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आफत का सैलाब..
Updated Sun, 03 Sep 2017 07:03 PM IST
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कुशीनगर। अहिरौलीदान गांव से होकर बहने वाली बड़ी गंडक नदी अब कचहरी टोला को नुकसान पहुंचाने लगी है। यह नदी कई स्थानों पर गांव के करीब पहुंच गई है और कटान कर रही है। इससे गांववालों में खलबली मच गई है। अनहोनी की आशंका से इस गांव के बहुत से लोगों ने अपना सामान समेट लिया है और पलायन की तैयारी करने लगे हैं।
तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के अहिरौलीदान गांव के लोगों का कहना है कि इसके पहले बड़ी गंडक नदी वर्ष 2012 में इसी तरह नुकसान कर रही थी। नदी ने इस गांव के बैरिया टोला का अस्तित्व समाप्त कर दिया था। इसके अलावा कचहरी टोला में भारी क्षति हुई थी।
गंडक नदी में पानी कम होने के बावजूद उसके लगातार कटान से अब कचहरी टोला के लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। क्योंकि नदी अब कई स्थानों पर गांव के समीप पहुंचकर कटान करने लगी है। इसके पहले पिछले एक सप्ताह में नदी चित्तू टोला को पूरी तरह उजाड़ चुकी है और वहां के लोग पलायन कर चुके हैं। कंचन टोला की भी यही स्थिति है। इस टोले के अधिकांश लोग अपने सामानों के साथ गांव को छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जा चुके हैं।
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रविवार से बड़ी गंडक का रुख कचहरी टोला की ओर हो गया। इसके भय से सुशील सिंह, हरिश्चंद्र, हरि गोविंद, जनकदेव, कमल, धुरंधर सिंह सहित कई पक्के मकानों वाले घरों पर कटान का खतरा बढ़ गया है। इस वजह से टोले के लोगों ने अपने घरों से जरूरी सामानों को समेट लिया है। गांव के हरिकिशुन, रामाज्ञा सिंह, जेके सिंह, अवध किशोर, अरविंद सिंह पटेल, सुजीत यादव का कहना है कि इस गांव के किनारे नदी जिस तरह कटान कर रही है, उससे लगता है कि तीन चार दिन में इस गांव के लोगों को घर छोड़कर जाना पड़ेगा। स्थिति दिन प्रतिदिन भयावह होती जा रही है। इस संबंध में बाढ़ खंड के एक्सईएन बीपी सिंह का कहना है कि इस गांव में कटान रोकने की कोई परियोजना स्वीकृत नहीं है।
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तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के अहिरौलीदान गांव के लोगों का कहना है कि इसके पहले बड़ी गंडक नदी वर्ष 2012 में इसी तरह नुकसान कर रही थी। नदी ने इस गांव के बैरिया टोला का अस्तित्व समाप्त कर दिया था। इसके अलावा कचहरी टोला में भारी क्षति हुई थी।
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गंडक नदी में पानी कम होने के बावजूद उसके लगातार कटान से अब कचहरी टोला के लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। क्योंकि नदी अब कई स्थानों पर गांव के समीप पहुंचकर कटान करने लगी है। इसके पहले पिछले एक सप्ताह में नदी चित्तू टोला को पूरी तरह उजाड़ चुकी है और वहां के लोग पलायन कर चुके हैं। कंचन टोला की भी यही स्थिति है। इस टोले के अधिकांश लोग अपने सामानों के साथ गांव को छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जा चुके हैं।
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रविवार से बड़ी गंडक का रुख कचहरी टोला की ओर हो गया। इसके भय से सुशील सिंह, हरिश्चंद्र, हरि गोविंद, जनकदेव, कमल, धुरंधर सिंह सहित कई पक्के मकानों वाले घरों पर कटान का खतरा बढ़ गया है। इस वजह से टोले के लोगों ने अपने घरों से जरूरी सामानों को समेट लिया है। गांव के हरिकिशुन, रामाज्ञा सिंह, जेके सिंह, अवध किशोर, अरविंद सिंह पटेल, सुजीत यादव का कहना है कि इस गांव के किनारे नदी जिस तरह कटान कर रही है, उससे लगता है कि तीन चार दिन में इस गांव के लोगों को घर छोड़कर जाना पड़ेगा। स्थिति दिन प्रतिदिन भयावह होती जा रही है। इस संबंध में बाढ़ खंड के एक्सईएन बीपी सिंह का कहना है कि इस गांव में कटान रोकने की कोई परियोजना स्वीकृत नहीं है।