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जांच की आंच में डेढ़ साल से तप रहे मरीज
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जांच की आंच में डेढ़ साल से तप रहे मरीज
- एएनएम की भर्ती में अनियमितता के आरोप के बाद लटक गया 184 स्वास्थ्य उपकेंद्रों का संचालन
- किराए पर ले लिए गए थे कमरे, उपकरणों की भी की जा चुकी थी खरीद, जांच पूरी होने का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। घर के पास स्वास्थ्य सेवाओं की आस लगाए मरीज डेढ़ वर्ष से विभागीय अनियमितता की जांच के फेर में इन सुविधाओं से वंचित हैं। उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी दूर के स्वास्थ्य केंद्रों पर जाना पड़ रहा है।
दरअसल, जिले में और 184 स्वास्थ्य उपकेंद्रों का संचालन शुरू किया जाना था। इसके लिए एनएनएम की भर्ती प्रक्रिया में विभाग ने धांधली की। इसका खामियाजा लोगों को उठाना पड़ रहा है। मामले की शिकायत हुई तो पूरे प्रकरण की जांच शुरू हुई जो डेढ़ साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। नतीजतन केंद्राें का संचालन भी अधर में है।
नियमित टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, सुरक्षित प्रसव, किशोर-किशोरियों की काउंसलिंग आदि के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिले में 184 नए स्वास्थ्य उपकेंद्र खोले जाने थे। इन्हें संचालित करने के लिए तीन हजार रुपये मासिक किराए पर कमरे भी लगभग नौ माह पहले ले लिए गए। उससे पहले 184 स्वास्थ्य उपकेंद्र खोलने के लिए शासन का आदेश आया था, लेकिन बाद में 110 उपकेंद्रों के लिए ही एएनएम की नियुक्ति की शासन से अनुमति मिली। इतने पदों पर लगभग डेढ़ साल पहले नियुक्तियां भी हो गईं, लेकिन नियुक्ति से वंचित किए गए कुछ अभ्यर्थियों ने अपात्रों की नियुक्ति का आरोप लगाते हुए शासन-प्रशासन से शिकायत कर दी थी। उसके बाद जांच शुरू हुई। जांच में एक डिप्टी सीएमओ सहित तीन लोगों की संलिप्तता पाए जाने पर मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। अभी इसकी जांच अपर निदेशक स्वास्थ्य के स्तर पर चल रही है। नतीजतन नए उपकेंद्र अब तक संचालित नहीं हो सके।
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147 उपकेंद्रों पर ही सुरक्षित प्रसव की सुविधा -
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जनपद में पूर्व से 358 स्वास्थ्य उपकेंद्र (मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र) हैं। यहां एएनएम भी तैनात हैं, लेकिन इन उपकेंद्रों में से 147 पर ही प्रशिक्षित एएनएम की तैनाती है, जहां सुरक्षित प्रसव की सुविधा है।
नए मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्रों को संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है तथा इसके लिए हुई नियुक्ति की जांच एडी स्तर से चल रही है। जल्द ही उसका समाधान हो जाने की उम्मीद है। उपकेंद्रों के लिए किराए पर कमरे पूर्व में ही ले लिए गए हैं तथा सामग्री भी खरीदी जा चुकी है।
- डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ
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- एएनएम की भर्ती में अनियमितता के आरोप के बाद लटक गया 184 स्वास्थ्य उपकेंद्रों का संचालन
- किराए पर ले लिए गए थे कमरे, उपकरणों की भी की जा चुकी थी खरीद, जांच पूरी होने का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। घर के पास स्वास्थ्य सेवाओं की आस लगाए मरीज डेढ़ वर्ष से विभागीय अनियमितता की जांच के फेर में इन सुविधाओं से वंचित हैं। उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी दूर के स्वास्थ्य केंद्रों पर जाना पड़ रहा है।
दरअसल, जिले में और 184 स्वास्थ्य उपकेंद्रों का संचालन शुरू किया जाना था। इसके लिए एनएनएम की भर्ती प्रक्रिया में विभाग ने धांधली की। इसका खामियाजा लोगों को उठाना पड़ रहा है। मामले की शिकायत हुई तो पूरे प्रकरण की जांच शुरू हुई जो डेढ़ साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। नतीजतन केंद्राें का संचालन भी अधर में है।
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नियमित टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, सुरक्षित प्रसव, किशोर-किशोरियों की काउंसलिंग आदि के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिले में 184 नए स्वास्थ्य उपकेंद्र खोले जाने थे। इन्हें संचालित करने के लिए तीन हजार रुपये मासिक किराए पर कमरे भी लगभग नौ माह पहले ले लिए गए। उससे पहले 184 स्वास्थ्य उपकेंद्र खोलने के लिए शासन का आदेश आया था, लेकिन बाद में 110 उपकेंद्रों के लिए ही एएनएम की नियुक्ति की शासन से अनुमति मिली। इतने पदों पर लगभग डेढ़ साल पहले नियुक्तियां भी हो गईं, लेकिन नियुक्ति से वंचित किए गए कुछ अभ्यर्थियों ने अपात्रों की नियुक्ति का आरोप लगाते हुए शासन-प्रशासन से शिकायत कर दी थी। उसके बाद जांच शुरू हुई। जांच में एक डिप्टी सीएमओ सहित तीन लोगों की संलिप्तता पाए जाने पर मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। अभी इसकी जांच अपर निदेशक स्वास्थ्य के स्तर पर चल रही है। नतीजतन नए उपकेंद्र अब तक संचालित नहीं हो सके।
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147 उपकेंद्रों पर ही सुरक्षित प्रसव की सुविधा -
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जनपद में पूर्व से 358 स्वास्थ्य उपकेंद्र (मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र) हैं। यहां एएनएम भी तैनात हैं, लेकिन इन उपकेंद्रों में से 147 पर ही प्रशिक्षित एएनएम की तैनाती है, जहां सुरक्षित प्रसव की सुविधा है।
नए मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्रों को संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है तथा इसके लिए हुई नियुक्ति की जांच एडी स्तर से चल रही है। जल्द ही उसका समाधान हो जाने की उम्मीद है। उपकेंद्रों के लिए किराए पर कमरे पूर्व में ही ले लिए गए हैं तथा सामग्री भी खरीदी जा चुकी है।
- डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ