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Kaushambi News: डॉक्टर ही नहीं, कैसे हो मोतियाबिंद के मरीजों का इलाज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 16 Nov 2025 10:55 PM IST
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There are no doctors, how should cataract patients be treated?
सर्दी के साथ मोतियाबिंद पीड़ित मरीज जांच और इलाज के लिए भटक रहे हैं। जिले के 30 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की तैनाती नहीं होने के कारण मोतियाबिंद के मरीजों का ऑपरेशन नहीं हो रहा है। निजी अस्पताल या फिर पड़ोसी जनपद का चक्कर लगाना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक हैं लेकिन आंखों की रोशनी के साथ लेंस का पावर बताने वाली स्लिट लैंप मशीन खराब है।
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मेडिकल कॉलेज को छोड़ जिले के किसी भी सीएचसी पर नेत्र चिकित्सकों की तैनाती नहीं है। जिस कारण डॉक्टर ऑपरेशन करने से हाथ खड़े कर रहे हैं। मजबूरन, मरीजों को प्रयागराज या फिर अमेठी का चक्कर काटना पड़ रहा है।
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अफसर बने नेत्र सर्जन, मरीज हो रहे परेशान
सीएमओ कार्यालय में दो नेत्र सर्जन हैं। दोनों नेत्र सर्जन डिप्टी सीएमओ पद पर तैनात हैं। जिस कारण वह अन्य विभागीय कार्यों में लगे रहते हैं। लालगंज, पट्टी, कुंडा और रानीगंज तहसील क्षेत्र के सैकड़ों मोतियाबिंद मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
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मोतियाबिंद से पीड़ित हूं। ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। प्राइवेट अस्पताल संचालक 25 हजार से अधिक रुपये मांग रहे हैं।
सुरेंद्र सिंह, भीलमपुर।
मेडिकल कॉलेज में जांच मशीन खराब है। मोतियाबिंद के मरीजों का ऑपरेशन नहीं हो रहा है। ऑपरेशन के लिए प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ेगा।
रमेश चंद्र जायसवाल, चिलबिला
सीएमओ कार्यालय में कामकाज करने वाले दोनों नेत्र सर्जन की ड्यूटी रोस्टरवार सीएचसी में लगाई जाएगी। कैंप लगाकर मरीजों की आंखों की जांच और ऑपरेशन किया जाएगा।
डॉ. एएन प्रसाद, सीएमओ।
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