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नहीं आया कोई खरीदार, इंतजार करते रह गए अफसर

Mon, 03 Dec 2018 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 03 Dec 2018 11:37 PM IST
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auction not completed
suger mill - फोटो : amar ujala
पडरौना। सोमवार को फिर पडरौना चीनी मिल की नीलामी नहीं हो पाई। एसडीएम और तहसीलदार सहित राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी खरीदार का इंतजार करते रह गए और समय सीमा बीत गई।
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छह वर्षों से बंद पड़ी पडरौना चीनी मिल की नीलामी के लिए 28वीं बार तिथि मुकर्रर की गई, लेकिन नीलामी की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। हालांकि मिल की नीलामी के लिए एसडीएम सदर गुलाबचंद्र सोमवार को सुबह दस बजे से ही तहसीलदार सदर सहित विभाग के अन्य लोगों के साथ तहसील सभागार में बैठे रहे और अंतत: समय बीतने के बाद उठकर चले गए।
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पिछली बार जहां इस चीनी मिल की नीलामी के लिए 68 करोड़ 19 लाख आठ हजार सात सौ रुपये से बोली लगने वाली थी, वह मिल की संपत्ति के मूल्यांकन के बाद बढ़कर 87 करोड़ 92 लाख 97 हजार 951 रुपये तक पहुंच गई है।
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वैसे तो कुछ दिन पहले पूर्व सांसद बालेश्वर यादव के साथ कुछ लोग इस चीनी मिल का मुआयना करने आए थे, जिनकी तरफ से बोली में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन वे भी इस बोली में शामिल नहीं हुए।

सोमवार को नीलामी के दौरान एसडीएम और सदर तहसीलदार के साथ तहसील के वाकिल वाकी नवीस अमानत हुसैन, संग्रह अमीन संतोष कुमार यादव, अनुसेवक रामभजन, कानूनगो गजाधर प्रसाद और शहर के लेखपाल योगेंद्र गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद थे।

किसानों और मजदूरों के साथ हो रहा सौतेलापन
कांग्रेस के जिला मीडिया प्रभारी समशेर मल्ल ने पडरौना चीनी मिल की नीलामी न हो पाने के संबंध में कहा कि इस चीनी मिल पर किसानों और मिल मजदूरों का करोड़ों रुपये बकाया है। यदि मिल चल जाती तो किसानों और मजदूरों का भुगतान हो जाता, लेकिन केंद्र और प्रदेश की सरकार यह नहीं चाहती। इसे केवल चुनावी मुद्दा बनाकर रखा गया है।


कुशीनगर सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष गिरीशचंद्र चतुुर्वेदी ने कहा कि बार-बार नीलामी की केवल तारीखें रखी जा रही हैं, लेकिन न तो मिल चलाने का कोई ठोस प्रयास हो रहा है न मिल पर बकाया भुगतान कराने का। मजदूर और किसान अपना बकाया पाने के लिए प्रशासन की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
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