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Kushinagar News: 332 विदेशी बौद्ध पर्यटकों ने की बुद्ध स्थली पर की पूजा-अर्चना
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पकवाइनार। कुशीनगर में बृहस्पतिवार को 332 बौद्ध पर्यटकों ने विभिन्न बौद्ध स्थलों का भ्रमण किया। श्रीलंका, कोलंबिया, जापान और वियतनाम सहित विभिन्न देशों से पहुंचे पर्यटकों ने भगवान बुद्ध से जुड़े प्रमुख स्थलों का दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
पर्यटकों ने मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में भगवान बुद्ध की लेटी प्रतिमा के दर्शन किए और चीवर चढ़ाया। इसके बाद रामाभार स्तूप की परिक्रमा की। यहां उन्होंने पितरों की आत्मा की शांति के लिए विशेष पाठ और जाप किया।
भ्रमण के दौरान पर्यटक माथा कुंवर मंदिर भी पहुंचे। यहां भू-स्पर्श मुद्रा में विराजमान भगवान बुद्ध की प्रतिमा के दर्शन कर नमन किया। इसके बाद उन्होंने धातु वितरण स्थल का दर्शन-पूजन किया। रामाभार स्तूप को भगवान बुद्ध के दाह संस्कार स्थल के रूप में माना जाता है। यहां भी श्रद्धालुओं ने पितरों की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा-अर्चना और पाठ किया।
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विदेशी बौद्ध श्रद्धालुओं ने कुशीनगर के प्रमुख स्तूपों और विहारों का भी अवलोकन किया। उन्होंने पुरातात्विक अवशेषों के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी ली। भंते उपली और भंते पप्पू ने पर्यटकों को भगवान बुद्ध के जीवन और उनके उपदेशों के बारे में बताया। साथ ही सत्य, अहिंसा और शांति के सिद्धांतों की जानकारी दी।
पूजा-अर्चना और भ्रमण के बाद पर्यटक बसों से सड़क मार्ग के जरिए अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गए। उनका अगला पड़ाव अन्य बौद्ध तीर्थस्थल बताए गए।
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पर्यटकों ने मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में भगवान बुद्ध की लेटी प्रतिमा के दर्शन किए और चीवर चढ़ाया। इसके बाद रामाभार स्तूप की परिक्रमा की। यहां उन्होंने पितरों की आत्मा की शांति के लिए विशेष पाठ और जाप किया।
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भ्रमण के दौरान पर्यटक माथा कुंवर मंदिर भी पहुंचे। यहां भू-स्पर्श मुद्रा में विराजमान भगवान बुद्ध की प्रतिमा के दर्शन कर नमन किया। इसके बाद उन्होंने धातु वितरण स्थल का दर्शन-पूजन किया। रामाभार स्तूप को भगवान बुद्ध के दाह संस्कार स्थल के रूप में माना जाता है। यहां भी श्रद्धालुओं ने पितरों की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा-अर्चना और पाठ किया।
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विदेशी बौद्ध श्रद्धालुओं ने कुशीनगर के प्रमुख स्तूपों और विहारों का भी अवलोकन किया। उन्होंने पुरातात्विक अवशेषों के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी ली। भंते उपली और भंते पप्पू ने पर्यटकों को भगवान बुद्ध के जीवन और उनके उपदेशों के बारे में बताया। साथ ही सत्य, अहिंसा और शांति के सिद्धांतों की जानकारी दी।
पूजा-अर्चना और भ्रमण के बाद पर्यटक बसों से सड़क मार्ग के जरिए अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गए। उनका अगला पड़ाव अन्य बौद्ध तीर्थस्थल बताए गए।