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जलभराव से बिगड़ी प्राइमरी स्कूलों की व्यवस्था
Updated Thu, 17 Aug 2017 04:55 PM IST
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कुशीनगर। बरसात होते ही जिले के कई परिषदीय स्कूलों के परिसर तालाब बन जाते हैं। स्कूल के कमरों तक पहुंचने के लिए बच्चों व अध्यापकों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। जलभराव के चलते कई स्कूलों में पढ़ाई बाधित हो गई है। अध्यापकों की मजबूरी है कि स्कूल नहीं जाने पर कार्रवाई होगी और स्कूल में जलभराव के चलते पढ़ाना संभव नहीं है।
जिला मुख्यालय से सटे गांव सोहरौना का प्राइमरी स्कूल एनएच 28 बी के किनारे ही है। दिन भर इस स्कूल के सामने से ही सारे अफसर गुजरते हैं, लेकिन स्कूल परिसर पर शायद किसी की नजर नहीं पड़ती। बरसात होते ही गांव का सारा गंदा पानी इसी परिसर में एकत्र हो जाता है। कई दिन तक परिसर तालाब जैसा दिखता है। इस बार स्वतंत्रता दिवस के दिन यहां पानी में खड़े होकर ही ध्वजारोहण करना पड़ा।
यही हाल सांसद आदर्श गांव गोपालगढ़ के प्राइमरी स्कूल का है। फोरलेन के किनारे स्थित इस विद्यालय के पास ही गंदा पानी एकत्र रहता है। विद्यालय की चहारदीवारी भी अपूर्ण होने के चलते आसपास का बरसात का पानी भी स्कूल परिसर में एकत्र हो जाता है।
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फाजिलनगर ब्लॉक के सुमही खुर्द गांव के प्राथमिक विद्यालय में भी जलभराव के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित है। विद्यालय में 77 बच्चों का नामांकन है लेकिन परिसर में पानी भरा होने की वजह से बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। प्रधानाध्यापक रामेश्वर सिंह ने बताया कि विद्यालय से सटे ही बड़ा तालाब है। बारिश के पानी से तालाब और विद्यालय का परिसर भरा हुआ है। चहारदीवारी भी नहीं है। इसके चलते यह डर बना रहता है कि कहीं बच्चे पानी में गिर न जाएं। प्रधानाध्यापकों की मजबूरी यह है कि परिसर में मिट्टी भरवाने के लिए विभाग की तरफ से कोई बजट नहीं मिलता और ग्राम प्रधान मिट्टी भरवाने में रुचि नहीं लेते।
इस संबंध में बीएसए हेमंत राव ने बताया कि सभी खंड शिक्षाधिकारियों से इस तरह के स्कूलों की सूची मांगी गई है। साथ ही उन्हें बच्चों की पढ़ाई के लिए गांव के किसी अन्य सार्वजनिक जगह पर वैकल्पिक इंतजाम कराने का भी निर्देश दिया गया है। इसके अलावा परिसर में मिट्टी भराई व जलनिकासी का प्रबंध करने के लिए सीडीओ से चर्चा हुई है। बरसात बाद इसकी व्यवस्था कराई जाएगी।
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जिला मुख्यालय से सटे गांव सोहरौना का प्राइमरी स्कूल एनएच 28 बी के किनारे ही है। दिन भर इस स्कूल के सामने से ही सारे अफसर गुजरते हैं, लेकिन स्कूल परिसर पर शायद किसी की नजर नहीं पड़ती। बरसात होते ही गांव का सारा गंदा पानी इसी परिसर में एकत्र हो जाता है। कई दिन तक परिसर तालाब जैसा दिखता है। इस बार स्वतंत्रता दिवस के दिन यहां पानी में खड़े होकर ही ध्वजारोहण करना पड़ा।
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यही हाल सांसद आदर्श गांव गोपालगढ़ के प्राइमरी स्कूल का है। फोरलेन के किनारे स्थित इस विद्यालय के पास ही गंदा पानी एकत्र रहता है। विद्यालय की चहारदीवारी भी अपूर्ण होने के चलते आसपास का बरसात का पानी भी स्कूल परिसर में एकत्र हो जाता है।
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फाजिलनगर ब्लॉक के सुमही खुर्द गांव के प्राथमिक विद्यालय में भी जलभराव के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित है। विद्यालय में 77 बच्चों का नामांकन है लेकिन परिसर में पानी भरा होने की वजह से बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। प्रधानाध्यापक रामेश्वर सिंह ने बताया कि विद्यालय से सटे ही बड़ा तालाब है। बारिश के पानी से तालाब और विद्यालय का परिसर भरा हुआ है। चहारदीवारी भी नहीं है। इसके चलते यह डर बना रहता है कि कहीं बच्चे पानी में गिर न जाएं। प्रधानाध्यापकों की मजबूरी यह है कि परिसर में मिट्टी भरवाने के लिए विभाग की तरफ से कोई बजट नहीं मिलता और ग्राम प्रधान मिट्टी भरवाने में रुचि नहीं लेते।
इस संबंध में बीएसए हेमंत राव ने बताया कि सभी खंड शिक्षाधिकारियों से इस तरह के स्कूलों की सूची मांगी गई है। साथ ही उन्हें बच्चों की पढ़ाई के लिए गांव के किसी अन्य सार्वजनिक जगह पर वैकल्पिक इंतजाम कराने का भी निर्देश दिया गया है। इसके अलावा परिसर में मिट्टी भराई व जलनिकासी का प्रबंध करने के लिए सीडीओ से चर्चा हुई है। बरसात बाद इसकी व्यवस्था कराई जाएगी।