{"_id":"598850264f1c1be7218b4784","slug":"31502105638-kushinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षामित्र स्कूल लौटे तो हस्ताक्षर को लेकर परेशानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षामित्र स्कूल लौटे तो हस्ताक्षर को लेकर परेशानी
Updated Mon, 07 Aug 2017 05:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुशीनगर। मुुख्यमंत्री से वार्ता केे बाद समायोजित शिक्षा मित्रों का आंदोलन भले ही खत्म हो गया हो लेकिन विभागीय निर्देश के अभाव में प्राथमिक स्कूल के हेड मास्टरों की मुसीबत जरूर बढ़ गई है। दिक्कत है शिक्षा मित्रों के हस्ताक्षर को लेकर। वे यह नहीं समझ पा रहे हैं बर्खास्त समायोजित शिक्षामित्रों का हस्ताक्षर कहां और किस पद पर बनवाएं।
बीते 25 जुलाई को न्यायालय ने शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन निरस्त कर दिया था। उसके बाद समायोजित शिक्षक हड़ताल पर चले गये थे। बीते मंगलवार को मुख्यमंत्री से वार्ता और आश्वासन के बाद समायोजित शिक्षामित्र आंदोलन खत्म कर अपने विद्यालय वापस आ गए। परंतु शासन की तरफ से इनके पद व कार्य को लेकर कोई स्पष्ट शासनादेश निर्गत नहीं हुआ। अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि इन्हें स्कूल में किस पद पर पढ़ाने के लिए भेजा गया है। समायोजन रद्द होने के पश्चात सहायक अध्यापक के पद पर इन्हें रखना सर्वोच्च अदालत के आदेश की अवमानना है और पूर्ववर्ती सरकार ने इन्हें सहायक अध्यापक पद पर नियुक्त कर दिया था जिसके चलते शिक्षा मित्र का पद स्वत: समाप्त हो गया था। हेडमास्टर समझ नहीं पा रहे हैं कि स्कूल आ रहे शिक्षा मित्रों का हस्ताक्षर रजिस्टर में किस पद के सापेक्ष बनवाया जाए। खुद समायोजित शिक्षक भी ऊहापोह में हैं। वह अपने पद और स्थिति को लेकर कोई निर्णय नहीं कर पा रहे हैं। कुछ जगहों पर समायोजित शिक्षक पूर्व की भांति अपने रजिस्टर में हस्ताक्षर बना रहे हैं । हेडमास्टरों का कहना है कि शिक्षा मित्रों की नाराजगी और विवाद से बचने के लिए हस्ताक्षर तो अपने ही रजिस्टर में करवाया जा रहा है, लेकिन अफसर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दे रहे हैं।
विज्ञापन
बीते 25 जुलाई को न्यायालय ने शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन निरस्त कर दिया था। उसके बाद समायोजित शिक्षक हड़ताल पर चले गये थे। बीते मंगलवार को मुख्यमंत्री से वार्ता और आश्वासन के बाद समायोजित शिक्षामित्र आंदोलन खत्म कर अपने विद्यालय वापस आ गए। परंतु शासन की तरफ से इनके पद व कार्य को लेकर कोई स्पष्ट शासनादेश निर्गत नहीं हुआ। अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि इन्हें स्कूल में किस पद पर पढ़ाने के लिए भेजा गया है। समायोजन रद्द होने के पश्चात सहायक अध्यापक के पद पर इन्हें रखना सर्वोच्च अदालत के आदेश की अवमानना है और पूर्ववर्ती सरकार ने इन्हें सहायक अध्यापक पद पर नियुक्त कर दिया था जिसके चलते शिक्षा मित्र का पद स्वत: समाप्त हो गया था। हेडमास्टर समझ नहीं पा रहे हैं कि स्कूल आ रहे शिक्षा मित्रों का हस्ताक्षर रजिस्टर में किस पद के सापेक्ष बनवाया जाए। खुद समायोजित शिक्षक भी ऊहापोह में हैं। वह अपने पद और स्थिति को लेकर कोई निर्णय नहीं कर पा रहे हैं। कुछ जगहों पर समायोजित शिक्षक पूर्व की भांति अपने रजिस्टर में हस्ताक्षर बना रहे हैं । हेडमास्टरों का कहना है कि शिक्षा मित्रों की नाराजगी और विवाद से बचने के लिए हस्ताक्षर तो अपने ही रजिस्टर में करवाया जा रहा है, लेकिन अफसर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दे रहे हैं।
विज्ञापन