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आंगनबाड़ी केंद्रों के 226 भवन अधूरे, निर्माण में नहीं आ रही तेजी

Sun, 11 Oct 2020 06:12 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2020 06:12 PM IST
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226 buildings of Anganwadi centers are incomplete, construction is not accelerating
त्रिलोकपुर खुर्द गांव में अधूरा पड़ा आंगनबाड़ी भवन । - फोटो : KUSHINAGAR
आंगनबाड़ी केंद्रों के 226 भवन अधूरे, निर्माण में नहीं आ रही तेजी
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पडरौना। आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण की गति जिले में बेहद सुस्त है। एक साल से 50 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण अधूरा है। कहीं प्लास्टर नहीं तो कहीं छत का कार्य बाकी है। कई बार समीक्षा बैठक में इस पर चर्चा हो चुकी है, लेकिन विभाग पर असर नहीं दिख रहा है।
जिले में 4134 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से करीब 70 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्र परिषदीय विद्यालयों के परिसर में संचालित हैं। जबकि कई आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवन में चल रहे हैं। इसे देखते हुए शासन ने प्रत्येक वर्ष जिलेे को आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित कर धन आवंटित किया है, लेकिन विभागीय उदासीनता से इन भवनों के निर्माण में तेजी नहीं आ रही है। जिले में वर्ष 2016-17 से अब तक मिले 699 के लक्ष्य के सापेक्ष 473 आंगनबाड़ी केंद्र पूर्ण हो सके हैं। अब भी 226 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन अधूरे हैं।
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आंगनबाड़ी केंद्र के भवन निर्माण के लिए शासन की तरफ से प्रत्येक आंगनबाड़ी भवन के लिए सात लाख बावन हजार रुपये आवंटित किए जाते हैं। इसमें से चार लाख छियालिस हजार मनरेगा योजना, एक लाख छह हजार ग्राम पंचायत और दो लाख रुपये बाल विकास परियोजना विभाग की तरफ से दिए जाते हैं। भवन निर्माण के लिए ग्राम पंचायत प्रस्ताव कर बाल विकास परियोजना को सौंपता है। फिर बाल विकास परियोजना विभाग की तरफ से स्वीकृत भवन निर्माण के लिए धन मुहैया कराया जाता है।
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अधूरे भवनों की हो रही है जांच
प्रभारी डीपीओ रश्मि तिवारी ने बताया कि जिले के अधूरे आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच कराई जा रही है। 50 से अधिक आंगनबाड़ी भवन अधूरे हैं। भवन निर्माण में आने वाली परिशानियों को दूर कर निर्माण कार्य पूर्ण कराए जाएंगे।
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