{"_id":"5e405ff88ebc3ee61e69b38a","slug":"send-blood-samples-to-20-horses-for-examination-kaushambi-news-ald2680514183","type":"story","status":"publish","title_hn":"20 घोड़ों के खून के नमूने जांच को भेजे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
20 घोड़ों के खून के नमूने जांच को भेजे
विज्ञापन
20 घोड़ों के खून के नमूने जांच को भेजे
ग्लैंडर्स बीमारी का पता लगाने की कवायद शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। प्रदेश के कई जिलों में घोड़ों, खच्चरों और गधों में जानलेवा बीमारी ग्लैंडर्स के लक्षण पाए गए हैं। इससे पशु पालन विभाग की टीम सतर्क हो गई है। पशु चिकित्सा विभाग ने 20 घोड़ों के खून का नमूना परीक्षण के लिए हरियाणा के हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र भेजा है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीपी पाठक ने बताया कि गधों, घोड़ों और खच्चरों को ग्लैंडर्स बीमारी होती है। अगर किसी पशु में यह बीमारी पाई जाती है तो गहरे गड्ढे खोदकर दफना दिया जाता है। इस बीमारी को फैलने से रोकने का यही एकमात्र उपाय है। हर महीने अभियान चलाकर एक से पांच तारीख के बीच अश्ववंशी पशुओं का रक्त परीक्षण कराया जा रहा है। ताकि ग्लैंडर्स से संक्रमित पशु की पहचान कर अन्य पशुओं को बचाया जा सके। इस महीने भी पशु चिकित्सकों की टीम ने 20 घोड़े-खच्चरों के रक्त के नमूने लिए हैं। नमूने परीक्षण के लिए हरियाणा के हिसार स्थित प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं।
-------
इसी हफ्ते लगाई जाएगी कार्यशाला
मंझनपुर। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीपी पाठक ने बताया कि इसी हफ्ते विकास भवन के सरस हाल में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इसमें पशु चिकित्साधिकारी, पशुधन प्रसार अधिकारी, फार्मासिस्ट को ग्लैंडर्स के बाबत प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद अभियान चलाकर पशुपालकों को बीमारी के लक्षणों और बचाव की जानकारी दी जाएगी।
विज्ञापन
-----------
25 हजार का मिलता है अनुदान
मंझनपुर। सीवीओ ने बताया कि ग्लैंडर्स की चपेट में आए पशुओं को मारने से पहले उनके मालिकों को प्रति पशु 25 हजार रुपये का मुआवजा मुहैया कराने का प्रावधान है। ताकि पशुपालक की क्षतिपूर्ति हो सके। यह बीमारी पशुओं से इंसानों में भी फैलने की आशंका रहती है। इससे सतर्कता बरतने की जरूरत है।
-----------
ऐसे फैलता है ग्लैंडर्स
मंझनपुर। ग्लैंडर्स संक्रामक रोग है। इस बीमारी के वैक्टीरिया कोशिकाओं में प्रवेश कर जाते हैं। इलाज से भी ये नहीं मरते हैं। ऐसे में दूसरे जानवर और इंसान भी इससे संक्रमित हो जाते हैं। यह बीमारी ऑक्सीजन के जरिए फैलती है। शरीर में गांठें पड़ जाती हैं। गांठों में संक्रमण होने के कारण घोड़ा उठ नहीं पाता है। साथ ही पशु खांसी से ग्रसित हो जाता है। नाक से स्राव होता है। बाद में मौत हो जाती है।
------------
ऐसे करें बचाव
पशु को समय पर ताजा चारा व पानी दें।
ज्यादा देर तक मिट्टी-कीचड़ में न रहने दें।
साफ-सफाई का ध्यान रखें।
दवाओं का छिड़काव जरूर करें।
बीमार पशुओं के नजदीक न जाए
विज्ञापन
ग्लैंडर्स बीमारी का पता लगाने की कवायद शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। प्रदेश के कई जिलों में घोड़ों, खच्चरों और गधों में जानलेवा बीमारी ग्लैंडर्स के लक्षण पाए गए हैं। इससे पशु पालन विभाग की टीम सतर्क हो गई है। पशु चिकित्सा विभाग ने 20 घोड़ों के खून का नमूना परीक्षण के लिए हरियाणा के हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र भेजा है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीपी पाठक ने बताया कि गधों, घोड़ों और खच्चरों को ग्लैंडर्स बीमारी होती है। अगर किसी पशु में यह बीमारी पाई जाती है तो गहरे गड्ढे खोदकर दफना दिया जाता है। इस बीमारी को फैलने से रोकने का यही एकमात्र उपाय है। हर महीने अभियान चलाकर एक से पांच तारीख के बीच अश्ववंशी पशुओं का रक्त परीक्षण कराया जा रहा है। ताकि ग्लैंडर्स से संक्रमित पशु की पहचान कर अन्य पशुओं को बचाया जा सके। इस महीने भी पशु चिकित्सकों की टीम ने 20 घोड़े-खच्चरों के रक्त के नमूने लिए हैं। नमूने परीक्षण के लिए हरियाणा के हिसार स्थित प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं।
विज्ञापन
-------
इसी हफ्ते लगाई जाएगी कार्यशाला
मंझनपुर। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीपी पाठक ने बताया कि इसी हफ्ते विकास भवन के सरस हाल में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इसमें पशु चिकित्साधिकारी, पशुधन प्रसार अधिकारी, फार्मासिस्ट को ग्लैंडर्स के बाबत प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद अभियान चलाकर पशुपालकों को बीमारी के लक्षणों और बचाव की जानकारी दी जाएगी।
विज्ञापन
-----------
25 हजार का मिलता है अनुदान
मंझनपुर। सीवीओ ने बताया कि ग्लैंडर्स की चपेट में आए पशुओं को मारने से पहले उनके मालिकों को प्रति पशु 25 हजार रुपये का मुआवजा मुहैया कराने का प्रावधान है। ताकि पशुपालक की क्षतिपूर्ति हो सके। यह बीमारी पशुओं से इंसानों में भी फैलने की आशंका रहती है। इससे सतर्कता बरतने की जरूरत है।
-----------
ऐसे फैलता है ग्लैंडर्स
मंझनपुर। ग्लैंडर्स संक्रामक रोग है। इस बीमारी के वैक्टीरिया कोशिकाओं में प्रवेश कर जाते हैं। इलाज से भी ये नहीं मरते हैं। ऐसे में दूसरे जानवर और इंसान भी इससे संक्रमित हो जाते हैं। यह बीमारी ऑक्सीजन के जरिए फैलती है। शरीर में गांठें पड़ जाती हैं। गांठों में संक्रमण होने के कारण घोड़ा उठ नहीं पाता है। साथ ही पशु खांसी से ग्रसित हो जाता है। नाक से स्राव होता है। बाद में मौत हो जाती है।
------------
ऐसे करें बचाव
पशु को समय पर ताजा चारा व पानी दें।
ज्यादा देर तक मिट्टी-कीचड़ में न रहने दें।
साफ-सफाई का ध्यान रखें।
दवाओं का छिड़काव जरूर करें।
बीमार पशुओं के नजदीक न जाए