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Kaushambi News: हद है...दिव्यांगों को लगवा रहे कार्यालय के चक्कर
Sat, 29 Nov 2025 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 29 Nov 2025 01:00 AM IST
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नेवादा के सरवरपुर निवासी हर्षदेव यादव। संवाद
जिले में यूनिक डिसेबिलिटी आइडेंटिफिकेशन (यूडीआईडी) कार्ड बनवाने की प्रक्रिया दिव्यांगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। कार्ड न मिलने से बैटरी साइकिल, पेंशन, ट्राईसिकल, और दिव्यांग पेंशन सहित कई सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। ऐसे में कार्ड के लिए हर महीने हजारों लोग आवेदन के लिए सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
दिव्यांगों ने बताया कि कार्ड बनाने की धीमी गति, तकनीकी त्रुटि, फाइलों की बार-बार जांच और कैंप में निर्धारित समय पर पहुंच न पाने से वे महीनों से परेशान हैं। कई लोग किराये पर ई-रिक्शा लेकर आते हैं तो कई अपने परिजनों के सहारे कार्यालय पहुंचते हैं, मगर समाधान नहीं मिलता।
उन्होंने बताया कि ई-रिक्शा उन्हें मेन रोड पर ही छोड़ देती है। मेन रोड से कार्यालय तक की दूरी लगभग 500 मीटर है, जिससे उन्हें कार्यालय आने और जाने में परेशानी होती है।
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नेवादा के सरवरपुर निवासी हर्षदेव यादव शुक्रवार को यूडीआईडी कार्ड बनवाने के लिए सीएमओ कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि बैटरी वाली साइकिल की जरूरत है। पत्नी रेनू देवी भी दिव्यांग है। उनको कैंप में बुलाया गया था लेकिन वह वहां नहीं जा पाए। शुक्रवार को आवेदन के लिए कार्यालय आए हैं।
करारी के चमनगंज निवासी गजनफर हैदर को चलने और बोलने में परेशानी है। उन्होंने बताया कि उम्मीद थी कि बार-बार चक्कर लगाए यूडीआईडी कार्ड बन जाएगा लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। पहले कैंप और अब कार्यालय आना पड़ रहा है। वे तीसरी बार आए हैं। इस संबंध में विभाग का कहना है कि हमारे पास मात्र 20 से 30 आवेदन ही पेंडिंग हैं।
यूडीआईडी कार्ड के लिए किसी को परेशान नहीं किया जाता। कभी-कभी सर्वर में समस्या या आवेदन में कमी के कारण लोगों को कई बार दोबारा आना पड़ सकता है। आवेदन करने के बाद पत्र निरस्त न होने पाए, इसलिए बेहतर है कि दोबारा बुला लिया जाए। जिनके आवेदन लंबित हैं, उनकी दिव्यांगता कम है। ऐसे में वह नहीं आ रहे हैं। - डॉ. संजय कुमार, सीएमओ
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दिव्यांगों ने बताया कि कार्ड बनाने की धीमी गति, तकनीकी त्रुटि, फाइलों की बार-बार जांच और कैंप में निर्धारित समय पर पहुंच न पाने से वे महीनों से परेशान हैं। कई लोग किराये पर ई-रिक्शा लेकर आते हैं तो कई अपने परिजनों के सहारे कार्यालय पहुंचते हैं, मगर समाधान नहीं मिलता।
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उन्होंने बताया कि ई-रिक्शा उन्हें मेन रोड पर ही छोड़ देती है। मेन रोड से कार्यालय तक की दूरी लगभग 500 मीटर है, जिससे उन्हें कार्यालय आने और जाने में परेशानी होती है।
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नेवादा के सरवरपुर निवासी हर्षदेव यादव शुक्रवार को यूडीआईडी कार्ड बनवाने के लिए सीएमओ कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि बैटरी वाली साइकिल की जरूरत है। पत्नी रेनू देवी भी दिव्यांग है। उनको कैंप में बुलाया गया था लेकिन वह वहां नहीं जा पाए। शुक्रवार को आवेदन के लिए कार्यालय आए हैं।
करारी के चमनगंज निवासी गजनफर हैदर को चलने और बोलने में परेशानी है। उन्होंने बताया कि उम्मीद थी कि बार-बार चक्कर लगाए यूडीआईडी कार्ड बन जाएगा लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। पहले कैंप और अब कार्यालय आना पड़ रहा है। वे तीसरी बार आए हैं। इस संबंध में विभाग का कहना है कि हमारे पास मात्र 20 से 30 आवेदन ही पेंडिंग हैं।
यूडीआईडी कार्ड के लिए किसी को परेशान नहीं किया जाता। कभी-कभी सर्वर में समस्या या आवेदन में कमी के कारण लोगों को कई बार दोबारा आना पड़ सकता है। आवेदन करने के बाद पत्र निरस्त न होने पाए, इसलिए बेहतर है कि दोबारा बुला लिया जाए। जिनके आवेदन लंबित हैं, उनकी दिव्यांगता कम है। ऐसे में वह नहीं आ रहे हैं। - डॉ. संजय कुमार, सीएमओ

नेवादा के सरवरपुर निवासी हर्षदेव यादव। संवाद