{"_id":"5cba0ff7bdec2213ea53a7b3","slug":"111555697655-kushinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंडक की जद में आया सत्संग भवन, सहमे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंडक की जद में आया सत्संग भवन, सहमे लोग
Sat, 20 Apr 2019 12:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 20 Apr 2019 12:06 AM IST
विज्ञापन
कटान करती हुई जंगलीपट्टी में सत्संग भवन के पास पहुंची बड़ी गंडक।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तमकुहीरोड। एपी बांध पर नदी के बढ़ते दबाव और बचाव के इंतजाम की ओर से ध्यान नहीं दिए जाने से लोगों की नीद हराम हो गई है। जंगलीपट्टी के पास की स्थिति देख कर लोग यहीं कह रहे है कि यदि बचाव समय से नहीं किया गया तो सतसंग भवन के साथ एपी बांध को खतरा उत्पन्न हो सकता है।
लगभग 17 किलोमीटर लंबे एपी बांध की हालत इस साल ठीक नहीं है।अहिरौलीदान और बाघाचौर में तो पहले से ही कटान का खतरा बना हुआ है और लोग सहमे हैं। अब जंगलीपट्टी में भी किलोमीटर 0.800 के सामने दो दशक से अधिक समय से बने सीताराम सत्संग भवन पर भी कटान का खतरा मंडराने लगा है।
गंडक नदी सत्संग भवन के करीब पहुंच गई है और कभी भी भवन को अपनी धारा में विलीन कर सकती है। इस क्षेत्र के सत्संगी हरिहर यादव बताते है कि दो दशक पहले इसी स्थान पर सीताराम यज्ञ के बाद इस सत्संग भवन का निर्माण कराया गया था। उस समय गंडक नदी लगभग दो किलोमीटर दूर थी।
विज्ञापन
तभी से सीताराम के अनुयायी सप्ताह में एक दिन यहां सत्संग करते चले आ रहे हैं, लेकिन पिछले साल से नदी का रुख इस सत्संग भवन की ओर हो गया है। बावजूद इसके, बाढ़खंड विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। गांववालों का कहना है कि नदी कटान करते अब सत्संग भवन के करीब पहुंच चुकी है।
ऐसे में यदि नदी का कटान रोकने का पुख्ता इंतजाम नहीं हुआ तो इस भवन को भी नदी चपेट में ले सकती है। ग्रामीण मथुरा सिंह, बाबूलाल निषाद, प्रभुनाथ यादव, मनोज गुप्ता, शर्मा यादव, ललन सिंह, देवता यादव, कैलाश सिंह, सकलदेव सिंह आदि ने बाढ़खंड का ध्यान आकृष्ट कराते हुए नदी कटान और सत्संग भवन की सुरक्षा के लिए तत्काल पुख्ता इंतजाम की मांग की है।
विज्ञापन
लगभग 17 किलोमीटर लंबे एपी बांध की हालत इस साल ठीक नहीं है।अहिरौलीदान और बाघाचौर में तो पहले से ही कटान का खतरा बना हुआ है और लोग सहमे हैं। अब जंगलीपट्टी में भी किलोमीटर 0.800 के सामने दो दशक से अधिक समय से बने सीताराम सत्संग भवन पर भी कटान का खतरा मंडराने लगा है।
विज्ञापन
गंडक नदी सत्संग भवन के करीब पहुंच गई है और कभी भी भवन को अपनी धारा में विलीन कर सकती है। इस क्षेत्र के सत्संगी हरिहर यादव बताते है कि दो दशक पहले इसी स्थान पर सीताराम यज्ञ के बाद इस सत्संग भवन का निर्माण कराया गया था। उस समय गंडक नदी लगभग दो किलोमीटर दूर थी।
विज्ञापन
तभी से सीताराम के अनुयायी सप्ताह में एक दिन यहां सत्संग करते चले आ रहे हैं, लेकिन पिछले साल से नदी का रुख इस सत्संग भवन की ओर हो गया है। बावजूद इसके, बाढ़खंड विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। गांववालों का कहना है कि नदी कटान करते अब सत्संग भवन के करीब पहुंच चुकी है।
ऐसे में यदि नदी का कटान रोकने का पुख्ता इंतजाम नहीं हुआ तो इस भवन को भी नदी चपेट में ले सकती है। ग्रामीण मथुरा सिंह, बाबूलाल निषाद, प्रभुनाथ यादव, मनोज गुप्ता, शर्मा यादव, ललन सिंह, देवता यादव, कैलाश सिंह, सकलदेव सिंह आदि ने बाढ़खंड का ध्यान आकृष्ट कराते हुए नदी कटान और सत्संग भवन की सुरक्षा के लिए तत्काल पुख्ता इंतजाम की मांग की है।