{"_id":"5c155106bdec225b65447f0a","slug":"students-are-not-getting-the-mdm","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्राइमरी स्कूल तरना में दो माह से ठंडा पड़ा एमडीएम का चूल्हा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्राइमरी स्कूल तरना में दो माह से ठंडा पड़ा एमडीएम का चूल्हा
Sun, 16 Dec 2018 12:39 AM IST
shailendra Kumar
kaushambi
kaushambi
Published by: shailendra Kumar
Updated Sun, 16 Dec 2018 12:39 AM IST
विज्ञापन
चायल (ब्यूरो)। बीआरसी नेवादा के तरना गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में एमडीएम का चूल्हा दो माह से ठंडा पड़ा है। स्कूल जाने वाले बच्चों को भूखे पेट पढ़ाई करनी पड़ती है। विद्यालय के जिम्मेदार हैं कि वह मार्जिनमनी न आने की बात कहकर मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
प्राथमिक विद्यालय तरना में पंजीकृत छात्र-छात्राआें की संख्या 150 है। स्कूल आने वाले इन बच्चों को दो माह से मध्यान्न भोजन नहीं दिया जा रहा है। इसके पीछे मध्यान्न भोजन बनवाने क लिए आने वाली मार्जिन मनी प्रमुख कारण बताया जा रहा है। इससे विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को भूखे पेट रहकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। ऐसा नहीं है कि मामले की जानकारी महकमे के जिम्मेदारों को नहीं है। बावजूद इसके दो माह से ठंडे पड़े एमडीएम के चूल्हे को गरम करने की कोशिश नहीं हुई।
ग्राम प्रधान श्रीपाल का कहना है कि मार्जिनमनी लगभग एक साल से खाते में नहीं भेजी गई है। इसकी शिकायत कई बार महकमे के उच्चाधिकारियों से की गई। सुनवाई नहीं होने पर दो माह से मध्यान्न भोजन बनवाना बंद कर दिया गया है। मामल में एबीएसए नेवादा अजीत कुमार सिंह से पूछा गया तो उनका कहना है कि मर्जिनमनी देर से पहुंचती है। ग्राम प्रधान को मध्यान्न भोजन बनवाते रहने का निर्देश दिया गया था। यदि भोजन नहीं बन रहा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्राथमिक विद्यालय तरना में पंजीकृत छात्र-छात्राआें की संख्या 150 है। स्कूल आने वाले इन बच्चों को दो माह से मध्यान्न भोजन नहीं दिया जा रहा है। इसके पीछे मध्यान्न भोजन बनवाने क लिए आने वाली मार्जिन मनी प्रमुख कारण बताया जा रहा है। इससे विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को भूखे पेट रहकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। ऐसा नहीं है कि मामले की जानकारी महकमे के जिम्मेदारों को नहीं है। बावजूद इसके दो माह से ठंडे पड़े एमडीएम के चूल्हे को गरम करने की कोशिश नहीं हुई।
विज्ञापन
ग्राम प्रधान श्रीपाल का कहना है कि मार्जिनमनी लगभग एक साल से खाते में नहीं भेजी गई है। इसकी शिकायत कई बार महकमे के उच्चाधिकारियों से की गई। सुनवाई नहीं होने पर दो माह से मध्यान्न भोजन बनवाना बंद कर दिया गया है। मामल में एबीएसए नेवादा अजीत कुमार सिंह से पूछा गया तो उनका कहना है कि मर्जिनमनी देर से पहुंचती है। ग्राम प्रधान को मध्यान्न भोजन बनवाते रहने का निर्देश दिया गया था। यदि भोजन नहीं बन रहा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन