैंकर्स के जरिए गांव के रोजगार करने के इच्छुक लोगों को ऋण दिलाने का भरोसा दिलाया। इसके अलावा भूसे से ईंट बनाने, मोमबत्ती उद्योग और मशरूम की खेती सहित कई छोटे उद्योगों के लिए ऋण दिलाने, नाबार्ड के जरिए पडरौना में प्रशिक्षण दिलाने और किसान सेंटर के माध्यम से उनके उत्पादों की ट्रांसपोर्टिंग की व्यवस्था किए जाने का भी भरोसा दिलाया। यही नहीं, स्वयं सहायता समूहों के जरिए भी दस हजार से डेढ़ लाख रुपये तक का ऋण दिलने की बात कही गई। सुबोधिया सहित कच्ची शराब प्रभावित सभी गांवों को संबंधित एसओ को गोद लेने का निर्देश दिया गया। अपने प्रति पुलिस और प्रशासन की इस संवेदनशीलता को देखते हुए गांव के लोगों ने सामूहिक रूप से कच्ची शराब के धंधे को बंद करने का भरोसा दिलाया। एसपी यमुना प्रसाद ने बताया कि इस गांव में कच्ची शराब के अलावा रोजगार का कोई विकल्प नहीं था। गांव वाले कहते थे कि शराब बनाना और बेचना बंद कर देंगे तो उनके परिवार का गुजर-बसर नहीं हो पाएगा। ‘विकल्प एक नई पहल’ कार्यक्रम प्रदेश भर में चलाया जाएगा, जिसकी शुरुआत इस सुबोधिया गांव से की गई है। इस गांव के लोगों को ऋण, प्रशिक्षण और रोजगार दिलाने के साथ ही सामान बेचने का मार्केट उपलब्ध कराया जाएगा। इसी तरह अन्य गांवों में भी शराब बंदी के लिए योजनाओं से लाभान्वित किया जाएगा।
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सुबोधिया ऐसा गांव है, जहां करीब 1500 की आबादी में से 1200 लोग कच्ची शराब के धंधे से जुड़े हैं। इस गांव में कच्ची शराब पीने से अब तक करीब 250 लोगों की जान जा चुकी है। आलम यह है कि इस गांव में जल्दी कोई अपने बेटे-बेटियों की शादी नहीं करना चाहता है। गांव में कच्ची शराब पर अंकुश लगाना पुलिस और प्रशासन के लिए दशकों से चुनौती बना हुआ है। जब भी पुलिस और प्रशासन इन पर सख्ती करने की कोशिश करता, तब - तब गांव के महिला-पुरुष यह कहते हुए खड़े हो जाते थे कि उन्हें और कोई काम आता नहीं। अगर कच्ची शराब भी न बेचें तो उनके परिवार का गुजर-बसर कैसे होगा।
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हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं की पहल पर डीएम और एसपी की मौजूदगी में बृहस्पतिवार को सुबोधिया गांव में ‘विकल्प एक नई पहल’ नाम से कार्यक्रम का आयोजन हुआ। गांव के सभी महिला-पुरुष एकत्र हुए और उन्होंने अपनी समस्याएं रखीं। डीएम आंद्रा वामसी और एसपी यमुना प्रसाद ने नाबार्ड एवं बैंकर्स के जरिए गांव के रोजगार करने के इच्छुक लोगों को ऋण दिलाने का भरोसा दिलाया। इसके अलावा भूसे से ईंट बनाने, मोमबत्ती उद्योग और मशरूम की खेती सहित कई छोटे उद्योगों के लिए ऋण दिलाने, नाबार्ड के जरिए पडरौना में प्रशिक्षण दिलाने और किसान सेंटर के माध्यम से उनके उत्पादों की ट्रांसपोर्टिंग की व्यवस्था किए जाने का भी भरोसा दिलाया। यही नहीं, स्वयं सहायता समूहों के जरिए भी दस हजार से डेढ़ लाख रुपये तक का ऋण दिलने की बात कही गई। सुबोधिया सहित कच्ची शराब प्रभावित सभी गांवों को संबंधित एसओ को गोद लेने का निर्देश दिया गया। अपने प्रति पुलिस और प्रशासन की इस संवेदनशीलता को देखते हुए गांव के लोगों ने सामूहिक रूप से कच्ची शराब के धंधे को बंद करने का भरोसा दिलाया। एसपी यमुना प्रसाद ने बताया कि इस गांव में कच्ची शराब के अलावा रोजगार का कोई विकल्प नहीं था। गांव वाले कहते थे कि शराब बनाना और बेचना बंद कर देंगे तो उनके परिवार का गुजर-बसर नहीं हो पाएगा। ‘विकल्प एक नई पहल’ कार्यक्रम प्रदेश भर में चलाया जाएगा, जिसकी शुरुआत इस सुबोधिया गांव से की गई है। इस गांव के लोगों को ऋण, प्रशिक्षण और रोजगार दिलाने के साथ ही सामान बेचने का मार्केट उपलब्ध कराया जाएगा। इसी तरह अन्य गांवों में भी शराब बंदी के लिए योजनाओं से लाभान्वित किया जाएगा।
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