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Kaushambi News: कॅरिअर बनाने गई थी आगरा मेडिकल कॉलेज, गले लगाई मौत
Sat, 15 Feb 2025 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 15 Feb 2025 12:55 AM IST
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आगरा के राजा मंडी क्षेत्र में शोहदे की बेजा हरकतों और ब्लेकमेल करने से परेशान होकर बुधवार को खुदकुशी करने वाली छात्रा कौशाम्बी के पश्चिमशरीरा से कॅरिअर बनाने के लिए मेडिकल की पढ़ाई करने गई थी। वह लक्ष्य हासिल कर घर आती, इससे पहले बृहस्पतिवार रात घर उसका शव आया। बेटी की मौत से पीड़ित परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शुक्रवार को गम व गुस्से के बीच परिजनों ने गांव में ही होनहार बेटी के शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
पश्चिमशरीरा इलाके के एक गांव में रहने वाले छात्रा के पिता खेती-किसानी करते हैं। उनकी चार बेटियों में बड़ी बेटी आगरा के एसएन मेडिकल काॅलेज में सीटी स्कैन टेक्नीशियन की पढ़ाई कर रही थी। साल भर पहले ही काउंसलिंग के बाद उसका एडमिशन हुआ था। वह राजामंडी क्षेत्र के किदवई पार्क के समीप किराए का कमरा लेकर रहती थी।
डबडबाई आंखों के साथ भरे गले से पिता ने बताया कि तीन छोटी बेटियां गांव के ही स्कूल में पढ़ती हैं। बेटा एक भी नहीं है। पढ़ाई करने आगरा गई बड़ी बेटी का सपना था कि वह मेडिकल क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाकर सरकारी नौकरी करेगी और एक बेटे की तरह पिता के बुढ़ापे का सहारा बनेगी। लेकिन, उसे और परिवार वालों को क्या पता था कि उसकी यह ख्वाहिश अधूरी रह जाएगी।
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मामी को बताई थी दिल की बात
-- मृतका की मां ने बताया कि हर दिन बेटी फोन कर घर में सभी का हाल पूछती थी। पिता की तबीयत खराब रहने के कारण छात्रा उन्हें सलाह देती कि समय-समय पर वह दवाई लेते रहें। गम के बीच परिवार के लोगों में गुस्सा भी नजर आ रहा था। पिता के मुताबिक छात्रा ने शोहदे के बारे में कई बार बताया था कि वह ब्लैकमेल कर रहा है, लेकिन वह अपनी बेटी को ही समझाते रहे। इधर तीन दिन से वह काफी परेशान रहती थी। उसने अपनी मामी को भी फोन कर शोहदे के बारे में बताते हुए खुदकुशी करने की बात कही थी। इस पर परिवार के लोग एक-दो दिन बाद उससे मिलने आगरा जाने वाले थे।
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जब से गई, घर वापस नहीं लौटी छात्रा
परिवार वालों ने बताया कि बेटी का प्रवेश करीब साल भर पहले हुआ था। आगरा में पिता के साथ जाकर कॉलेज ज्वाइन करने के बाद किराए का कमरा देखा और वहीं शिफ्ट हो गई। जब से वह पढ़ाई के लिए गई थी, तब से घर नहीं आई थी। पूछने पर यही कहती थी कि उसकी पढ़ाई पिछड़ जाएगी। यह भी कहती थी कि वह फोन पर सभी का हाल-चाल ले ही लेती है, इसलिए पढ़ाई छोड़कर आना जरूरी नहीं है।
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पश्चिमशरीरा इलाके के एक गांव में रहने वाले छात्रा के पिता खेती-किसानी करते हैं। उनकी चार बेटियों में बड़ी बेटी आगरा के एसएन मेडिकल काॅलेज में सीटी स्कैन टेक्नीशियन की पढ़ाई कर रही थी। साल भर पहले ही काउंसलिंग के बाद उसका एडमिशन हुआ था। वह राजामंडी क्षेत्र के किदवई पार्क के समीप किराए का कमरा लेकर रहती थी।
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डबडबाई आंखों के साथ भरे गले से पिता ने बताया कि तीन छोटी बेटियां गांव के ही स्कूल में पढ़ती हैं। बेटा एक भी नहीं है। पढ़ाई करने आगरा गई बड़ी बेटी का सपना था कि वह मेडिकल क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाकर सरकारी नौकरी करेगी और एक बेटे की तरह पिता के बुढ़ापे का सहारा बनेगी। लेकिन, उसे और परिवार वालों को क्या पता था कि उसकी यह ख्वाहिश अधूरी रह जाएगी।
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मामी को बताई थी दिल की बात
जब से गई, घर वापस नहीं लौटी छात्रा
परिवार वालों ने बताया कि बेटी का प्रवेश करीब साल भर पहले हुआ था। आगरा में पिता के साथ जाकर कॉलेज ज्वाइन करने के बाद किराए का कमरा देखा और वहीं शिफ्ट हो गई। जब से वह पढ़ाई के लिए गई थी, तब से घर नहीं आई थी। पूछने पर यही कहती थी कि उसकी पढ़ाई पिछड़ जाएगी। यह भी कहती थी कि वह फोन पर सभी का हाल-चाल ले ही लेती है, इसलिए पढ़ाई छोड़कर आना जरूरी नहीं है।