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Kaushambi News: बारिश में ढह गया वीरांगना दुर्गा भाभी का जन्मस्थल
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अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई में क्रांतिकारियों का साथ देने वालीं वीरांगना दुर्गा भाभी का ऐतिहासिक मकान बृहस्पतिवार सुबह भारी बारिश जमींदोज हो गया। शहजादपुर स्थित वर्षों पुराने जर्जर मकान को संरक्षित कर संग्रहालय बनाने की योजना थी। गनीमत रही कि हादसे के वक्त कोई मलबे की चपेट में नहीं आया।
दुर्गा भाभी यानी दुर्गावती देवी का नाम देश के स्वतंत्रता संग्राम की उन निडर महिला क्रांतिकारियों में लिया जाता है, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देने में पुरुष क्रांतिकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाया। सांडर्स हत्याकांड के बाद उन्होंने भगत सिंह को अंग्रेजों की नजरों से बचाकर लाहौर से निकालने में अहम भूमिका निभाई थी। यही नहीं, क्रांतिकारियों को हथियार और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने में भी उनका योगदान रहा।
परिवार के सदस्य अमित भट्ठ ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह अचानक जर्जर मकान का हिस्सा भरभराकर गिर गया। दुर्गा भाभी के भतीजे उदयशंकर भट्ठ का परिवार इसी मकान के बगल में रहता है। परिवार में उदयशंकर, उनकी पत्नी सविता देवी, बेटे अमित और आशीष, बहुएं राखी व काजल तथा पौत्र शिवांश और शिवेश शामिल हैं।
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अमित भट्ठ ने बताया कि उनके पिता यानी दुर्गा भाभी के भतीजे उदयशंकर भट्ठ अध्यापन करते हैं। वह भी अध्यापक बनने की तैयारी कर रहे हैं, पार्ट टाइम किराना की दुकान चलाते हैं। परिवार को उम्मीद है कि जन्मस्थली के संरक्षण के लिए प्रशासन ठोस कदम उठाएगा।
संग्रहालय और पुस्तकालय बनाने का था प्रस्ताव
परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक, दुर्गा भाभी की जन्मस्थली को संग्रहालय और पुस्तकालय के रूप में विकसित करने की बात पूर्व में उठी थी। केंद्रीय कानून मंत्री के एक कार्यक्रम में भी इसके संरक्षण और विकास की मांग रखी गई थी। पूर्व सांसद विनोद कुमार सोनकर की ओर से भी प्रयास किए गए थे। करीब पांच करोड़ रुपये के बजट से जीर्णोद्धार कराने का प्रस्ताव दिए जाने की बात कही गई, लेकिन धरातल पर काम शुरू नहीं हो सका।
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दुर्गा भाभी यानी दुर्गावती देवी का नाम देश के स्वतंत्रता संग्राम की उन निडर महिला क्रांतिकारियों में लिया जाता है, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देने में पुरुष क्रांतिकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाया। सांडर्स हत्याकांड के बाद उन्होंने भगत सिंह को अंग्रेजों की नजरों से बचाकर लाहौर से निकालने में अहम भूमिका निभाई थी। यही नहीं, क्रांतिकारियों को हथियार और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने में भी उनका योगदान रहा।
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परिवार के सदस्य अमित भट्ठ ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह अचानक जर्जर मकान का हिस्सा भरभराकर गिर गया। दुर्गा भाभी के भतीजे उदयशंकर भट्ठ का परिवार इसी मकान के बगल में रहता है। परिवार में उदयशंकर, उनकी पत्नी सविता देवी, बेटे अमित और आशीष, बहुएं राखी व काजल तथा पौत्र शिवांश और शिवेश शामिल हैं।
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अमित भट्ठ ने बताया कि उनके पिता यानी दुर्गा भाभी के भतीजे उदयशंकर भट्ठ अध्यापन करते हैं। वह भी अध्यापक बनने की तैयारी कर रहे हैं, पार्ट टाइम किराना की दुकान चलाते हैं। परिवार को उम्मीद है कि जन्मस्थली के संरक्षण के लिए प्रशासन ठोस कदम उठाएगा।
संग्रहालय और पुस्तकालय बनाने का था प्रस्ताव
परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक, दुर्गा भाभी की जन्मस्थली को संग्रहालय और पुस्तकालय के रूप में विकसित करने की बात पूर्व में उठी थी। केंद्रीय कानून मंत्री के एक कार्यक्रम में भी इसके संरक्षण और विकास की मांग रखी गई थी। पूर्व सांसद विनोद कुमार सोनकर की ओर से भी प्रयास किए गए थे। करीब पांच करोड़ रुपये के बजट से जीर्णोद्धार कराने का प्रस्ताव दिए जाने की बात कही गई, लेकिन धरातल पर काम शुरू नहीं हो सका।