{"_id":"5aeb484d4f1c1b86098b80a1","slug":"11525368909-kushinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला मुख्यालय पर शौचालय और पेयजल का संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला मुख्यालय पर शौचालय और पेयजल का संकट
Updated Thu, 03 May 2018 11:49 PM IST
विज्ञापन
खराब हैंडपंप
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पडरौना (कुशीनगर)। पूरे जिले में पेयजल और शौचालय का इंतजाम कराने में जुटे हाकिम जिला मुख्यालय पर ही इसका इंतजाम करना भूल गए हैं। कलेक्ट्रेट व विकास भवन परिसर में बना एक-एक सार्वजनिक शौचालय बंद है तो जिला अस्पताल परिसर में सार्वजनिक शौचालय है ही नहीं। पेयजल की व्यवस्था भी दुकानदारों के भरोसे है, क्योंकि सरकरी परिसर में लगे अधिकांश नल या तो खराब पड़े हैं या फिर उनका पानी पीने लायक नहीं है।
रविंद्रनगर धूस पर डेढ़ दशक से जिले के अधिकांश सरकारी दफ्तर संचालित हो रहे हैं। कलेक्ट्रेट, विकास भवन, जिला अस्पताल, पुलिस लाइन, जिला एवं सत्र न्यायालय समेत कई बड़े भवन हैं जिनमें जिले के अधिकांश विभागों के दफ्तर हैं। इन दफ्तरों में सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक आम लोग आते-जाते रहते हैं। चुनाव या बड़े आंदोलन की स्थिति में सर्वाधिक भीड़ यहीं रहती है। दिन भर यहां रहे लोगों को पानी व नित्यक्रिया के लिए परेशान होना पड़ता है। सार्वजनिक शौचालय तथा मूत्रालय नहीं होने की वजह से लोग परेशान होकर इधर-उधर भटकते रहते हैं।
कलेक्ट्रेट परिसर में ही खराब है इंडिया मार्का हैंडपंप
कलेक्ट्रेट परिसर में आम लोगों के लिए सात इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं। परंतु इसमें से पांच हैंडपंप किसी न किसी वजह से खराब हैं। दो हैंडपंप चालू भी हैं तो उनमें से एक से दूषित पानी निकलता है। मजबूरी में लोग प्यास बुझाने के लिए कलेक्ट्रेट के सामने सड़क पर चलने वाली दुकानों में जाते हैं। कलेक्ट्रट परिसर में ही पश्चिम तरफ आम लोगों के लिए बना शौचालय आज तक चालू ही नहीं हुआ। शौचालय के बगल की दीवार तथा झाड़ियों में लोग निपटते रहते हैं।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में भी नहीं है इंतजाम
जिला अस्पताल परिसर में 24 घंटे मरीजों व उनके साथ तीमारदारों की भीड़ रहती है। अस्पताल में भर्ती मरीजों व कर्मचारियों के लिए तो अंदर व्यवस्था है लेकिन साथ आए तीमारदार व अन्य लोगों को जरूरत पड़ने पर इधर-उधर भटकना पड़ता है। इस परिसर में पहले जिस जगह सार्वजनिक शौचालय था वहां अब महिला अस्पताल के लिए भवन बन चुका है। वहां बने सार्वजनिक शौचालय को तोड़ा गया लेकिन उसकी जगह नई व्यवस्था नहीं हुई।
विकास भवन परिसर के शौचालय की हालत दयनीय
पूरे जिले में शौचालय का प्रयोग करने और स्वच्छता के लिए अलख जगाने वाले पंचायतीराज विभाग का दफ्तर विकास भवन में ही है। इसके बाद भी इस परिसर में बना शौचालय दयनीय हालत में है। आलम यह है कि इस शौचालय में पानी की सप्लाई तक नहीं है। इसकी वजह से शौचालय बंद पड़ा है। इस परिसर में लगे दो इंडिया मार्का हैंडपंप में से एक खराब है।
व्यवस्था का जिम्मा पंचायतीराज का नहीं : डीपीआरओ
जिला मुख्यालय पर पेयजल व शौचालय की किल्लत के संबंध में डीपीआरओ आरके द्विवेदी का कहना है कि जिला मुख्यालय स्थित विभिन्न विभागों के परिसर में कर्मचारियों व आम लोगों के लिए पेयजल व शौचालय आदि की सुविधा का इंतजाम कराना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।
रविंद्रनगर धूस पर डेढ़ दशक से जिले के अधिकांश सरकारी दफ्तर संचालित हो रहे हैं। कलेक्ट्रेट, विकास भवन, जिला अस्पताल, पुलिस लाइन, जिला एवं सत्र न्यायालय समेत कई बड़े भवन हैं जिनमें जिले के अधिकांश विभागों के दफ्तर हैं। इन दफ्तरों में सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक आम लोग आते-जाते रहते हैं। चुनाव या बड़े आंदोलन की स्थिति में सर्वाधिक भीड़ यहीं रहती है। दिन भर यहां रहे लोगों को पानी व नित्यक्रिया के लिए परेशान होना पड़ता है। सार्वजनिक शौचालय तथा मूत्रालय नहीं होने की वजह से लोग परेशान होकर इधर-उधर भटकते रहते हैं।
विज्ञापन
कलेक्ट्रेट परिसर में ही खराब है इंडिया मार्का हैंडपंप
कलेक्ट्रेट परिसर में आम लोगों के लिए सात इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं। परंतु इसमें से पांच हैंडपंप किसी न किसी वजह से खराब हैं। दो हैंडपंप चालू भी हैं तो उनमें से एक से दूषित पानी निकलता है। मजबूरी में लोग प्यास बुझाने के लिए कलेक्ट्रेट के सामने सड़क पर चलने वाली दुकानों में जाते हैं। कलेक्ट्रट परिसर में ही पश्चिम तरफ आम लोगों के लिए बना शौचालय आज तक चालू ही नहीं हुआ। शौचालय के बगल की दीवार तथा झाड़ियों में लोग निपटते रहते हैं।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में भी नहीं है इंतजाम
जिला अस्पताल परिसर में 24 घंटे मरीजों व उनके साथ तीमारदारों की भीड़ रहती है। अस्पताल में भर्ती मरीजों व कर्मचारियों के लिए तो अंदर व्यवस्था है लेकिन साथ आए तीमारदार व अन्य लोगों को जरूरत पड़ने पर इधर-उधर भटकना पड़ता है। इस परिसर में पहले जिस जगह सार्वजनिक शौचालय था वहां अब महिला अस्पताल के लिए भवन बन चुका है। वहां बने सार्वजनिक शौचालय को तोड़ा गया लेकिन उसकी जगह नई व्यवस्था नहीं हुई।
विकास भवन परिसर के शौचालय की हालत दयनीय
पूरे जिले में शौचालय का प्रयोग करने और स्वच्छता के लिए अलख जगाने वाले पंचायतीराज विभाग का दफ्तर विकास भवन में ही है। इसके बाद भी इस परिसर में बना शौचालय दयनीय हालत में है। आलम यह है कि इस शौचालय में पानी की सप्लाई तक नहीं है। इसकी वजह से शौचालय बंद पड़ा है। इस परिसर में लगे दो इंडिया मार्का हैंडपंप में से एक खराब है।
व्यवस्था का जिम्मा पंचायतीराज का नहीं : डीपीआरओ
जिला मुख्यालय पर पेयजल व शौचालय की किल्लत के संबंध में डीपीआरओ आरके द्विवेदी का कहना है कि जिला मुख्यालय स्थित विभिन्न विभागों के परिसर में कर्मचारियों व आम लोगों के लिए पेयजल व शौचालय आदि की सुविधा का इंतजाम कराना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।