फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   The number of domesticated animals has decreased by 2,91,500 in five years, affecting milk production.

Kaushambi News: पांच साल में पालतू पशुओं की संख्या में आई 2,91,500 की कमी, दूध उत्पादन पर असर

Wed, 10 Dec 2025 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Wed, 10 Dec 2025 01:44 AM IST
विज्ञापन
The number of domesticated animals has decreased by 2,91,500 in five years, affecting milk production.
पशुपालन विभाग की तरफ से जिले में कराई गई 21वीं पशु गणना के अनुसार बीते पांच सालों में घरों की संख्या तो बढ़ गई है, लेकिन पालतू पशुओं की संख्या में 2,91,500 की कमी आई है। दुधारू पशु जैसे गाय, भैंस और बकरियों की संख्या कम होने से दूध उत्पादन पर असर पड़ा है। वहीं, दूसरी ओर भेड़, टट्टू, ऊंट और हाथी की संख्या में इजाफा हुआ है।
विज्ञापन


जिले में पांच साल पहले वर्ष 2019 में हुई 20वीं पशु गणना में 2,98,089 घरों का सर्वे किया गया था। तब किसानों व पशुपालकों के पास 9,38,813 पालतू पशु मिले थे। बीते वित्तीय वर्ष में 21वीं पशु गणना में पशुओं की संख्या घटकर 6,47,313 रह गई है, जबकि घरों की संख्या में 39,467 का इजाफा हुआ है।
विज्ञापन


इस बार जिले में 3,37,556 घरों में पशुओं की गणना की गई है। पांच साल पहले जिले में भैंसों की संख्या 3,63,284 थी, जो अब 1,62,721 कम होकर 2,00563 रह गई हैं। पांच वर्ष पूर्व गायों की संख्या 1,75,801 थी, जो अब 1,00156 कम होकर 75,645 रह गई है। इस तरह जिले में पालतू मवेशियों की संख्या में कमी पाई गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सबसे ज्यादा असर गायों और भैंसों की संख्या पर पड़ा है। वहीं, 21वीं पशु गणना में भेड़ों की संख्या में इजाफा हुआ है। वर्ष 2019 की पशु गणना में जिले में भेड़ों की संख्या 20,375 थी। इस बार इनकी संख्या 14,534 बढ़कर 34,909 हो गई है। वहीं, बकरियों की संख्या में गिरावट आई है। पांच वर्ष पहले जिले में बकरियों की संख्या 3,11,944 थी, जो अब कम होकर 2,22,288 रह गई है। वहीं, भार ढोने वाले टट्टू की संख्या 23 से 86 हो गई है।

इसी तरह खच्चर, ऊंट और हाथी की संख्या पांच साल पहले शून्य थी, अब इनकी संख्या क्रमशः 60, 19 और एक है। मुर्गी, बतख पालन में भी लोगों की रुचि बढ़ी है। पिछले पशु गणना के मुताबिक, मुर्गी और बतख की संख्या 48,027 थी, जो अब 1,07, 650 हो गई है। पिछले साल दिसंबर से जिले में 21वीं पशुगणना शुरू की गई, जिसे इस साल अप्रैल में पूरा कर लिया गया है। इस कार्य में पशुपालन विभाग की ओर से एक नोडल अधिकारी सहित 14 सुपरवाइजर और 113 पशु गणनाकारों की तैनाती की गई थी।


----------------------------

मवेशी पांच वर्ष पहले (संख्या) अब

गाय 1,75,801 75,645

भैंस 3,63,284 2,00,563

भेड़ 20,375 34,909

बकरी 3,11,944 2,22,288

घोड़े 1240 716

खच्चर 0 60

टट्टू 23 86

गधे 139 91

सूअर 16,309 4,810

खरगोश 310 69

कुत्ता 1,361 406

ऊंट 0 19

हाथी 0 1



पांच साल में पालतू मवेशियों की संख्या में कमी आई है। मवेशियों की संख्या का घटना वाकई चिंता का विषय है, विशेष रूप से दुधारू पशुओं की संख्या कम होने से दूध उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। समय के अनुसार पशुपालकों का पशुपालन में रुचि न लेना पशुधन की संख्या घटने का महत्वपूर्ण कारण है। -डाॅ. पीके सिंह, नोडल अधिकारी 21वीं पशु गणना
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed