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Kaushambi News: डेढ़ शताब्दी बाद खत्म हो जाएगा आईपीसी का राज, तैयारी में जुटी पुलिस
Sat, 22 Jun 2024 04:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 22 Jun 2024 04:41 AM IST
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तकरीबन डेढ़ शताब्दी बाद 30 जून को पुलिस महकमे से भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) का काम खत्म हो जाएगा। पहली जुलाई से इसके बाद थानों में सभी मुकदमे भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत दर्ज होंगे। इसे लेकर पुलिस अफसरों से लेकर थानों में तैनात मुंशी नई धाराओं को रट रहे हैं। वहीं, प्रशिक्षण के जरिये भी पुलिसकर्मियों को नई न्याय संहिता से वाकिफ कराया जा रहा है। तीन दिन पहले भी ऐसा ही एक प्रशिक्षण शिविर पुलिस लाइन में हुआ।
छह अक्तूबर 1860 में पारित भारतीय दंड संहिता के तहत देश की कानून-व्यवस्था संचालित हो रही है। 164 साल से थानों में इसका राज होने से तमाम धाराएं पुलिसकर्मियों को रट चुकी हैं। कुछ धाराओं का तो बोलचाल की भाषा में आम आदमी भी इस्तेमाल करते हैं।
मसलन, आईपीसी में हत्या के आरोप में इस्तेमाल होने वाली 302, धोखाधड़ी में 420, दुष्कर्म में 376 सरीखी धाराओं से सामान्य व्यक्ति भी वाकिफ है। अब ये धाराएं बदल जाएंगी। इतना ही नहीं दंड दिलाने की प्रक्रिया में भी बदलाव हो जाएगा।
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एक जुलाई से जनपद के सभी थानों में भारतीय न्याय संहिता के तहत मुकदमे दर्ज होंगे। जनपद के सभी थानों के पुलिसकर्मियों को इसके लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। अधिकारियों के लिए अलग से कोर्स चलाए जा रहे हैं। थानों का कामकाज संभालने वाले मुंशी भी इन नई धाराओं को रटने में जुटे हैं।
बुधवार को पुलिस लाइन स्थित सभागार में उप निदेशक मोहन यादव व गैंगस्टर एक्ट के लोक अभियोजक दिनेश कुमार केसरवानी ने नए कानून के बारे में पुलिस कर्मियों को जानकारी दी। संवाद
भारतीय न्याय संहिता को एक जुलाई से लागू किया जाना है। इसके लिए तैयारियां की जा रहीं हैं। नियमित तौर पर कभी ऑफलाइन तो कभी ऑनलाइन पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। साइबर अपराध समेत कई मामलों को नई न्याय संहिता में जगह दी गई है। इससे अपराध पर अंकुश लगाने में काफी मदद मिलेगी।
बृजेश कुमार श्रीवास्तव,एसपी
बदल जाएंगी ये धाराएं
अपराध आईपीसी की धारा भारतीय न्याय संहिता की धारा
हत्या 302 101
धोखाधड़ी 420 316
हत्या के प्रयास 307 109
दुष्कर्म 376 63
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भारतीय न्याय संहिता के तहत ये होंगे प्रमुख बदलाव
-- भारतीय न्याय संहिता में संगठित अपराध (धारा 111) के तहत 17 मामले शामिल किए गए हैं। इसमें अपहरण, डकैती, वाहन चोरी, जबरदस्ती वसूली, भूमि हथियाना, आर्थिक अपराध, साइबर अपराध, अनुबंध हत्या, क्रिप्टोकरेंसी, नकली नोट को शामिल किया गया।
-- संज्ञेय अपराध के लिए किसी भी पुलिस स्टेशन में जीरो एफआईआर दर्ज की जा सकेगी।
-- दुष्कर्म पीड़िता की मेडिकल जांच रिपोर्ट सात दिन में जांच अधिकारी को भेजनी होगी।
-- दुष्कर्म सहित संज्ञेय अपराध की अब ऑनलाइन रिपोर्ट भी दर्ज कराई जा सकेगी।
-- पीड़ित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिए बिना मुकदमा वापस नहीं लिया जा सकेगा।
-- पुलिस रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज की प्रति 14 दिन के अंदर आरोपी और पीड़ित को नि:शुल्क दी जाएगी।
-- मॉब लिचिंग में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को मृत्युदंड अथवा उम्रकैद से दंडित किया जा सकता है। पांच से अधिक व्यक्तियों के हमला करने पर यह धारा लागू होगी।
-- साइबर क्राइम में शामिल अपराधी अथवा उनके सहयोगियों पर मुत्युदंड की सजा समेत कम से कम 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
-- अगर आरोपी 90 दिनों के भीतर कोर्ट के सामने पेश नहीं होता है तो उसकी गैर मौजूदगी में भी ट्रायल चलता रहेगा।
-- व्यक्ति के गिरफ्तार होने पर उसके परिवार को निश्चित तौर पर सूचना देनी होगी।
-- किसी भी केस में 90 दिनों से क्या हुआ, इसकी जानकारी पुलिस पीड़ित परिवार को देगी।
-- नाबालिग से दुष्कर्म पर आजीवन कारावास एवं मौत की सजा का प्रावधान किया गया है।
-- सामूहिक दुष्कर्म के दोषी को बीस साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
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छह अक्तूबर 1860 में पारित भारतीय दंड संहिता के तहत देश की कानून-व्यवस्था संचालित हो रही है। 164 साल से थानों में इसका राज होने से तमाम धाराएं पुलिसकर्मियों को रट चुकी हैं। कुछ धाराओं का तो बोलचाल की भाषा में आम आदमी भी इस्तेमाल करते हैं।
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मसलन, आईपीसी में हत्या के आरोप में इस्तेमाल होने वाली 302, धोखाधड़ी में 420, दुष्कर्म में 376 सरीखी धाराओं से सामान्य व्यक्ति भी वाकिफ है। अब ये धाराएं बदल जाएंगी। इतना ही नहीं दंड दिलाने की प्रक्रिया में भी बदलाव हो जाएगा।
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एक जुलाई से जनपद के सभी थानों में भारतीय न्याय संहिता के तहत मुकदमे दर्ज होंगे। जनपद के सभी थानों के पुलिसकर्मियों को इसके लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। अधिकारियों के लिए अलग से कोर्स चलाए जा रहे हैं। थानों का कामकाज संभालने वाले मुंशी भी इन नई धाराओं को रटने में जुटे हैं।
बुधवार को पुलिस लाइन स्थित सभागार में उप निदेशक मोहन यादव व गैंगस्टर एक्ट के लोक अभियोजक दिनेश कुमार केसरवानी ने नए कानून के बारे में पुलिस कर्मियों को जानकारी दी। संवाद
भारतीय न्याय संहिता को एक जुलाई से लागू किया जाना है। इसके लिए तैयारियां की जा रहीं हैं। नियमित तौर पर कभी ऑफलाइन तो कभी ऑनलाइन पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। साइबर अपराध समेत कई मामलों को नई न्याय संहिता में जगह दी गई है। इससे अपराध पर अंकुश लगाने में काफी मदद मिलेगी।
बृजेश कुमार श्रीवास्तव,एसपी
बदल जाएंगी ये धाराएं
अपराध आईपीसी की धारा भारतीय न्याय संहिता की धारा
हत्या 302 101
धोखाधड़ी 420 316
हत्या के प्रयास 307 109
दुष्कर्म 376 63
भारतीय न्याय संहिता के तहत ये होंगे प्रमुख बदलाव