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सदमे में कुनबा, बुझ गया घर का चिराग
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Mon, 29 Jun 2015 01:39 AM IST
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मंझनपुर (ब्यूरो)। सड़क हादसे में शनिवार की रात हुई शनि की मौत चकनरई गांव के राकेश के कुनबे के लिए बड़ा बज्रपात है। इकलौते बेटे की मौत से पूरे परिवार में मातम पसरा है। जिगर के टुकड़े के हमेशा के लिए छिन जाने से मां तो अचेत पड़ी है। परिवार के अन्य सदस्यों की भी रो-रोकर हालत खराब बनी है। घटना से गांववाले भी सन्न हैं।
बता दें कि मंझनपुर के चकनरई गांव का राकेश कुमार तीन भाईयों में सबसे छोटा है। उसके दो भाई अवधेश और कमलेश चायल में रहते हैं। पत्नी और इकलौते बेटे शनि (17) के साथ घर में रहने वाला राकेश खेती-किसानी करता है।
यही उसकी जीविका का साधन है। छोटा परिवार होने के कारण वह खेती से ही जीवन यापन के लिए कमा लेता था। इससे परिवार खुशहाल बना था। अचानक इस परिवार को जाने किसकी नजर लग गई। दो दिन पहले घर में आग लग गई थी। सूचना पर शनिवार को उसकी भतीजी नीलू, शीलू, भतीजा रवि चकनरई आए थे। रात में भाई की तबीयत खराब होने की सूचना मिली तो शनि अपने चचेरे भाई, बहनों के साथ टेंपो से चायल जा रहा था। मगर यह सफर उसके जीवन का आखिरी सफर साबित हुआ।
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रास्ते में टेंपो पलटने से उसकी मौत हो गई। इकलौते बेटे शनि की मौत परिवार के लिए पहाड़ जैसा दुख लेकर आई है। बेटे की मौत सुनते ही मां सदमे में कुछ देर तो दहाड़ें मार-मारकर बिलखती रही। कुछ देर बाद वह गिरकर अचेत हो गई। 24 घंटे से वह इसी हालत में पड़ी है। कुछ देर में जब भी उसे होश आता है वह शनि-शनि करके चीखने-चिल्लाने लगती है। चचेरे भाई की मौत का ऐसा ही गम चचेरे-भाई बहनों पर भी है। घटना से पूरा गांव सन्न है। गांव की महिलाओं की दिन भर उसके घर में भीड़ लगी रही। मगर यह महिलाएं भी आंसू ही बहाती नजर आईं। किसी भी महिला के पास वे शब्द नहीं थे जो बोलकर वे शनि की मां को दिलासा दिला पातीं।
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बता दें कि मंझनपुर के चकनरई गांव का राकेश कुमार तीन भाईयों में सबसे छोटा है। उसके दो भाई अवधेश और कमलेश चायल में रहते हैं। पत्नी और इकलौते बेटे शनि (17) के साथ घर में रहने वाला राकेश खेती-किसानी करता है।
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यही उसकी जीविका का साधन है। छोटा परिवार होने के कारण वह खेती से ही जीवन यापन के लिए कमा लेता था। इससे परिवार खुशहाल बना था। अचानक इस परिवार को जाने किसकी नजर लग गई। दो दिन पहले घर में आग लग गई थी। सूचना पर शनिवार को उसकी भतीजी नीलू, शीलू, भतीजा रवि चकनरई आए थे। रात में भाई की तबीयत खराब होने की सूचना मिली तो शनि अपने चचेरे भाई, बहनों के साथ टेंपो से चायल जा रहा था। मगर यह सफर उसके जीवन का आखिरी सफर साबित हुआ।
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रास्ते में टेंपो पलटने से उसकी मौत हो गई। इकलौते बेटे शनि की मौत परिवार के लिए पहाड़ जैसा दुख लेकर आई है। बेटे की मौत सुनते ही मां सदमे में कुछ देर तो दहाड़ें मार-मारकर बिलखती रही। कुछ देर बाद वह गिरकर अचेत हो गई। 24 घंटे से वह इसी हालत में पड़ी है। कुछ देर में जब भी उसे होश आता है वह शनि-शनि करके चीखने-चिल्लाने लगती है। चचेरे भाई की मौत का ऐसा ही गम चचेरे-भाई बहनों पर भी है। घटना से पूरा गांव सन्न है। गांव की महिलाओं की दिन भर उसके घर में भीड़ लगी रही। मगर यह महिलाएं भी आंसू ही बहाती नजर आईं। किसी भी महिला के पास वे शब्द नहीं थे जो बोलकर वे शनि की मां को दिलासा दिला पातीं।