{"_id":"5ca3a64dbdec2213ef2d2bf4","slug":"11554228813-kushinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गिरमिटिया मजदूरों को समर्पित होगा लोक रंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गिरमिटिया मजदूरों को समर्पित होगा लोक रंग
Tue, 02 Apr 2019 11:50 PM IST
राकेश पांडेय
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: राकेश पांडेय
Updated Tue, 02 Apr 2019 11:50 PM IST
विज्ञापन
जोगिया पट्टी गांव में आयोजित होने वाले लोकरंग कार्यक्रम की जानकारी देते आयोजन समिति के लोग ।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पडरौना। भारतीय लोक संगीत और कलाओं की खुशबू फाजिलनगर क्षेत्र के जोगिया जनूबीपट्टी की धरती से होकर अब विश्व क्षितिज पर पहुंच छाने लगी है। अमेरिका के गुयाना के साथ-साथ मारीशस और सूरीनाम के कलाकार भी अब लोक-रंग से जुड़ने में दिलचस्पी दिखाने लगे हैं। इस साल 11 और 12 अप्रैल को जोगिया जनूबीपट्टी में आयोजित होने वाले ‘लोक-रंग’ महोत्सव में इन देशों के कलाकार अपने कार्यक्रम के जरिए गिरमिटिया मजदूरों की बेबसी और उनके ऊपर हुए अंग्रेजों के बेइंतहा जुल्म की दास्तां बयां करेंगे।
हर साल लोक-रंग महोत्सव का आयोजन करने वाले लोक-रंग सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष सुभाषचंद्र कुशवाहा ने यह जानकारी दी। वह लोक-रंग महोत्सव के बावत मंगलवार को नगर के एक होटल में पत्रकारों से मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि लोकसंस्कृति को बढ़ावा देने के लिए 12 वर्षों के अथक प्रयास की देन है कि इस कार्यक्रम में विदेशी टीमें स्वयं के खर्च और संसाधनों से आ रही हैं। उन्होंने बताया कि दो साल पहले लोक-रंग कार्यक्रम में आए नीदरलैंड के राजमोहन को यह आयोजन ऐसा भाया कि उन्होंने विदेशों में बसे सभी गिरमिटिया समुदाय के कलाकारों से लोक-रंग में आने की अपील की। फलस्वरुप इस वर्ष गयाना, सूरीनाम और मॉरीशस की टीमें आ रही हैं।
उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में राजमोहन के अलावा दक्षिणी अमेरिकी देश गयाना के एश्टॉन रमदहल अपनी छह सदस्यीय टीम के साथ आ रहे हैं, जो वर्तमान में अमेरिकी नागरिक हैं और अपनी छठीं पीढ़ी के तान सिंगर हैं। इनके परदादा 1840 के आसपास इस तान गायकी को बिहार से गयाना ले गए थे। इनके अलावा मॉरीशस के पूर्व प्रधानमंत्री की पत्नी सरिता बुधू, जो मॉरीशस भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन, मिनिस्ट्री ऑफ आर्ट एंड कल्चर की अध्यक्ष भी हैं, 25 महिलाओं की गीत गवाई टीम के साथ शिरकत करेंगी।
विज्ञापन
यहां बता दें कि इस टीम को यूनेस्को ने विश्व मानवता की हिफाजत में अतुलनीय योगदान के रूप में मान्यता प्रदान की है। यह पूर्वांचल ही नहीं, बल्कि देश के लिए पहला अवसर है, जब तीन गिरमिटिया देश एक मंच पर दिखेंगे। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम का आगाज महिलाओं के लोकगीत के साथ ही होगा। इसके अलावा पहली बार सोरठी बृजभार की गायकी का भी प्रस्तुतिकरण होगा। यही नहीं इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के बाउल के भिन्न×भिन्न रूप देखने को मिलेंगे।
राजस्थानी लोक गायकी और नृत्य के अलावा दिल्ली के हामिद बहरुपिया, बेटी बेचवा और राजा फोलवा का नाटक भी दिखाया जाएगा। दूसरे दिन 12 अप्रैल को आयोजित होने वाली विचार गोष्ठी भी गिरमिटिया कलाकारों को ही समर्पित होगी, जिसका विषय ‘गिरमिटिया लोक संस्कृति का पुरबिया संबंध’ होगा। इस दौरान सुभाषचंद्र कुशवाहा के साथ आयोजन से जुड़े भुवनेश्वर राय, मनोज सिंह, इसरायल और अनुराग भी मौजूद थे।
विज्ञापन
हर साल लोक-रंग महोत्सव का आयोजन करने वाले लोक-रंग सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष सुभाषचंद्र कुशवाहा ने यह जानकारी दी। वह लोक-रंग महोत्सव के बावत मंगलवार को नगर के एक होटल में पत्रकारों से मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि लोकसंस्कृति को बढ़ावा देने के लिए 12 वर्षों के अथक प्रयास की देन है कि इस कार्यक्रम में विदेशी टीमें स्वयं के खर्च और संसाधनों से आ रही हैं। उन्होंने बताया कि दो साल पहले लोक-रंग कार्यक्रम में आए नीदरलैंड के राजमोहन को यह आयोजन ऐसा भाया कि उन्होंने विदेशों में बसे सभी गिरमिटिया समुदाय के कलाकारों से लोक-रंग में आने की अपील की। फलस्वरुप इस वर्ष गयाना, सूरीनाम और मॉरीशस की टीमें आ रही हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में राजमोहन के अलावा दक्षिणी अमेरिकी देश गयाना के एश्टॉन रमदहल अपनी छह सदस्यीय टीम के साथ आ रहे हैं, जो वर्तमान में अमेरिकी नागरिक हैं और अपनी छठीं पीढ़ी के तान सिंगर हैं। इनके परदादा 1840 के आसपास इस तान गायकी को बिहार से गयाना ले गए थे। इनके अलावा मॉरीशस के पूर्व प्रधानमंत्री की पत्नी सरिता बुधू, जो मॉरीशस भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन, मिनिस्ट्री ऑफ आर्ट एंड कल्चर की अध्यक्ष भी हैं, 25 महिलाओं की गीत गवाई टीम के साथ शिरकत करेंगी।
विज्ञापन
यहां बता दें कि इस टीम को यूनेस्को ने विश्व मानवता की हिफाजत में अतुलनीय योगदान के रूप में मान्यता प्रदान की है। यह पूर्वांचल ही नहीं, बल्कि देश के लिए पहला अवसर है, जब तीन गिरमिटिया देश एक मंच पर दिखेंगे। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम का आगाज महिलाओं के लोकगीत के साथ ही होगा। इसके अलावा पहली बार सोरठी बृजभार की गायकी का भी प्रस्तुतिकरण होगा। यही नहीं इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के बाउल के भिन्न×भिन्न रूप देखने को मिलेंगे।
राजस्थानी लोक गायकी और नृत्य के अलावा दिल्ली के हामिद बहरुपिया, बेटी बेचवा और राजा फोलवा का नाटक भी दिखाया जाएगा। दूसरे दिन 12 अप्रैल को आयोजित होने वाली विचार गोष्ठी भी गिरमिटिया कलाकारों को ही समर्पित होगी, जिसका विषय ‘गिरमिटिया लोक संस्कृति का पुरबिया संबंध’ होगा। इस दौरान सुभाषचंद्र कुशवाहा के साथ आयोजन से जुड़े भुवनेश्वर राय, मनोज सिंह, इसरायल और अनुराग भी मौजूद थे।