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बीमार बेटे को ठेले पर अस्पताल लेकर पहुंचा पिता
कौशाम्बी ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jan 2018 12:55 AM IST
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बीमार बेटे को इलाज के लिए ठेला पर लिटाकर जिला अस्पताल ले जाता पिता
- फोटो : Amar Ujala
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हैलो! मेरा बेटा बीमार है, उसे अस्पताल पहुंचाना है। एंबुलेंस की जरूरत है। यह उस पीड़ित पिता की पुकार थी जिसका बेटा बीमार था और उसे अस्पताल तक ले जाने के लिए एंबूलेंस की जरूरत थी। इमरजेंसी वाहन पहुंचने में देरी और हालत गंभीर होती देख पीड़ित पिता बेटे को ट्राली से लेकर जिला अस्पताल पहुंच गया। तीन घंटे उपचार के बाद उसे घर जाने के लिए भी एंबूलेंस नहीं मिली। मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ ने 108 के सुपरवाइजर के खिलाफ शासन को कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया है।
कौशाम्बी में स्वास्थ्य महकमें की 108 एंबूलेंस सेवा पूरी तरह से बेपटरी है। पीड़ितों को समय से यह सुविधा मुहैया नहीं कराई जाती है। जिसकी जीती जागती मिसाल शुक्रवार को देखने को मिली। मंझनपुर के गांधी नगर मोहल्ले का राम औतार शुक्रवार की दोपहर बीमार बेटे उमाशंकर को ट्राली से लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। तीन घंटे के उपचार के बाद पीड़ित पिता ने घर जाने के लिए एंबूलेस सुविधा मांगी पर उसे फिर मायूस होना पड़ा। अन्तत: बेटे को फिर वह ट्राली पर लादकर घर ले गया।
इसकी जानकारी मुख्य चिकित्साधिकारी दीपेन्द्र मालवीय को हुई तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए निजी एजेंसी के खिलाफ शासन को पत्र लिख दिया है। बताया कि सूचना के बाद भी एंबूलेस पीड़ित को नहीं मुहैया कराई गई। ऐसी शिकायतें लगातार मिलने के बाद कार्रवाई की गई है।
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सीएमओं ने सीएमएस से मांगा जवाब
टीबी पीड़ित उमाशंकर को सूचना के बाद एंबूलेंस की सुविधा अस्पताल लाने और फिर घर तक छोड़ने के लिए क्यो नहीं दी गई। इस तरह के प्रकरणों की शिकायत लगातार मिल रही थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ डॉ दीपेन्द्र मालवीय ने जिला संयुक्त अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डॉ दीपक सेठ को पत्र भेज जबाब मांगा है।
डेढ़ घंटे बाद आने के लिए चालक ने कहा
बीमार बेटे उमाशंकर को अस्पताल ले जाने के लिए पीड़ित पिता राम औतार ने एंबूलेस मुहैया कराए जाने के लिए टोलफ्री नंबर 108 पर काल किया तो उसे फौरन सुविधा का भरोसा कंट्रोल रूम से दिया गया। थोड़ी देर बाद एंबूलेंस चालक ने फोन कर के कहा कि वह डेढ़ घंटे बाद ही पहुंच सकेगा।
28 एंबूलेंस 102, 16 एंबूलेंस 108
कौशाम्बी की बीस लाख आबादी के बीच इमरजेंसी व्यवस्था के लिए 28 एंबूलेंस 102 की और 16 एंबुलेंस 108 की संचालित है। इस व्यवस्था से जरूरतमंद पूरी तरह वंचित हैं। लोगों को अस्पताल पहुंचने के लिए समय से सुविधा उपलब्ध नहीं होती है।
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कौशाम्बी में स्वास्थ्य महकमें की 108 एंबूलेंस सेवा पूरी तरह से बेपटरी है। पीड़ितों को समय से यह सुविधा मुहैया नहीं कराई जाती है। जिसकी जीती जागती मिसाल शुक्रवार को देखने को मिली। मंझनपुर के गांधी नगर मोहल्ले का राम औतार शुक्रवार की दोपहर बीमार बेटे उमाशंकर को ट्राली से लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। तीन घंटे के उपचार के बाद पीड़ित पिता ने घर जाने के लिए एंबूलेस सुविधा मांगी पर उसे फिर मायूस होना पड़ा। अन्तत: बेटे को फिर वह ट्राली पर लादकर घर ले गया।
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इसकी जानकारी मुख्य चिकित्साधिकारी दीपेन्द्र मालवीय को हुई तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए निजी एजेंसी के खिलाफ शासन को पत्र लिख दिया है। बताया कि सूचना के बाद भी एंबूलेस पीड़ित को नहीं मुहैया कराई गई। ऐसी शिकायतें लगातार मिलने के बाद कार्रवाई की गई है।
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सीएमओं ने सीएमएस से मांगा जवाब
टीबी पीड़ित उमाशंकर को सूचना के बाद एंबूलेंस की सुविधा अस्पताल लाने और फिर घर तक छोड़ने के लिए क्यो नहीं दी गई। इस तरह के प्रकरणों की शिकायत लगातार मिल रही थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ डॉ दीपेन्द्र मालवीय ने जिला संयुक्त अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डॉ दीपक सेठ को पत्र भेज जबाब मांगा है।
डेढ़ घंटे बाद आने के लिए चालक ने कहा
बीमार बेटे उमाशंकर को अस्पताल ले जाने के लिए पीड़ित पिता राम औतार ने एंबूलेस मुहैया कराए जाने के लिए टोलफ्री नंबर 108 पर काल किया तो उसे फौरन सुविधा का भरोसा कंट्रोल रूम से दिया गया। थोड़ी देर बाद एंबूलेंस चालक ने फोन कर के कहा कि वह डेढ़ घंटे बाद ही पहुंच सकेगा।
28 एंबूलेंस 102, 16 एंबूलेंस 108
कौशाम्बी की बीस लाख आबादी के बीच इमरजेंसी व्यवस्था के लिए 28 एंबूलेंस 102 की और 16 एंबुलेंस 108 की संचालित है। इस व्यवस्था से जरूरतमंद पूरी तरह वंचित हैं। लोगों को अस्पताल पहुंचने के लिए समय से सुविधा उपलब्ध नहीं होती है।