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हिरण्यवती नदी की सफाई का कार्य तेजी से चल रहा है

Tue, 12 Jun 2018 11:42 PM IST
kushinagar
kushinagar Updated Tue, 12 Jun 2018 11:42 PM IST
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Hiranyvati river will come alive in this rainy season
अमर उजाला - फोटो : अमर उजाला
कसया।बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए गंगा के समान पवित्र हिरण्यवती नदी सफाई के बाद इस बरसात में जीवंत हो जाएगी। नदी के किनारे जेटी बाबू तिराहे के निकट एक पार्क के निर्माण का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा नदी के दोनों किनारे पाथ वे बनाया जाएगा और किनारे की खाली जगह पर पौधरोपण भी होगा। नदी में पानी रोकने के लिए रामाभार पुल के पास फ्लैप गेट लगाया जाना है।
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इतिहासकारों के मुताबिक हिरण्यवती नदी के किनारे ही कुशीनारा (आज का कुशीनगर) राज्य था। पावानगर से अपने घर कपिलवस्तु जाने के लिए निकले भगवान बुद्ध ने हिरण्यती नदी के किनारे विश्राम किया था। नदी के किनारे स्थित शाल्व वन में उन्होंने शिष्य आनंद के उपदेश देने के बाद महा परिनिर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया था। 19वीं शताब्दी में कुशीनगर की खोज के साथ ही हिरण्यवती नदी के इतिहास की जानकारी हुई। भगवान बुद्ध के दर्शन करने आए श्रद्धालु हिरण्यवती नदी के दर्शन करने के साथ जल साथ ले जाते हैं। लेकिन नदी का जलस्रोत बंद होने की वजह से अब यह करीब-करीब सूख चुकी है। कुछ बरसाती पानी व कसया कस्बे के गंदे नालों का पानी ही इस नदी में दिखता है। पिछले वर्ष यहां डीएम रहे आंद्रा वामसी ने इस धार्मिक नदी को जीवंत बनाने के लिए प्रयास किया था। इसके तहत नदी की सफाई के साथ ही उसमें पानी की निरंतरता बनाए रखने की कार्ययोजना बनी। प्रथम चरण में सिल्ट सफाई व सुंदरीकरण का कार्य होना है। बीते अक्टूबर महीने में परासखांड गांव के सामने से नदी की सफाई का कार्य शुरू किया गया था। सिल्ट सफाई का काम कसया-देवरिया मार्ग स्थित रामाभार पुल तक हो चुका है। नदी के दोनों किनारों पर जेसीबी से मिट्टी डालकर पाथवे बनाने का कार्य चल रहा है। इसके अलावा बची जगह पर बरसात में पौधरोपण भी कराया जाएगा। नदी को तीन मीटर गहरा किया जा रहा है। इसके अलावा रामभार पुल पर फ्लैप गेट लगाया जाएगा जिससे कि नदी में जरूरत के अनुसार पानी रोका जा सकेगा। इसके अलावा शहर के गंदे पानी का बहाव नदी में रोका जाएगा। वर्ष 2013 में प्रख्यात गांधीवादी चिंतक डॉक्टर एसएन सुब्बा राव ने हिरण्यवती नदी की सफाई के लिए खुद फावड़ा चलाकर युवाओं को प्रेरित किया था। यह अभियान पांच दिनों तक चला था। जिसमें बौद्ध भिक्षुओं के अलावा स्थानीय लोगों ने भी हिस्सा लिया था। इसके अलावा डीएम रहे शंभू कुमार ने भी नदी सफाई कराई थी। रामाभार स्तूप के निकट नदी की गहराई बढ़ाकर पक्का घाट का निर्माण कराया गया था। नदी पर एक पुल का भी निर्माण कराया गया है।
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