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150 परिषदीय स्कूलों को बनाएंगे मॉडल
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Wed, 14 Mar 2018 12:08 AM IST
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बैठक
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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पडरौना। जिले के 150 परिषदीय स्कूलों को अगले शिक्षण सत्र में मॉडल स्कूल के तौर पर विकसित किया जाना है। इस ड्रीम प्रोजेक्ट की कार्य योजना पर चर्चा के लिए मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम की अगुवाई में जिले के ग्राम प्रधानों, ग्राम पंचायत अधिकारियों व अन्य अफसरों की बैठक हुई। इस बैठक में तय हुआ कि चयनित स्कूल को विकसित करने का जिम्मा वहां के ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी पर होगा। डीएम ने निर्माण कार्य के लिए बालू की कमी नहीं होने देने का आश्वासन दिया। यह कार्य हर हाल में जून महीने तक पूर्ण करा लिया जाना है।
बैठक को संबोधित करते हुए डीएम आंद्रा वामसी ने कहा कि कुछ परिषदीय स्कूलों की हालत बहुत बेहतर है लेकिन अन्य जगह हालत खराब है। इसलिए इस शिक्षण सत्र में जिले के 150 स्कूलों को मॉडल स्कूल के तौर पर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। औसतन हर ब्लाक से 10 स्कूल इस तरह के चयनित किए जाएंगे। इन स्कूलों में फर्श, शौचालय, रंगाई-पुताई समेत सभी कार्य बेहतर ढंग से कराए जाएंगे। डीएम ने कहा कि इस कार्य को ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सचिव को कराना होगा। डीएम ने कहा कि प्रथम चरण की सफलता के बाद अगले कुछ वर्षों में जिले के अन्य विद्यालयों को भी इसी तर्ज पर संसाधन संपन्न बनाया जाएगा।
हर ब्लॉक में 10-10 विद्यालयों को चयनित किया गया है। इसमें पांच-पांच विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई होगी। उन्होंने कहा कि विद्यालय एवं शौचालय निर्माण के लिए बालू की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सचिव इस निर्माण के लिए 14वें वित्त और राज्य वित्त से धन खर्च कर सकते हैं। प्रोजेक्टर के माध्यम से ग्राम प्रधानों को मॉडल स्कूलों का फीचर भी दिखाया गया। इस बैठक में सीडीओ देवीदास, डीपीआरओ राघवेंद्र कुमार द्विवेदी सहित सभी ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी मौजूद थे।
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डीएम ने ग्राम प्रधानों से कहा कि विद्यालयों की स्थिति को देखते हुए उनमें टाइल्स लगवाने, विद्यालय की छत टपक रही हो तो उसकी मरम्मत कराने, शौचालय के अंदर भी टाइल्स लगाने और रंगाई पुताई का काम कराने की जिम्मेदारी का निर्वहन ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सचिव को करना होगा। उन्होंने विद्यालयों के रसोई घर आधुनिक तरीके से बनवाने और आवश्यकतानुसार खिड़कियों की मरम्मत कराने का निर्देश भी दिया। उन्होंने कहा कि समस्त प्राथमिक विद्यालयों को मॉडल विद्यालय बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे तीन चरणों में पूरा कराया जाएगा।
परिषदीय स्कूलों को साधन संपन्न बनाने की योजना बीते अगस्त महीने में बनी थी। स्कूलों में पानी लगने समेत निर्माण संबंधी अन्य समस्याओ को देखते हुए डीएम ने पंचायतीराज विभाग को मरम्मत व मिट्टी भराई तथा हैंडपंपों की स्थिति सुधारने का निर्देश दिया था। कुछ जगह बरसात बाद कार्य शुरू भी हुए। इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल डीएम ने जिले के एक दर्जन उन स्कूलों को देखा जहां के अध्यापकों ने अपने खर्च से स्कूलों को बेहतर बनाया है। इसके बाद ही स्कूलों को ग्राम पंचायत के बजट से संवारने की रूपरेखा तैयार की गई। तय हुआ कि पहले चरण में 150 स्कूलों को मॉडल बनाया जाए। परिणाम अच्छा रहा तो क्रमबद्घ तरीके से अन्य स्कूलों को भी साधन संपन्न बनाया जाएगा।
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बैठक को संबोधित करते हुए डीएम आंद्रा वामसी ने कहा कि कुछ परिषदीय स्कूलों की हालत बहुत बेहतर है लेकिन अन्य जगह हालत खराब है। इसलिए इस शिक्षण सत्र में जिले के 150 स्कूलों को मॉडल स्कूल के तौर पर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। औसतन हर ब्लाक से 10 स्कूल इस तरह के चयनित किए जाएंगे। इन स्कूलों में फर्श, शौचालय, रंगाई-पुताई समेत सभी कार्य बेहतर ढंग से कराए जाएंगे। डीएम ने कहा कि इस कार्य को ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सचिव को कराना होगा। डीएम ने कहा कि प्रथम चरण की सफलता के बाद अगले कुछ वर्षों में जिले के अन्य विद्यालयों को भी इसी तर्ज पर संसाधन संपन्न बनाया जाएगा।
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हर ब्लॉक में 10-10 विद्यालयों को चयनित किया गया है। इसमें पांच-पांच विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई होगी। उन्होंने कहा कि विद्यालय एवं शौचालय निर्माण के लिए बालू की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सचिव इस निर्माण के लिए 14वें वित्त और राज्य वित्त से धन खर्च कर सकते हैं। प्रोजेक्टर के माध्यम से ग्राम प्रधानों को मॉडल स्कूलों का फीचर भी दिखाया गया। इस बैठक में सीडीओ देवीदास, डीपीआरओ राघवेंद्र कुमार द्विवेदी सहित सभी ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी मौजूद थे।
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डीएम ने ग्राम प्रधानों से कहा कि विद्यालयों की स्थिति को देखते हुए उनमें टाइल्स लगवाने, विद्यालय की छत टपक रही हो तो उसकी मरम्मत कराने, शौचालय के अंदर भी टाइल्स लगाने और रंगाई पुताई का काम कराने की जिम्मेदारी का निर्वहन ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सचिव को करना होगा। उन्होंने विद्यालयों के रसोई घर आधुनिक तरीके से बनवाने और आवश्यकतानुसार खिड़कियों की मरम्मत कराने का निर्देश भी दिया। उन्होंने कहा कि समस्त प्राथमिक विद्यालयों को मॉडल विद्यालय बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे तीन चरणों में पूरा कराया जाएगा।
परिषदीय स्कूलों को साधन संपन्न बनाने की योजना बीते अगस्त महीने में बनी थी। स्कूलों में पानी लगने समेत निर्माण संबंधी अन्य समस्याओ को देखते हुए डीएम ने पंचायतीराज विभाग को मरम्मत व मिट्टी भराई तथा हैंडपंपों की स्थिति सुधारने का निर्देश दिया था। कुछ जगह बरसात बाद कार्य शुरू भी हुए। इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल डीएम ने जिले के एक दर्जन उन स्कूलों को देखा जहां के अध्यापकों ने अपने खर्च से स्कूलों को बेहतर बनाया है। इसके बाद ही स्कूलों को ग्राम पंचायत के बजट से संवारने की रूपरेखा तैयार की गई। तय हुआ कि पहले चरण में 150 स्कूलों को मॉडल बनाया जाए। परिणाम अच्छा रहा तो क्रमबद्घ तरीके से अन्य स्कूलों को भी साधन संपन्न बनाया जाएगा।