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Kushinagar News: 247 डॉक्टर में से 102 हड़ताल पर, सीएचसी व पीचएसी पर नहीं मिल रहा इलाज
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हड़ताल से 15 सीएचसी, 60 पीएचसी, 205 आरोग्य मंदिर व 400 एएनएम सेंटरों पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
सीएचसी व पीएचसी में उपचार नहीं मिलने से मेडिकल कॉलेज पहुंचे मरीज
पीएचसी, सीएचसी में नहीं मिला उपचार तो मेडिकल कॉलेज पहुंचे मरीज
पडरौना। विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के करीब एक हजार संविदाकर्मियों की वजह से स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई हैं। जनपद में कुल 247 डॉक्टरों में से 102 एनएचएम के हैं। इस वजह से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। पीएचसी व सीएचसी पर पहुंचे मरीज उपचार नहीं होने पर मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। सोमवार को मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ देखी गई। मरीजों ने बताया कि अगर सीएचसी व पीएचसी में उपचार मिला होता तो उन्हें मेडिकल कॉलेज तक नहीं आना पड़ता।
स्वास्थ्य विभाग में दर्ज आंकड़े के मुताबिक, जिले में नियमित डॉक्टरों के 264 पद स्वीकृत हैं लेकिन उनके सापेक्ष सिर्फ 166 डॉक्टर ही हैं जो 15 सीएचसी और 60 पीएचसी पर सेवाएं दे रहे हैं। 98 डॉक्टरों के पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों के 94 स्वीकृत पदों में सिर्फ 25 कार्यरत हैं। 69 पद रिक्त हैं। वहीं स्वास्थ्य कार्यकर्ता के 137 के सापेक्ष सिर्फ 29 कार्यरत हैं, 108 पद रिक्त हैं।
इसके अलावा फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, एक्सरे टेक्नीशियन सहित अन्य पदों पर भी नियमित स्वास्थ्य कर्मचारी कम हैं। वहीं मेडिकल कॉलेज से लेकर सीएचसी, पीएचसी, जन आरोग्य मंदिर, एएनएम सेंटरों पर तैनात एक हजार से अधिक एनएचएम कर्मी हड़ताल पर हैं। इनमें डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, सीएचओ, एएनएम शामिल हैं। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को आवश्यक सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। सीएमओ डॉ. चंद्रप्रकाश ने बताया कि मरीजों की दुश्वारियां बढ़ी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलने वाली योजनाएं भी प्रभावित हो रही है। एनएचएम के 102 डॉक्टर हड़ताल पर हैं।
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मेडिकल कॉलेज में कसया क्षेत्र के सपहां नौगावां के रहने वाले आठ वर्षीय बच्चे कार्तिक जायसवाल को उसके पिता सीएचसी में उपचार नहीं होने पर मेडिकल कॉलेज में शिशु व बाल रोग विभाग में पहुंचे थे। करीब दो घंटे के इंतजार के बाद बारी आई, उन्होंने बताया कि काफी परेशानी हुई है। इसी तरह कई अन्य मरीज भी सीएचसी व पीएचसी में सुविधाएं नहीं मिलने के कारण मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे।
एनएचएम कर्मियों की हड़ताल से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं, डेटा प्रबंधन व रिपोर्टिंग नहीं हो पा रहा है, हालांकि प्रशासनिक स्तर पर हड़ताल के बावजूद बेहतर सेवाएं मुहैया कराए जाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन हालात यह है कि रविवार को जन आरोग्य मेले के आयोजन का आंकड़ा ही जारी नहीं हो पाया है।
एनएचएम संविदा कर्मियों के हड़ताल का असर जिले में संचालित 15 सीएचसी, 60 पीएचसी, 205 आरोग्य मंदिर व 400 एएनएम सेंटरों पर दिखाई दे रहा है। अधिकांश आरोग्य मंदिरों व एएनएम सेंटरों पर ताले लटके हुए हैं। इसका असर सोमवार को मेडिकल कॉलेज में भी स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई दिया। संचारी रोग विभाग से लेकर फिजियोथेरेपी तक कहीं ताला बंद मिला तो कहीं चैंबर में कुर्सी खाली मिली। हालांकि नियमित स्वास्थ्य कर्मियों की मदद से ओपीडी से लेकर हर जगह सेवाएं मुहैया कराई जा रही थी। मेडिकल कॉलेज में एनएचएम कर्मियों के नीचे दिए आंकड़े से समझ सकते हैं।
मेडिकल कॉलेज के 135 एनएचएम कर्मी भी हड़ताल पर
मेडिकल कॉलेज में तैनात 135 एनएचएम कर्मी तैनात हैं। मांगों को लेकर चल रहे हड़ताल के चलते काम प्रभावित हो रहा है। यहां तैनात एनएचएम संविदा कर्मियों के दर्ज आंकड़ों के अनुसार, 16 डॉक्टर शामिल हैं। जिसमें छह ईएमओ व चार स्पेशलिस्ट डॉक्टर सहित अन्य शामिल हैं। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों में दो हड्डी व जोड़ रोग विभाग में तो दो शिशु व बाल रोग विभाग में तैनात हैं। 31 पैरामेडिकल स्टाफ व 17 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। इसके अलावा 70 ऐसे स्वास्थ्य कर्मचारी हैं जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जुड़े हुए हैं।
हाटा में सीएचसी के 13 कर्मी हड़ताल पर
सुकरौली। सीएचसी हाटा में तैनात 13 एनएचएम कर्मी हड़ताल पर हैं। इनकी जगह पर तैनात नियमित स्वास्थ्य कर्मियों से मदद से ली जा रही है। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित कुमार ने बताया कि एनएचएम कर्मियों के हड़ताल के चलते प्रभावित होने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को अब तक चालू रखा गया है। उन्होंने बताया कि पीएचसी सुकरौली में एक महिला समेत तीन डॉक्टर ओपीडी में आ रहे मरीजों का उपचार कर रहे हैं। उपलब्ध संसाधन व स्वास्थ्य कर्मियों की मदद से बेहतर उपचार व मुफ्त में दवाएं दी जा रही हैं। संवाद
कोट:
मेडिकल कॉलेज में नियमित 12 डॉक्टर व 45 स्टाफ नर्स तैनात हैं। डॉक्टर ओपीडी व स्टाफ नर्स इमरजेंसी से लेकर हर वार्डों में सेवाएं दे रही हैं। एनएचएम संविदा कर्मियों के हड़ताल को देखते हुए लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं का लेकर निगरानी की जा रही है ताकि मरीज व तीमारदारों की परेशानी को दूर कर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराया जाए।
डॉ. दिलीप कुमार, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज कुशीनगर
फोटो है।
मरीज ने बोले
सांस लेने में परेशानी हो रही थी। रामकोला सीएचसी पर उपचार के लिए पहुंचा था, लेकिन वहां पर कुछ समय इंतजार करने के बाद कोई डॉक्टर नहीं मिले तो वहां से मेडिकल कॉलेज आया हूं। ओपीडी में डॉक्टर ने पर्ची पर जांच कराने के लिए सलाह दी है। सीएचसी पर सुविधा मिली होती तो यहां नहीं आने की जरूरत नहीं पड़ती।
सविता देवी, रामकोला
नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर बच्चे को टीका लगवाने के लिए आई हूं। कोई स्वास्थ्य कर्मचारी नहीं है। इसके चलते टीका नहीं लग पाया है। ऐसे में अब टीकाकरण के लिए दूसरे दिन ही आना पड़ेगा। विभाग को वैकल्पिक प्रबंध करना चाहिए।
सरिता देवी, बलुचहां
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सीएचसी व पीएचसी में उपचार नहीं मिलने से मेडिकल कॉलेज पहुंचे मरीज
पीएचसी, सीएचसी में नहीं मिला उपचार तो मेडिकल कॉलेज पहुंचे मरीज
पडरौना। विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के करीब एक हजार संविदाकर्मियों की वजह से स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई हैं। जनपद में कुल 247 डॉक्टरों में से 102 एनएचएम के हैं। इस वजह से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। पीएचसी व सीएचसी पर पहुंचे मरीज उपचार नहीं होने पर मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। सोमवार को मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ देखी गई। मरीजों ने बताया कि अगर सीएचसी व पीएचसी में उपचार मिला होता तो उन्हें मेडिकल कॉलेज तक नहीं आना पड़ता।
स्वास्थ्य विभाग में दर्ज आंकड़े के मुताबिक, जिले में नियमित डॉक्टरों के 264 पद स्वीकृत हैं लेकिन उनके सापेक्ष सिर्फ 166 डॉक्टर ही हैं जो 15 सीएचसी और 60 पीएचसी पर सेवाएं दे रहे हैं। 98 डॉक्टरों के पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों के 94 स्वीकृत पदों में सिर्फ 25 कार्यरत हैं। 69 पद रिक्त हैं। वहीं स्वास्थ्य कार्यकर्ता के 137 के सापेक्ष सिर्फ 29 कार्यरत हैं, 108 पद रिक्त हैं।
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इसके अलावा फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, एक्सरे टेक्नीशियन सहित अन्य पदों पर भी नियमित स्वास्थ्य कर्मचारी कम हैं। वहीं मेडिकल कॉलेज से लेकर सीएचसी, पीएचसी, जन आरोग्य मंदिर, एएनएम सेंटरों पर तैनात एक हजार से अधिक एनएचएम कर्मी हड़ताल पर हैं। इनमें डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, सीएचओ, एएनएम शामिल हैं। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को आवश्यक सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। सीएमओ डॉ. चंद्रप्रकाश ने बताया कि मरीजों की दुश्वारियां बढ़ी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलने वाली योजनाएं भी प्रभावित हो रही है। एनएचएम के 102 डॉक्टर हड़ताल पर हैं।
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मेडिकल कॉलेज में कसया क्षेत्र के सपहां नौगावां के रहने वाले आठ वर्षीय बच्चे कार्तिक जायसवाल को उसके पिता सीएचसी में उपचार नहीं होने पर मेडिकल कॉलेज में शिशु व बाल रोग विभाग में पहुंचे थे। करीब दो घंटे के इंतजार के बाद बारी आई, उन्होंने बताया कि काफी परेशानी हुई है। इसी तरह कई अन्य मरीज भी सीएचसी व पीएचसी में सुविधाएं नहीं मिलने के कारण मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे।
एनएचएम कर्मियों की हड़ताल से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं, डेटा प्रबंधन व रिपोर्टिंग नहीं हो पा रहा है, हालांकि प्रशासनिक स्तर पर हड़ताल के बावजूद बेहतर सेवाएं मुहैया कराए जाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन हालात यह है कि रविवार को जन आरोग्य मेले के आयोजन का आंकड़ा ही जारी नहीं हो पाया है।
एनएचएम संविदा कर्मियों के हड़ताल का असर जिले में संचालित 15 सीएचसी, 60 पीएचसी, 205 आरोग्य मंदिर व 400 एएनएम सेंटरों पर दिखाई दे रहा है। अधिकांश आरोग्य मंदिरों व एएनएम सेंटरों पर ताले लटके हुए हैं। इसका असर सोमवार को मेडिकल कॉलेज में भी स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई दिया। संचारी रोग विभाग से लेकर फिजियोथेरेपी तक कहीं ताला बंद मिला तो कहीं चैंबर में कुर्सी खाली मिली। हालांकि नियमित स्वास्थ्य कर्मियों की मदद से ओपीडी से लेकर हर जगह सेवाएं मुहैया कराई जा रही थी। मेडिकल कॉलेज में एनएचएम कर्मियों के नीचे दिए आंकड़े से समझ सकते हैं।
मेडिकल कॉलेज के 135 एनएचएम कर्मी भी हड़ताल पर
मेडिकल कॉलेज में तैनात 135 एनएचएम कर्मी तैनात हैं। मांगों को लेकर चल रहे हड़ताल के चलते काम प्रभावित हो रहा है। यहां तैनात एनएचएम संविदा कर्मियों के दर्ज आंकड़ों के अनुसार, 16 डॉक्टर शामिल हैं। जिसमें छह ईएमओ व चार स्पेशलिस्ट डॉक्टर सहित अन्य शामिल हैं। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों में दो हड्डी व जोड़ रोग विभाग में तो दो शिशु व बाल रोग विभाग में तैनात हैं। 31 पैरामेडिकल स्टाफ व 17 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। इसके अलावा 70 ऐसे स्वास्थ्य कर्मचारी हैं जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जुड़े हुए हैं।
हाटा में सीएचसी के 13 कर्मी हड़ताल पर
सुकरौली। सीएचसी हाटा में तैनात 13 एनएचएम कर्मी हड़ताल पर हैं। इनकी जगह पर तैनात नियमित स्वास्थ्य कर्मियों से मदद से ली जा रही है। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित कुमार ने बताया कि एनएचएम कर्मियों के हड़ताल के चलते प्रभावित होने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को अब तक चालू रखा गया है। उन्होंने बताया कि पीएचसी सुकरौली में एक महिला समेत तीन डॉक्टर ओपीडी में आ रहे मरीजों का उपचार कर रहे हैं। उपलब्ध संसाधन व स्वास्थ्य कर्मियों की मदद से बेहतर उपचार व मुफ्त में दवाएं दी जा रही हैं। संवाद
कोट:
मेडिकल कॉलेज में नियमित 12 डॉक्टर व 45 स्टाफ नर्स तैनात हैं। डॉक्टर ओपीडी व स्टाफ नर्स इमरजेंसी से लेकर हर वार्डों में सेवाएं दे रही हैं। एनएचएम संविदा कर्मियों के हड़ताल को देखते हुए लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं का लेकर निगरानी की जा रही है ताकि मरीज व तीमारदारों की परेशानी को दूर कर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराया जाए।
डॉ. दिलीप कुमार, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज कुशीनगर
फोटो है।
मरीज ने बोले
सांस लेने में परेशानी हो रही थी। रामकोला सीएचसी पर उपचार के लिए पहुंचा था, लेकिन वहां पर कुछ समय इंतजार करने के बाद कोई डॉक्टर नहीं मिले तो वहां से मेडिकल कॉलेज आया हूं। ओपीडी में डॉक्टर ने पर्ची पर जांच कराने के लिए सलाह दी है। सीएचसी पर सुविधा मिली होती तो यहां नहीं आने की जरूरत नहीं पड़ती।
सविता देवी, रामकोला
नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर बच्चे को टीका लगवाने के लिए आई हूं। कोई स्वास्थ्य कर्मचारी नहीं है। इसके चलते टीका नहीं लग पाया है। ऐसे में अब टीकाकरण के लिए दूसरे दिन ही आना पड़ेगा। विभाग को वैकल्पिक प्रबंध करना चाहिए।
सरिता देवी, बलुचहां