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सेवरही चीनी मिल गेट पर धरना चौथे दिन जारी
Updated Thu, 20 Sep 2018 11:33 PM IST
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विधायक व किसानों ने किया अर्द्धनग्न प्रदर्शन
फोटो है।
अमर उजाला ब्यूरो
तमकुहीरोड। सेवरही चीनी मिल पर गन्ना किसानों के बकाए 64 करोड़ रुपये के भुगतान के लिए चल रहे धरने के चौथे दिन गुरुवार को विधायक व किसानों ने अर्द्धनग्न प्रदर्शन किया। किसानों ने मिल प्रशासन से बकाया भुगतान किए जाने की मांग की।
विधायक अजय कुमार लल्लू ने कहा कि मिल प्रबंधन किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। किसी भी हाल में गन्ना किसानों का भुगतान नहीं रोकने की सरकार की हिदायत के बावजूद मिल प्रबंधन किसानों का 64 करोड़ रुपये छह महीने से रोके रखा है। इस दौरान डॉ. प्रभु गुप्ता, मुन्ना कुशवाहा, राजकुमार राय, जेबी सिंह, राजेंद्र साहनी, महंत निषाद, संतोष राय, मोहम्मद अली, अनिल सिंह पटेल, रामजी मद्देशिया, झिंकू सिंह, मनोज कुशवाहा, कश्मीरीलाल गुप्ता, चंद्रिका यादव आदि मौजूद रहे। वहीं चीनी मिल सेवरही के अधिशासी निदेशक शेरसिंह चौहान ने किसानों को आश्वस्त किया कि गन्ना किसान धैर्य न खोएं। उनके संपूर्ण बकाया का भुगतान कर दिया जाएगा। इस सत्र में उत्पादन लागत और बाजार भाव में छह सौ रुपये प्रति क्विंटल का अंतर है। दो लाख क्विंटल शीरा पड़ा हुआ है। उसका कोई खरीददार नहीं है। सरकार इस समस्या से निपटने में उनकी मदद करने में लगी हुई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
तमकुहीरोड। सेवरही चीनी मिल पर गन्ना किसानों के बकाए 64 करोड़ रुपये के भुगतान के लिए चल रहे धरने के चौथे दिन गुरुवार को विधायक व किसानों ने अर्द्धनग्न प्रदर्शन किया। किसानों ने मिल प्रशासन से बकाया भुगतान किए जाने की मांग की।
विधायक अजय कुमार लल्लू ने कहा कि मिल प्रबंधन किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। किसी भी हाल में गन्ना किसानों का भुगतान नहीं रोकने की सरकार की हिदायत के बावजूद मिल प्रबंधन किसानों का 64 करोड़ रुपये छह महीने से रोके रखा है। इस दौरान डॉ. प्रभु गुप्ता, मुन्ना कुशवाहा, राजकुमार राय, जेबी सिंह, राजेंद्र साहनी, महंत निषाद, संतोष राय, मोहम्मद अली, अनिल सिंह पटेल, रामजी मद्देशिया, झिंकू सिंह, मनोज कुशवाहा, कश्मीरीलाल गुप्ता, चंद्रिका यादव आदि मौजूद रहे। वहीं चीनी मिल सेवरही के अधिशासी निदेशक शेरसिंह चौहान ने किसानों को आश्वस्त किया कि गन्ना किसान धैर्य न खोएं। उनके संपूर्ण बकाया का भुगतान कर दिया जाएगा। इस सत्र में उत्पादन लागत और बाजार भाव में छह सौ रुपये प्रति क्विंटल का अंतर है। दो लाख क्विंटल शीरा पड़ा हुआ है। उसका कोई खरीददार नहीं है। सरकार इस समस्या से निपटने में उनकी मदद करने में लगी हुई है।
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