शक्तिपीठ कड़ाधाम : बाधाओं से मुक्ति के लिए पूजी गईं ब्रह्मचारिणी, मां शीतला के दरबार में उमड़ी भीड़
शुक्रवार को भक्तों ने माता ब्राम्हाचारिणी स्वरूप की पूजा की। इनकी पूजा का विशेष पौराणिक महत्व बताया गया है। इनकी पूजा करने से मनुष्य के सभी कार्य पूरे होते हैं और कार्यों में आनेवाली वाली रुकावटें ,बाधाएं दूर हो जाती हैं। तप, त्याग,आंतरिक शाक्ति जैसे गुणों की प्राप्ती होती है और इनके आशीर्वाद से सभी तरह की परेशानियां खत्म होती हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
51 शाक्तिपीठ में शामिल कड़ाधाम में नवरात्रि के दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही भक्त कड़ा के विभिन्न घाटों पर स्नान कर माता शीतला के दरबार पहुंचे। शुक्रवार को भक्तों ने माता ब्राम्हाचारिणी स्वरूप की पूजा की। इनकी पूजा का विशेष पौराणिक महत्व बताया गया है। इनकी पूजा करने से मनुष्य के सभी कार्य पूरे होते हैं और कार्यों में आनेवाली वाली रुकावटें ,बाधाएं दूर हो जाती हैं। तप, त्याग,आंतरिक शाक्ति जैसे गुणों की प्राप्ती होती है और इनके आशीर्वाद से सभी तरह की परेशानियां खत्म होती हैं।
माता ब्राम्हाचारिणी को उमा,अर्पणा, तपश्चारिणी नामों से भी जाना जाता है। मान्यता है कि सती के आत्मदाह कर लेने के बाद पार्वती का जन्म हुआ और भगवान शंकर से विवाह के लिए हजारों सालों तक तपस्या की थी। माता ब्राह्मणचारिणी की पूजा के लिए पीले या सफेद वस्त्र धारण करना चाहिए। इन्हें चीनी से बनी वस्तुएं अत्यंत प्रिय हैं और अड़हुल फूल, कमल, लौंग, अक्षत, इलायची अर्पित करना चाहिए।
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मां ब्राम्हाचारिणी के लिए ऊं ऐं नमः मंत्र जाप करना चाहिए। कड़ाधाम में नवरात्रि के दूसरे दिन प्रशासन द्वारा भक्तों की सुविधा के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रही। कडाधाम थानाध्यक्ष धीरेंद्र सिंह मय फोर्स मेला क्षेत्र में चप्पे चप्पे पर भ्रमण करते रहे।