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गेहूं के सीजन में ही तीन गुना हो गया भूसा का दाम
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करारी। भूसे के दाम आसमान छूने से पशुपालक परेशान हैं। तीन सप्ताह के भीतर भूसे के दामों में करीब तीन गुना की बढ़ोतरी हुई है। गेहूं की फसल कटाई अप्रैल के पहले सप्ताह में शुरू हुई थी। उस समय किसानों ने भूसा क्विंटल के हिसाब से बेचा। शुरूआती दौर में पशुपालकों ने लगभग 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भूसा खरीदा। इसके बाद किसान बोझ यानी गट्ठर के हिसाब से भूसा बेचने लगे। मई लगते ही भूसे के दाम आसमान छूने लगे हैं।
अधिकांश किसानों ने गेहूं की कटाई पूरी कर ली है। कुछ किसान अभी भी कटाई में जुटे हैं। भूसे का साल भर का स्टॉक रखना पशुपालकों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। क्योंकि, अधिकतर किसानों से ठेकेदारों ने भूसा खरीदकर स्टॉक कर लिया है। ठेकेदारों की मिलीभगत से रोजाना भूसे के दाम बढ़ोतरी हो रही है। बताते चलें कि भूसा हमेशा क्विंटल या फिर कुतवा ( अंदाजा) बिकता था। इस बार भूसा अप्रैल में 40 रुपये प्रति बोझ (गट्ठर) से शुरू हुआ था। मंगलवार को सौ से 120 रुपए बोझ की दर से भूसा बेचा गया। हालत ये हो गए कि अब भूसा मिल ही नही रहा है। किसान लक्ष्मी नारायण मिश्र का कहना है कि जब अभी भूसा का ये हाल है तो दिसंबर-जनवरी में क्या होगा।
क्षेत्र में घूम रहे दर्जनों ठेकेदार
करारी। क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक भूसा ठेकेदार हैं। कई ठेकेदार जिले से बाहर ले जाकर भूसा डंप कर रहे है। ठेकेदारों द्वारा दाम बढ़ाने से पशुपालकों को ऊंचे दामों पर भूसा खरीदने के लिए विवश होना पड़ रहा है। मंगलवार को सौ रुपए बोझ के हिसाब से ठेकेदारों द्वारा भूसा खरीदा गया।
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पांच से सात किलो तक भूसा खाता है एक जानवर
करारी। एक स्वस्थ जानवर एक दिन में (दोनों वक्त) 5 से 7 किलो तक भूसा खा जाता है। किसान मो. सिप्तैन रिजवी का कहना है कि भूसे पर महंगाई इस बार ज्यादा है। क्षेत्र में गेंहू का भूसा मिल ही नही रहा है। इसका मुख्य कारण ठेकेदारों द्वारा भारी मात्रा में भूसा खरीदकर डंप करने का माना जा रहा है।
भूसे की कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ठेकेदारों द्वारा अनावश्यक स्टॉक कर पशुपालकों का आर्थिक शोषण की शिकायत मिली तो उनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रखर उत्तम-एसडीएम, सदर
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अधिकांश किसानों ने गेहूं की कटाई पूरी कर ली है। कुछ किसान अभी भी कटाई में जुटे हैं। भूसे का साल भर का स्टॉक रखना पशुपालकों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। क्योंकि, अधिकतर किसानों से ठेकेदारों ने भूसा खरीदकर स्टॉक कर लिया है। ठेकेदारों की मिलीभगत से रोजाना भूसे के दाम बढ़ोतरी हो रही है। बताते चलें कि भूसा हमेशा क्विंटल या फिर कुतवा ( अंदाजा) बिकता था। इस बार भूसा अप्रैल में 40 रुपये प्रति बोझ (गट्ठर) से शुरू हुआ था। मंगलवार को सौ से 120 रुपए बोझ की दर से भूसा बेचा गया। हालत ये हो गए कि अब भूसा मिल ही नही रहा है। किसान लक्ष्मी नारायण मिश्र का कहना है कि जब अभी भूसा का ये हाल है तो दिसंबर-जनवरी में क्या होगा।
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क्षेत्र में घूम रहे दर्जनों ठेकेदार
करारी। क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक भूसा ठेकेदार हैं। कई ठेकेदार जिले से बाहर ले जाकर भूसा डंप कर रहे है। ठेकेदारों द्वारा दाम बढ़ाने से पशुपालकों को ऊंचे दामों पर भूसा खरीदने के लिए विवश होना पड़ रहा है। मंगलवार को सौ रुपए बोझ के हिसाब से ठेकेदारों द्वारा भूसा खरीदा गया।
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पांच से सात किलो तक भूसा खाता है एक जानवर
करारी। एक स्वस्थ जानवर एक दिन में (दोनों वक्त) 5 से 7 किलो तक भूसा खा जाता है। किसान मो. सिप्तैन रिजवी का कहना है कि भूसे पर महंगाई इस बार ज्यादा है। क्षेत्र में गेंहू का भूसा मिल ही नही रहा है। इसका मुख्य कारण ठेकेदारों द्वारा भारी मात्रा में भूसा खरीदकर डंप करने का माना जा रहा है।
भूसे की कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ठेकेदारों द्वारा अनावश्यक स्टॉक कर पशुपालकों का आर्थिक शोषण की शिकायत मिली तो उनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रखर उत्तम-एसडीएम, सदर