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Kaushambi News: एक साल में ही खराब हो गई अल्ट्रासाउंड मशीन

Sat, 27 Sep 2025 08:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Sat, 27 Sep 2025 08:59 PM IST
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The ultrasound machine broke down within a year
सीएचसी कौशाम्बी में रखी अल्ट्रासाउंड मशीन।     संवाद
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कौशाम्बी में रेडियोलॉजिस्ट और टेक्नीशियन की कमी के चलते एक साल पहले लगाई गई अल्ट्रासाउंड मशीन बेकार पड़ी है इससे मरीजों, खासकर गर्भवती महिलाओं को परेशानी हो रही है। ऐसे में उन्हें निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि सीएचसी में डॉक्टरों की भी कमी है। आंख, हड्डी और रेडियोलॉजिस्ट के पद खाली होने से मरीजों को बार-बार निराश होना पड़ता है। कौशाम्बी ब्लॉक की तीन लाख आबादी को स्वास्थ्य सुविधा देने वाले इस 30 बेड के अस्पताल में रोजाना 200 से 220 नए और 50 से 60 पुराने मरीज पहुंचते हैं।
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इनमें से लगभग 15 से 20 गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की जरूरत होती है। हालांकि, विभाग ने प्रसव ऑपरेशन की सुविधा के लिए नई मशीन उपलब्ध कराई थी, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से यह उपयोग में नहीं रही। नतीजतन, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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वहीं पेट, लिवर और किडनी संबंधी बीमारियों के मरीज जांच के लिए मजबूरन 30 किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज या निजी केंद्रों का रुख कर रहे हैं। बेरौंचा के राम आसरे, सीताराम, गुरौली के शिवशंकर और नथन लाल ने कहा कि सरकार भले ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा करे लेकिन अल्ट्रासाउंड, आंख और हड्डी के डॉक्टर न होने से मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ रहा है।
बिजली की समस्या से जूझ रहा अस्पताल

सीएचसी में बिजली का भी संकट है। रोस्टर के मुताबिक दोपहर 12:30 बजे तक बिजली आपूर्ति रहती है। इसके बाद 2:30 बजे तक कटौती कर दी जाती है। वहीं लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या आम है। अस्पताल में लगा 15 केवीए का पुराना जनरेटर अब लोड नहीं उठा पा रहा। सीएचसी प्रभारी मुक्तेश द्विवेदी ने बताया कि अस्पताल के कोल्ड चैन रूम में पांच बड़े फ्रीजर हैं जिनमें वैक्सीन और जीवनरक्षक दवाएं रखी जाती हैं। हर दवा के लिए अलग तापमान जरूरी होता है। साथ ही एक्सरे मशीन भी लगातार चलती है। बिजली आपूर्ति समय पर न मिलने से कभी-कभी बर्फ की सिल्ली मंगा कर काम चलाना पड़ता है।


एक साल पहले रेडियोलॉजिस्ट की डॉ.विवेक केसरवानी की तैनाती की गई थी लेकिन बाद में उन्हें मेडिकल कॉलेज में संबद्ध कर दिया गया। करीब आठ महीने पहले सरकार ने उन्हें प्रशिक्षण के लिए भेज दिया है। प्रशिक्षण से कब लौटेंगे, यह स्पष्ट नहीं है।- मुक्तेश द्विवेदी, सीएचसी अधीक्षक
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