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Kushinagar News: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की 25 टीमें तैनात
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बाढ़ में डूबे नलों को किया जा रहा क्लोरिनेशन
पडरौना। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। विभाग द्वारा लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इन प्रयासों में स्वास्थ्य टीमों की तैनाती और पेयजल की शुद्धता सुनिश्चित करना शामिल है।
सीएमओ डॉ. चंद्रप्रकाश ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र में कुल 25 स्वास्थ्य टीमों को ड्यूटी पर लगाया गया है। ये टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इसके साथ ही, बाढ़ चौकियों पर भी स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात की गई हैं। इन चौकियों पर चौबीसों घंटे स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहते हैं। यह तैनाती आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए की गई है। जंगली पट्टी जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में एक बेड का वार्ड भी बनाया गया है। यह वार्ड उन लोगों के लिए है जिन्हें तत्काल उपचार की आवश्यकता हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग का मुख्य जोर जलजनित बीमारियों की रोकथाम पर है।
पेयजल शुद्धिकरण के उपाय
बाढ़ प्रभावित गांवों में नलों के पानी को शुद्ध करने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई जा रही है। रात के समय नलों में क्लोरिन की आठ से दस गोलियां डाली जाती हैं। इन गोलियों को पूरी रात पानी में घुलने के लिए छोड़ दिया जाता है। सुबह लोगों को सलाह दी जाती है कि वे नल से आठ से दस लीटर पानी निकाल दें। इसके बाद ही बचे हुए पानी का सेवन करें। यह विधि पानी को कीटाणु रहित बनाने में सहायक है। क्लोरिनेशन वाले नल का पानी गर्भवती महिलाओं को पीने से मना किया गया है। यह सावधानी उनकी और गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। स्वास्थ्य टीमों और एंबुलेंस में सर्प विष की खुराक भी उपलब्ध कराई गई है।
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ग्राम पंचायत के कर्मचारियों के सहयोग से गांवों में मैलथियान का छिड़काव किया जा रहा है। यह छिड़काव मच्छरों और अन्य कीटों से होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। बाढ़ के बाद जलभराव से मच्छर जनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
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पडरौना। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। विभाग द्वारा लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इन प्रयासों में स्वास्थ्य टीमों की तैनाती और पेयजल की शुद्धता सुनिश्चित करना शामिल है।
सीएमओ डॉ. चंद्रप्रकाश ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र में कुल 25 स्वास्थ्य टीमों को ड्यूटी पर लगाया गया है। ये टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इसके साथ ही, बाढ़ चौकियों पर भी स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात की गई हैं। इन चौकियों पर चौबीसों घंटे स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहते हैं। यह तैनाती आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए की गई है। जंगली पट्टी जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में एक बेड का वार्ड भी बनाया गया है। यह वार्ड उन लोगों के लिए है जिन्हें तत्काल उपचार की आवश्यकता हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग का मुख्य जोर जलजनित बीमारियों की रोकथाम पर है।
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पेयजल शुद्धिकरण के उपाय
बाढ़ प्रभावित गांवों में नलों के पानी को शुद्ध करने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई जा रही है। रात के समय नलों में क्लोरिन की आठ से दस गोलियां डाली जाती हैं। इन गोलियों को पूरी रात पानी में घुलने के लिए छोड़ दिया जाता है। सुबह लोगों को सलाह दी जाती है कि वे नल से आठ से दस लीटर पानी निकाल दें। इसके बाद ही बचे हुए पानी का सेवन करें। यह विधि पानी को कीटाणु रहित बनाने में सहायक है। क्लोरिनेशन वाले नल का पानी गर्भवती महिलाओं को पीने से मना किया गया है। यह सावधानी उनकी और गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। स्वास्थ्य टीमों और एंबुलेंस में सर्प विष की खुराक भी उपलब्ध कराई गई है।
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ग्राम पंचायत के कर्मचारियों के सहयोग से गांवों में मैलथियान का छिड़काव किया जा रहा है। यह छिड़काव मच्छरों और अन्य कीटों से होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। बाढ़ के बाद जलभराव से मच्छर जनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है।