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Kaushambi News: किसानों का दर्द... जिस खाद की जरूरत, उसी का रहता टोटा

Wed, 10 Sep 2025 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Wed, 10 Sep 2025 01:16 AM IST
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The pain of farmers... the fertilizer which is needed is always in short supply
हरिशंकर सिंह, किसान
जिले के किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। धान की अगेती फसल की कटाई शुरू होने को है और अगेती आलू की बुवाई का समय भी करीब आ गया है। हालांकि सहकारी समितियों से डीएपी नदारद है। जिले की 64 समितियों पर किसान डीएपी के लिए पहुंचते हैं और खाली हाथ लौट जाते हैं। आलू की बुवाई में देरी होने पर आगे गेहूं की फसल भी प्रभावित होगी।
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जिले में 64 सहकारी समितियां हैं। इन समितियों में यूरिया तो है लेकिन डीएपी नहीं है। किसानों का आरोप है कि अभी तक यूरिया की मांग थी तो समिति से डीएपी मिल रही थी। अब डीएपी की मांग है तो यूरिया मिल रही है। कहा कि उन्हें कभी जरूरत के अनुसार समय से डीएपी और यूरिया नहीं मिलती है।
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जिला कृषि अधिकारी सुरुचि विश्वकर्मा का कहना है कि अगले 10 दिनों में समितियों तक डीएपी पहुंच जाएगी। वहीं एआर कोऑपरेटिव मोहसिन जमीन ने कहा कि स्टॉक में पर्याप्त डीएपी है। यह जल्द ही किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी।
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किसान पप्पू मिश्रा, राजेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह, गोपाल आदि ने बताया कि खाद को विभाग ने संरक्षित बना दिया है। यह मिलती ही नहीं है। पहले यूरिया और अब डीएपी के लिए समिति के चक्कर लगा रहे हैं। कहा कि धान की कटाई के बाद वह आलू की फसल लगाते हैं। उसके बाद गेहूं की बुवाई होती है।
डीएपी की कमी से तीनों फसलें प्रभावित हो सकती हैं। स्थिति यह है कि कई किसानों ने तो डीएपी के घटक अलग से खरीदकर डीएपी बनाने की तैयारी की है। कहा कि जिले की अर्थव्यवस्था खेती पर आधारित है। खेती खाद पर टिकी है। किसान डीएपी के लिए सरकार और विभाग की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं। बुवाई में देरी से उत्पादन पर असर पड़ेगा।


हम समितियों के चक्कर लगा-लगाकर थक गए लेकिन डीएपी नहीं मिली। आलू की बुवाई में देर हुई तो भारी नुकसान होगा। अभी से डीएपी मिल जाती तो बुवाई के दौरान समिति के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।
- भीम पाल, किसान

धान कटाई के बाद आलू बोना जरूरी है लेकिन खाद नहीं मिल रही है। अगर समय पर खाद की आपूर्ति नहीं हुई तो गेहूं की फसल पर भी असर पड़ेगा।
- हरिशंकर सिंह, किसान

हरिशंकर सिंह, किसान

हरिशंकर सिंह, किसान

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