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बूंद-बूंद को तरस रही तराई
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Wed, 29 Mar 2017 12:39 AM IST
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कौशाम्बी
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गर्मी के तेवर दिखाते ही प्यास से तराई भी बेहाल हो गई। कौशाम्बी ब्लॉक में लगे 32 सौ हैंडपंप में से एक हजार हैंडपंप ठप हो गए हैं। गांव-गांव पेयजल का संकट बढ़ने लगा है। दिन ब दिन हैंडपंप पानी छोड़ने लगे हैं। गांवों में लगे आधे से ज्यादा हैंडपंप शोपीस बन गए हैं, जो चल रहे हैं, वह दस बाल्टी से ज्यादा पानी नहीं दे पा रहे हैं। प्राथमिक विद्यालयों में लगे हैंडपंप भी ठप हैं।
इससे छात्रों को दूर गांव जाकर पानी लाना पड़ता है। तराई क्षेत्र में पानी की समस्या ने लोगों को रुलाना शुरू कर दिया है। सुबह और शाम हैंडपंपों पर लोगों की लंबी लाइन लगती है। एक मोहल्ले के लोग दूसरे मोहल्ले जाकर पानी भरने को मजबूर हैं। कई गांवों में तो लोग निजी नलकूप से पानी भर रहे हैं। अभी तापमान चढ़ रहा है तो यह हाल है, भीषण गर्मी में क्या स्थिति होगी, इसको लेकर ग्रामीण सशंकित हैं। अधिकारी इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं।
कौशाम्बी ब्लॉक में जल निगम के जेई राजीव कुमार की तैनाती हैं। क्षेत्र के ग्राम प्रधानों का कहना है कि जल निगम के जेई ब्लॉक आते ही नहीं, जिला मुख्यालय में ही बैठकर वह अपना काम निपटा रहे हैं। अब तक दो सौ से ज्यादा हैंडपंपों को रिबोर कराने की सूची ब्लॉक कार्यालय में ग्राम प्रधान दे चुके हैं। इसमें अभी और इजाफा होगा। इस सूची में वह हैंडपंप नहीं शामिल हैं, जो जिला मुख्यालय को पहले ही भेजी जा चुकी है।
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इससे छात्रों को दूर गांव जाकर पानी लाना पड़ता है। तराई क्षेत्र में पानी की समस्या ने लोगों को रुलाना शुरू कर दिया है। सुबह और शाम हैंडपंपों पर लोगों की लंबी लाइन लगती है। एक मोहल्ले के लोग दूसरे मोहल्ले जाकर पानी भरने को मजबूर हैं। कई गांवों में तो लोग निजी नलकूप से पानी भर रहे हैं। अभी तापमान चढ़ रहा है तो यह हाल है, भीषण गर्मी में क्या स्थिति होगी, इसको लेकर ग्रामीण सशंकित हैं। अधिकारी इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं।
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कौशाम्बी ब्लॉक में जल निगम के जेई राजीव कुमार की तैनाती हैं। क्षेत्र के ग्राम प्रधानों का कहना है कि जल निगम के जेई ब्लॉक आते ही नहीं, जिला मुख्यालय में ही बैठकर वह अपना काम निपटा रहे हैं। अब तक दो सौ से ज्यादा हैंडपंपों को रिबोर कराने की सूची ब्लॉक कार्यालय में ग्राम प्रधान दे चुके हैं। इसमें अभी और इजाफा होगा। इस सूची में वह हैंडपंप नहीं शामिल हैं, जो जिला मुख्यालय को पहले ही भेजी जा चुकी है।
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