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मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने शुरू किया स्वच्छ स्कूल कार्यक्रम
Updated Fri, 22 Dec 2017 07:21 PM IST
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पडरौना। परिषदीय स्कूलों को पढ़ाई के साथ-साथ सफाई में भी औव्वल बनाने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नई पहल की है। स्वच्छ स्कूल कार्यक्रम के जरिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण वाले स्कूलों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान जिला, प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर दिया जाएगा। स्कूलों के चयन के लिए जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में दस सदस्यीय समिति गठित की गई है। इसके अलावा इनके भौतिक सत्यापन के लिए ब्लॉक स्तर पर भी चार सदस्यीय समिति कार्य करेगी।
परिषदीय स्कूलों में सरकार का अब तक सारा जोर नामांकन बढ़ाने पर ही रहा है। परंतु अब शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ-साथ बेहतर वातावरण निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्कूलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का फार्मूला खोजा है। अब हर साल स्वच्छ स्कूल का चयन किया जाएगा। यह स्कूल पढ़ाई के साथ-साथ सफाई, पेयजल, हरियाली, शौचालय के उपयोग आदि में औव्वल होगा। स्कूलों को इसके लिए एक फार्म भरना होगा। इसकी ग्रेडिंग डीएम की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति करेगी। इस समिति में सीडीओ, बीएसए, सीएमओ व अधिशासी अभियंता जल निगम के अलावा एक इंटर कॉलेज के प्रधानाध्यापक, एक परिषदीय स्कूल के श्रेष्ठ प्रधानाध्यापक, एक नवाचारी सहायक अध्यापक और दो स्वयं सेवी संस्थाओं के पदाधिकारी होंगे। इनकी ग्रेडिंग के बाद सर्वश्रेष्ठ ग्रेडिंग वाले स्कूलों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। भौतिक सत्यापन के लिए ब्लॉक स्तर पर बीडीओ, बीईओ, सीडीपीओ और एडीओ पंचायत की एक समिति होगी। सत्यापन रिपोर्ट और ग्रेडिंग के आधार पर जिले स्तर पर स्वच्छ विद्यालय का चयन किया जाएगा। जिला स्तर के स्वच्छ विद्यालय के बारे में रिपोर्ट प्रदेश स्तर पर भेजी जाएगी। प्रदेश स्तर पर चयनित स्वच्छ विद्यालय को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए नामित किया जाएगा।
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परिषदीय स्कूलों में सरकार का अब तक सारा जोर नामांकन बढ़ाने पर ही रहा है। परंतु अब शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ-साथ बेहतर वातावरण निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्कूलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का फार्मूला खोजा है। अब हर साल स्वच्छ स्कूल का चयन किया जाएगा। यह स्कूल पढ़ाई के साथ-साथ सफाई, पेयजल, हरियाली, शौचालय के उपयोग आदि में औव्वल होगा। स्कूलों को इसके लिए एक फार्म भरना होगा। इसकी ग्रेडिंग डीएम की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति करेगी। इस समिति में सीडीओ, बीएसए, सीएमओ व अधिशासी अभियंता जल निगम के अलावा एक इंटर कॉलेज के प्रधानाध्यापक, एक परिषदीय स्कूल के श्रेष्ठ प्रधानाध्यापक, एक नवाचारी सहायक अध्यापक और दो स्वयं सेवी संस्थाओं के पदाधिकारी होंगे। इनकी ग्रेडिंग के बाद सर्वश्रेष्ठ ग्रेडिंग वाले स्कूलों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। भौतिक सत्यापन के लिए ब्लॉक स्तर पर बीडीओ, बीईओ, सीडीपीओ और एडीओ पंचायत की एक समिति होगी। सत्यापन रिपोर्ट और ग्रेडिंग के आधार पर जिले स्तर पर स्वच्छ विद्यालय का चयन किया जाएगा। जिला स्तर के स्वच्छ विद्यालय के बारे में रिपोर्ट प्रदेश स्तर पर भेजी जाएगी। प्रदेश स्तर पर चयनित स्वच्छ विद्यालय को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए नामित किया जाएगा।
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