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गंडक नदी का कटान रोकने के लिए शुरू हुआ प्रयास
Updated Tue, 05 Sep 2017 07:03 PM IST
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तमकुहीरोड (कुशीनगर) । अहिरौलीदान गांव के वजूद को मिटा रही गंडक नदी को रोकने के लिए अंतत: बाढ़ खंड विभाग ने कोशिश शुरू कर दी। तेजी से हो रहे कटान को रोकने के लिए अब बम्बू, कैरेट व मिट्टी से भरे बोरों को कटान स्थल पर गिराया जा रहा है, हालांकि इस कोशिश के बावजूद कचहरी टोला के सामने कटान की गति कम नहीं हुई है। सहमे लोग अपना पक्का व कच्चा घर तोड़कर पलायन कर रहे हैं।
गंडक नदी का डिस्चार्ज डेढ़ लाख क्यूसेक से कम होते ही अहिरौलीदान गांव के सामने कटान तेज हो गया था। एक पखवारे से यहां नदी गांव के वजूद को मिटा रही है। तेज कटान के कारण इस गांव के चित्तू टोला व कंचन टोला के लोग अपना घर उजाड़कर जा चुके हैं। शेष बचे डीह टोला और कचहरी टोला के सामने भी तेजी से कटान हो रहा है। यहां के निवासी दीनानाथ, हरिगोविंद, हरिश्चंद्र, जनकदेव, रामाज्ञा सिंह आदि लोग अपने पक्के मकानों को तोड़कर सामान समेत पलायन कर चुके हैं। इसके अलावा सुशील सिंह, हरिकिशुन, कन्हैया, दीपक, ध्रुव यादव, भागीरथी सिंह, रामराज, नगीना राउत आदि अपने घरों को उजाड़कर सामान दूसरी जगह भेज रहे हैं।
मंगलवार को बाढ़ खंड डिवीजन के अभियंता कटान स्थल पर पहुंचे और कटान रोकने के लिए बांस के बने विशेष उपकरण व प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी भरकर डंप कराना शुरू किया गया। अभियंताओं का तर्क है कि कटान की गति धीमी होने पर ही यहां बचाव कार्य शुरू कराया जा सकता है। परंतु गांव के लोग इस बचाव कार्य को महज कोरम पूर्ति मान रहे हैं। अहिरौलीदान के ग्राम प्रधान हीरालाल यादव, जिला पंचायत सदस्य अरविंद सिंह पटेल, जेके सिंह, धुरंधर सिंह, सिंहासन राम, उमेशराम, सुजीत यादव, हरिहर यादव, राजालाल यादव आदि का कहना है कि अगर एक पखवारा पहले यह प्रयास शुरू किया गया होता तो गांव के तमाम लोगों को अपना कच्चा व पक्का मकान नहीं तोड़ना पड़ता।
गंडक नदी का डिस्चार्ज डेढ़ लाख क्यूसेक से कम होते ही अहिरौलीदान गांव के सामने कटान तेज हो गया था। एक पखवारे से यहां नदी गांव के वजूद को मिटा रही है। तेज कटान के कारण इस गांव के चित्तू टोला व कंचन टोला के लोग अपना घर उजाड़कर जा चुके हैं। शेष बचे डीह टोला और कचहरी टोला के सामने भी तेजी से कटान हो रहा है। यहां के निवासी दीनानाथ, हरिगोविंद, हरिश्चंद्र, जनकदेव, रामाज्ञा सिंह आदि लोग अपने पक्के मकानों को तोड़कर सामान समेत पलायन कर चुके हैं। इसके अलावा सुशील सिंह, हरिकिशुन, कन्हैया, दीपक, ध्रुव यादव, भागीरथी सिंह, रामराज, नगीना राउत आदि अपने घरों को उजाड़कर सामान दूसरी जगह भेज रहे हैं।
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मंगलवार को बाढ़ खंड डिवीजन के अभियंता कटान स्थल पर पहुंचे और कटान रोकने के लिए बांस के बने विशेष उपकरण व प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी भरकर डंप कराना शुरू किया गया। अभियंताओं का तर्क है कि कटान की गति धीमी होने पर ही यहां बचाव कार्य शुरू कराया जा सकता है। परंतु गांव के लोग इस बचाव कार्य को महज कोरम पूर्ति मान रहे हैं। अहिरौलीदान के ग्राम प्रधान हीरालाल यादव, जिला पंचायत सदस्य अरविंद सिंह पटेल, जेके सिंह, धुरंधर सिंह, सिंहासन राम, उमेशराम, सुजीत यादव, हरिहर यादव, राजालाल यादव आदि का कहना है कि अगर एक पखवारा पहले यह प्रयास शुरू किया गया होता तो गांव के तमाम लोगों को अपना कच्चा व पक्का मकान नहीं तोड़ना पड़ता।
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