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Kaushambi News: 19 दिन पहले ही साफ हो गई थी चुनाव परिणामों की स्थिति
Thu, 06 Jun 2024 04:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Thu, 06 Jun 2024 04:30 AM IST
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मंझनपुर। लोकसभा चुनाव के परिणाम भले ही मतदान के 15 दिन बाद आया हो, लेकिन इसके परिणाम की स्थिति मतदान के चार दिन पहले ही साफ हो गई थी। मुख्यमंत्री योगी और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेख सभाओं में जुटी भीड़ उसके उत्साह की झलक बता रही थी कि चुनाव परिणाम क्या होगा। चार जून को परिणाम भी ऐसे ही आए।
भाजपा ने इस बार दो बार से लगातार सांसद विनोद सोनकर पर फिर दांव लगाया तो सपा ने पूर्व मंत्री व मौजूदा विधायक इंद्रजीत सरोज के बेटे पुष्पेंद्र सरोज को मैदान में उतारा। विनोद सोनकर के पक्ष में जमीन तैयार करने को भाजपा ने मंत्रियों की सभाओं की झड़ी ही लगा दी थी। वहीं, सपा की ओर से पूरे चुनाव की बागडोर पूर्व मंत्री व विधायक इंद्रजीत सरोज ने संभाल रखी थी। 16 मई को भाजपा ने मंझनपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा ने नियामतपुर में पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की जनसभाएं हुईं। दोनों ही दलों ने सभाओं में भीड़ जुटाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। बावजूद इसके वैसा जनसैलाब योगी की सभा में नहीं दिखा जैसा अखिलेश यादव के मंच के सामने मौजूद रहा। यही नहीं नियामतपुर में अखिलेश यादव को सुनने के लिए आए लोगों में सबसे अधिक संख्या युवाओं व किसानों की रही। तपती धूप में भीड़ के बीच जहां चंद मिनट खड़ा होना भी मुश्किल था, वहीं लोग चार-चार घंटे बिना हिले-डुले सपा मुखिया की राह देखते रहे। जिसने भी दोनों सभाओं के नजारे देखे थे वही परिणामों के कयास लगाने लगा था। लोग यहां तक कहने लगे थे कि भाजपा की राह आसान नहीं है। अंत में चार जून को जब परिणाम आए तो सपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सरोज की जीत के साथ उन कयासों पर विराम लग गया।
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भाजपा ने इस बार दो बार से लगातार सांसद विनोद सोनकर पर फिर दांव लगाया तो सपा ने पूर्व मंत्री व मौजूदा विधायक इंद्रजीत सरोज के बेटे पुष्पेंद्र सरोज को मैदान में उतारा। विनोद सोनकर के पक्ष में जमीन तैयार करने को भाजपा ने मंत्रियों की सभाओं की झड़ी ही लगा दी थी। वहीं, सपा की ओर से पूरे चुनाव की बागडोर पूर्व मंत्री व विधायक इंद्रजीत सरोज ने संभाल रखी थी। 16 मई को भाजपा ने मंझनपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा ने नियामतपुर में पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की जनसभाएं हुईं। दोनों ही दलों ने सभाओं में भीड़ जुटाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। बावजूद इसके वैसा जनसैलाब योगी की सभा में नहीं दिखा जैसा अखिलेश यादव के मंच के सामने मौजूद रहा। यही नहीं नियामतपुर में अखिलेश यादव को सुनने के लिए आए लोगों में सबसे अधिक संख्या युवाओं व किसानों की रही। तपती धूप में भीड़ के बीच जहां चंद मिनट खड़ा होना भी मुश्किल था, वहीं लोग चार-चार घंटे बिना हिले-डुले सपा मुखिया की राह देखते रहे। जिसने भी दोनों सभाओं के नजारे देखे थे वही परिणामों के कयास लगाने लगा था। लोग यहां तक कहने लगे थे कि भाजपा की राह आसान नहीं है। अंत में चार जून को जब परिणाम आए तो सपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सरोज की जीत के साथ उन कयासों पर विराम लग गया।
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