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नदी का रुख इस टोला पर, बचाव के पर्याप्त संसाधन नहीं
Updated Tue, 04 Sep 2018 11:09 PM IST
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अब खैरखुटा टोला पर बढ़ा कटान का खतरा
घटते-बढ़ते नदी के जल स्तर बांधों पर बढ़ रहा है दबाव
अमर उजाला ब्यूरो
तमकुहीरोड। बड़ी गंडक नदी के किनारे बसे लोगों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। इसके घटते-बढ़ते जलस्तर से अब अहिरौलीदान के खैरखुटा में रहने वाले लोगों के सामने बाढ़ का संकट उत्पन्न हो गया है। बाढ़ खंड का बचाव कार्य नदी की कटान को रोक पाने में अक्षम साबित हो रहा है।
अगस्त महीने के पहले सप्ताह से ही गंडक नदी अहिरौलीदान गांव के कचहरी टोला, नोनियापट्टी, मदुरही, खैरखुटा और दलित बस्ती को निशाना बना लिया है। यहां के 150 से अधिक परिवार बेघर हो चुके है। इन गांवों के संवेदनशील स्थानों पर बाढ़ खंड कहीं बोल्डर तो कहीं जियो बैग और कहीं कहीं मिट्टी से भरे बोरों का इस्तेमाल कर नदी का कटान रोकने की कोशिश कर रहा है, फिर भी इस गांव के खैरखुटा टोला की ओर नदी कटान करती हुई बढ़ रही है। अहिरौलीदान के पूर्व प्रधान मजिस्टर पासवान, रबड़राम, भुटेलाराम, रामचंद्र, चंद्रिका, भोला, मोहनलाल, सुकई आदि का कहना है कि बचाव कार्य तो हो रहा है, लेकिन बाढ़खंड विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में संसाधन नहीं हैं। इसके चलते बचाव कार्य की गति काफी धीमी हो गई है। इस संबंध में बाढ़खंड के एक्सईएन भरतराम ने बताया कि सभी संवेदनशील स्थानों पर बचाव कार्य चल रहा है। स्थिति नियंत्रण में है।
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घटते-बढ़ते नदी के जल स्तर बांधों पर बढ़ रहा है दबाव
अमर उजाला ब्यूरो
तमकुहीरोड। बड़ी गंडक नदी के किनारे बसे लोगों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। इसके घटते-बढ़ते जलस्तर से अब अहिरौलीदान के खैरखुटा में रहने वाले लोगों के सामने बाढ़ का संकट उत्पन्न हो गया है। बाढ़ खंड का बचाव कार्य नदी की कटान को रोक पाने में अक्षम साबित हो रहा है।
अगस्त महीने के पहले सप्ताह से ही गंडक नदी अहिरौलीदान गांव के कचहरी टोला, नोनियापट्टी, मदुरही, खैरखुटा और दलित बस्ती को निशाना बना लिया है। यहां के 150 से अधिक परिवार बेघर हो चुके है। इन गांवों के संवेदनशील स्थानों पर बाढ़ खंड कहीं बोल्डर तो कहीं जियो बैग और कहीं कहीं मिट्टी से भरे बोरों का इस्तेमाल कर नदी का कटान रोकने की कोशिश कर रहा है, फिर भी इस गांव के खैरखुटा टोला की ओर नदी कटान करती हुई बढ़ रही है। अहिरौलीदान के पूर्व प्रधान मजिस्टर पासवान, रबड़राम, भुटेलाराम, रामचंद्र, चंद्रिका, भोला, मोहनलाल, सुकई आदि का कहना है कि बचाव कार्य तो हो रहा है, लेकिन बाढ़खंड विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में संसाधन नहीं हैं। इसके चलते बचाव कार्य की गति काफी धीमी हो गई है। इस संबंध में बाढ़खंड के एक्सईएन भरतराम ने बताया कि सभी संवेदनशील स्थानों पर बचाव कार्य चल रहा है। स्थिति नियंत्रण में है।
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