{"_id":"598860144f1c1b3c208b4613","slug":"171502109716-kushinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तेंदुआ दिखने की चर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तेंदुआ दिखने की चर्चा
Updated Mon, 07 Aug 2017 06:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुशीनगर। लखुआ लखुई गांव के सरेह में एक पखवारे से तेंदुआ देखे जाने की चर्चा से लोग परेशान हैं। किसान खेतों की तरफ अकेले जाने से परहेज कर रहे हैं। हालांकि वन विभाग की तरफ से की गई छानबीन में तेंदुआ के कोई निशान नहीं दिखे हैं, लेकिन चर्चाएं कम नहीं हो रही हैं। हर दिन कहीं न कहीं तेंदुआ दिखने की चर्चा चल रही है।
खड्डा थाना क्षेत्र के लखुआ लखुई गांव एवं महराजगंज जनपद के कोठीभार थाना क्षेत्र की सीमा पर छोटी गंडक नदी के पास एक पखवारे से लोग तेंदुआ के विचरण की बात कह रहे हैं। लोगों के अनुसार निचलौल वन क्षेत्र का गेड़हरूआ व कपसी जंगल से निलककर यह जानवर खड्डा क्षेत्र के सरेह में आ रहा है और केले की खेतों में अक्सर दिख रहा है। लखुआ गांव के किसान इस्लाम, रब्बुल, रामप्रकाश, भगत आदि का कहना है कि कई बार तेंदुआ दिख चुका है। रविआलम के मुताबिक शनिवार के दिन में वह अपने केले का खेत देखने गये थे। उन्होंने वहां तेंदुआ देखा था।
खड्डा के प्रभारी रेंजर महेंद्र यादव का कहना है कि इस तरह की सूचना पर डीएफओ की अगुवाई में टीम गई थी। जो पग मार्ग (पद चिह्न) दिखाई दिया, वह तेंदुआ या बाघ का नहीं बल्कि किसी अन्य जानवर का था। फिर भी पूरी एहतियात बरती जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
खड्डा थाना क्षेत्र के लखुआ लखुई गांव एवं महराजगंज जनपद के कोठीभार थाना क्षेत्र की सीमा पर छोटी गंडक नदी के पास एक पखवारे से लोग तेंदुआ के विचरण की बात कह रहे हैं। लोगों के अनुसार निचलौल वन क्षेत्र का गेड़हरूआ व कपसी जंगल से निलककर यह जानवर खड्डा क्षेत्र के सरेह में आ रहा है और केले की खेतों में अक्सर दिख रहा है। लखुआ गांव के किसान इस्लाम, रब्बुल, रामप्रकाश, भगत आदि का कहना है कि कई बार तेंदुआ दिख चुका है। रविआलम के मुताबिक शनिवार के दिन में वह अपने केले का खेत देखने गये थे। उन्होंने वहां तेंदुआ देखा था।
विज्ञापन
खड्डा के प्रभारी रेंजर महेंद्र यादव का कहना है कि इस तरह की सूचना पर डीएफओ की अगुवाई में टीम गई थी। जो पग मार्ग (पद चिह्न) दिखाई दिया, वह तेंदुआ या बाघ का नहीं बल्कि किसी अन्य जानवर का था। फिर भी पूरी एहतियात बरती जा रही है।
विज्ञापन